ईरान ने मोसाद के कथित जासूस को दी फांसी, ट्रंप के दावों के बीच बड़ी कार्रवाई

ईरान ने इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में एर्फान कियानी को फांसी दे दी है। उन पर इस्फहान परमाणु केंद्र पर हमले और जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने का आरोप था। यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों के बीच हुई है जिनमें उन्होंने फांसी रुकने की बात कही थी।

ईरान ने शनिवार को एक और व्यक्ति को फांसी की सजा दे दी है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान ने शनिवार सुबह एर्फान कियानी नामक व्यक्ति को फांसी के फंदे पर लटका दिया। ईरानी अधिकारियों ने कियानी पर इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद से जुड़े होने का गंभीर आरोप लगाया था। इसके साथ ही उन पर जनवरी 2026 में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल होने का भी आरोप था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता की संभावना प्रबल हो गई है।

इस्फहान परमाणु केंद्र पर हमले और अन्य आरोप

ईरान की न्यायपालिका से जुड़ी आधिकारिक समाचार एजेंसी 'मिज़ान' ने इस मामले की विस्तृत जानकारी साझा की है। मिज़ान के अनुसार, एर्फान कियानी को इस्फहान शहर में सुरक्षा बलों पर हमला करने, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने, आगजनी और समाज में आतंक फैलाने के आरोपों में दोषी पाया गया था। सबसे महत्वपूर्ण आरोप इस्फहान परमाणु केंद्र पर हमले से जुड़ा था, जिसमें कियानी को दोषी ठहराया गया। अदालत ने सुनवाई के दौरान उसे “मोसाद का किराए का गुंडा” करार दिया। ईरानी सुरक्षा बलों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा की पुष्टि किए जाने के बाद शनिवार तड़के उसे फांसी दे दी।

डोनाल्ड ट्रंप के दावों और जमीनी हकीकत में विरोधाभास

यह फांसी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके हस्तक्षेप के कारण ईरान में फांसी की सजाएं रुक गई हैं। ट्रंप के दावों के उलट, तेहरान में लगातार लोगों को फांसी के फंदे पर लटकाया जा रहा है। ईरान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रदर्शनकारियों और विदेशी जासूसों को मौत की सजा देना जारी रखेगी। ईरान का मानना है कि तेहरान और देश के अन्य हिस्सों में हुए पूर्व के सभी प्रदर्शन विदेशी ताकतों, विशेषकर इजरायल और पश्चिमी देशों द्वारा प्रायोजित और समर्थित थे।

मानवाधिकार संगठनों की चिंता और कानूनी प्रक्रिया

मानवाधिकार संगठनों ने ईरान की इस कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठनों का आरोप है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में मुकदमे पूरी तरह से गुप्त रूप से चलाए जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि आरोपियों को उचित कानूनी बचाव का अधिकार नहीं दिया जाता और न ही उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलता है। हाल के हफ्तों में ईरान में मोसाद से कथित संबंध रखने वाले कई व्यक्तियों को फांसी दी जा चुकी है। यह फांसी हाल के ईरान-इजरायल युद्ध और उसके बाद जनवरी में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद शुरू हुई फांसियों की एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है।