ईरान: मुज्तबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर, 'रहबर एंघेलाब' नाम से पहचान

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने आधिकारिक तौर पर 'रहबर एंघेलाब' की उपाधि धारण की है। 56 वर्षीय मुज्तबा ने अपने पहले संबोधन में अमेरिका और इजरायल के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने छह भाषाओं में सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

ईरान के राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व में एक ऐतिहासिक परिवर्तन के तहत मुज्तबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है और आधिकारिक घोषणा के बाद मुज्तबा खामेनेई ने अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान 'रहबर एंघेलाब' के रूप में स्थापित की है। 8 मार्च को हुई इस नियुक्ति के बाद उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स का नाम बदलकर यही उपाधि रखी है। मुज्तबा खामेनेई ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे पुत्र हैं और लंबे समय से देश की सत्ता संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उनके पदभार ग्रहण करने के साथ ही ईरान की आंतरिक और विदेश नीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुज्तबा ने अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में स्पष्ट किया है कि ईरान अपनी वर्तमान नीतियों पर अडिग रहेगा।

'रहबर एंघेलाब' का अर्थ और ऐतिहासिक महत्व

ईरानी साहित्य और फारसी भाषा के विशेषज्ञों के अनुसार 'रहबर एंघेलाब' शब्द का गहरा ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक अर्थ है। 'एंघेलाब' एक फारसी शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ 'क्रांति' या 'बड़ा परिवर्तन' होता है। यह शब्द 1979 की इस्लामिक क्रांति के समय से ही ईरानी जनमानस में गहराई से रचा-बसा है। तेहरान की प्रसिद्ध 'एंघेलाब स्ट्रीट' इसी क्रांति की याद में नामित की गई थी जहाँ ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन हुए थे। वहीं 'रहबर' शब्द का अर्थ 'मार्गदर्शक' या 'नेता' होता है। इस प्रकार 'रहबर एंघेलाब' का पूर्ण अर्थ 'क्रांति का मार्गदर्शक' है। मुज्तबा खामेनेई द्वारा इस उपाधि को अपनाना इस बात का संकेत है कि वे 1979 की क्रांति के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई का सोशल मीडिया पर आधिकारिक नाम 'खामेनेई ईरान' था लेकिन मुज्तबा ने अधिक वैचारिक शीर्षक को चुना है।

मुज्तबा खामेनेई का सैन्य और राजनीतिक सफर

56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई का सार्वजनिक जीवन सैन्य सेवा से शुरू हुआ था। वे मात्र 17 वर्ष की आयु में ईरानी सेना में शामिल हो गए थे और उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान सक्रिय रूप से मोर्चे पर नेतृत्व किया था। युद्ध के अनुभव ने उन्हें सेना और सुरक्षा बलों के भीतर एक मजबूत आधार प्रदान किया। 1990 के दशक में उन्होंने अपने पिता के कार्यालय यानी 'सुप्रीम लीडर ऑफिस' में अपनी सेवाएं देना शुरू किया। यहाँ उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय का महत्वपूर्ण कार्य संभाला। वर्ष 2022 में उन्हें धार्मिक और राजनीतिक हलकों में 'अयातुल्ला' की पदवी से नवाजा गया जो ईरान के धार्मिक पदानुक्रम में एक उच्च स्थान है। वे लंबे समय से राजनीतिक मामलों की निर्णायक समिति का हिस्सा रहे हैं जहाँ देश के बड़े नीतिगत फैसले लिए जाते हैं।

सोशल मीडिया पर वैश्विक उपस्थिति और पहला संबोधन

पदभार संभालने के मात्र दो दिनों के भीतर मुज्तबा खामेनेई की डिजिटल उपस्थिति में भारी उछाल देखा गया है। उन्होंने अपनी बात दुनिया तक पहुँचाने के लिए छह अलग-अलग भाषाओं में सोशल मीडिया अकाउंट्स तैयार किए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर उनके फॉलोअर्स की संख्या 10 लाख के पार पहुँच गई है। अपने पहले आधिकारिक संबोधन के लिए उन्होंने इसी डिजिटल माध्यम का उपयोग किया। अपने संदेश में उन्होंने अमेरिका और इजरायल के प्रति ईरान के कड़े रुख को दोहराया है और उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की क्षेत्रीय नीतियां और प्रतिरोध की विचारधारा में कोई बदलाव नहीं होगा। यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति बनी हुई है। मुज्तबा के इस कदम को वैश्विक स्तर पर सीधे संवाद करने की एक नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

नियुक्ति प्रक्रिया और आर्थिक पृष्ठभूमि

मुज्तबा खामेनेई की नियुक्ति ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' द्वारा की गई है जो देश के सर्वोच्च नेता के चयन के लिए जिम्मेदार संवैधानिक निकाय है। अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद इस निर्णायक समिति ने मुज्तबा के नाम पर मुहर लगाई और उनकी नियुक्ति को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे क्योंकि वे प्रशासनिक और सैन्य दोनों क्षेत्रों में अनुभवी माने जाते हैं। आर्थिक मोर्चे पर ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार मुज्तबा खामेनेई की वित्तीय पृष्ठभूमि भी काफी चर्चा में रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लंदन और खाड़ी देशों के विभिन्न निवेशों में उनके पास 100 मिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति है। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने हमेशा इन दावों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। वर्तमान में मुज्तबा का पूरा ध्यान ईरान की आंतरिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की स्थिति को मजबूत करने पर केंद्रित है।