पीयूष गोयल का राहुल गांधी पर पलटवार: कांग्रेस ने CEC को बनाया था मंत्री और राज्यपाल

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड की याद दिलाई, जिसमें चुनाव आयुक्तों को सांसद, मंत्री और राज्यपाल जैसे राजनीतिक पद दिए गए थे।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस पर संविधान के हर महत्वपूर्ण पहलू को ध्वस्त करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी का वर्तमान रवैया पूरी तरह से बचकाना है। पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपने पुराने रिकॉर्ड और इतिहास को याद करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने हमेशा इस बात की पैरवी की है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था के रूप में कार्य करे, ताकि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे और उसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप न हो।

कांग्रेस शासन में राजनीतिक नियुक्तियों का इतिहास

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में किसी भी चुनाव आयुक्त को कोई राजनीतिक पद नहीं दिया गया है। इसके विपरीत, उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय चुनाव आयुक्तों को सांसद और मंत्री जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों से नवाजा गया था। पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शेषन का नाम अपनी निष्पक्षता के लिए जाना जाता था, लेकिन कांग्रेस ने बाद में उन्हें 1999 के चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतार दिया। गोयल ने सवाल उठाया कि क्या यह निष्पक्षता के नाम पर राजनीतिक लाभ देने का प्रयास नहीं था?

पीयूष गोयल ने आगे कहा कि अगर राहुल गांधी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो एक मुख्य चुनाव आयुक्त को पार्टी टिकट पर उम्मीदवार बनाया गया, एक को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया गया और दो मुख्य चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल बनाया गया। उन्होंने एक पुरानी घटना का भी जिक्र किया जब एक मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह शिकायत की थी कि उनके नीचे काम करने वाला चुनाव आयुक्त कांग्रेस के एजेंट की तरह काम कर रहा है, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उसे पद से हटाने से इनकार कर दिया था। गोयल के अनुसार, ऐसा पक्षपात किसी भी अन्य सरकार में शायद ही देखा गया होगा।

एमएस गिल और अन्य अधिकारियों का मामला

केंद्रीय मंत्री ने एमएस गिल के मामले पर विस्तार से बात की, जो 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। गोयल ने बताया कि 2000 में पद पर रहते हुए ही एमएस गिल को पद्म विभूषण से नवाजा गया था। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह उनकी चापलूसी का इनाम नहीं था? गोयल ने आगे बताया कि रिटायरमेंट के केवल 3 साल बाद एमएस गिल कांग्रेस में शामिल हो गए, 2004 में राज्यसभा पहुंचे और 2008 में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री बना दिया गया। पीयूष गोयल ने इसे इस बात का पुख्ता सबूत बताया कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग के कार्यालय को कितने निचले स्तर पर गिरा दिया था और अधिकारियों का राजनीतिक दुरुपयोग किया था।

गोयल ने केरल के पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी टीकाराम मीणा का भी उदाहरण दिया, जिन्हें एक साल बाद कांग्रेस की राजस्थान मेनिफेस्टो टीम में शामिल कर लिया गया था। इसी तरह, उन्होंने रतन यू केलकर का जिक्र किया जो मई 2026 में केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी थे। गोयल ने आरोप लगाया कि चुनाव के तुरंत बाद वर्तमान मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने उन्हें अपना मुख्य सचिव घोषित कर दिया। उन्होंने पूछा कि क्या यह राजनीतिक रोटियां सेंकना नहीं है कि चुनाव में मदद के बदले पद दिया जाए?

चुनाव आयुक्तों की चयन प्रक्रिया में सुधार

पीयूष गोयल ने वर्तमान सरकार द्वारा किए गए सुधारों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पहले चुनाव आयुक्त का चयन पूरी तरह से सरकार के हाथ में होता था और जिसे चाहा उसे मुख्य बना दिया जाता था। लेकिन मोदी सरकार ने 2023 में एक नया कानूनी प्रावधान किया, जिसके तहत नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति का सदस्य बनाया गया। अब प्रधानमंत्री के साथ नेता प्रतिपक्ष भी यह तय करते हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त कौन बनेगा, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है।

विपक्ष के भीतर विरोधाभास और एसआईआर का मुद्दा

पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस के कई नेता खुद राहुल गांधी के दावों के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्होंने शशि थरूर और रमेश चेन्नीथला का नाम लेते हुए कहा कि इन नेताओं ने खुद माना है कि एसआईआर के कारण केरल में कांग्रेस चुनाव जीती है। केरल के मुख्यमंत्री और अधीर रंजन चौधरी ने भी चुनाव आयोग के काम की तारीफ की है। गोयल ने तंज कसा कि जब उनके अपने नेता आयोग की सराहना कर रहे हैं, तब पार्टी वोट चोरी के बेबुनियाद दावे कर रही है।

राजीव रंजन सिंह का अराजकता पर प्रहार

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में पिछले कुछ दिनों से नौटंकी और अराजकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है जिसे जनता स्वीकार नहीं करेगी। सिंह ने आरोप लगाया कि ये लोग अपने परिवार को बढ़ावा देने के लिए संस्थाओं पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने बाहरुल इस्लाम का उदाहरण दिया जो कांग्रेस सांसद थे, फिर जज बने और बाद में फिर राज्यसभा भेजे गए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश को फिर से इमरजेंसी के दौर में ले जाना चाहते हैं, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया है।