ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने सत्ता के पारंपरिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव किया है। अमेरिका के साथ जारी युद्ध और तनाव के बीच यह खबर सामने आई है कि ईरान के सभी महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले अब आईआरजीसी के प्रमुख और कमांडर ही ले रहे हैं। देश के सबसे शक्तिशाली पद माने जाने वाले सुप्रीम लीडर को अब केवल इन फैसलों के बारे में सूचित किया जा रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई अब केवल एक मुहर लगाने वाले प्रमुख की भूमिका में रह गए हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने वार्ता में बाधा डालने के लिए आईआरजीसी को जिम्मेदार ठहराया है।
मुज्तबा खामेनेई की स्थिति और स्वास्थ्य पर सवाल
मार्च 2026 में ईरान के सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त होने के बाद से मुज्तबा खामेनेई सार्वजनिक जीवन से दूर हैं और अंडरग्राउंड बताए जा रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजराइल के हमले में मुज्तबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके कारण वे ठीक से बोलने में असमर्थ हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी कराई है। हालांकि, ईरानी प्रशासन ने मुज्तबा की स्थिति को लेकर अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। यह पिछले एक महीने से अधिक समय में पहली बार है जब ईरान का सुप्रीम लीडर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिया है।
पावर स्ट्रक्चर में बदलाव और IRGC का प्रभुत्व
ईरान के संवैधानिक ढांचे में सुप्रीम लीडर ही चीफ कमांडर होता है और सभी बड़े मामलों में अंतिम फैसला लेने का अधिकार उसी के पास होता है और मुज्तबा से पहले, अयातुल्ला अली खामेनेई वरिष्ठ कमांडरों के साथ विचार-विमर्श करते थे, लेकिन अंतिम निर्णय उनका स्वयं का होता था। वर्तमान में जंग की परिस्थितियों के कारण आईआरजीसी ने इस शक्ति को अपने नियंत्रण में ले लिया है। अब फैसले आईआरजीसी द्वारा लिए जाते हैं और मुज्तबा को केवल उनकी जानकारी दी जाती है।
अहमद वाहिदी और आईआरजीसी की भूमिका
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वर्तमान प्रमुख अहमद वाहिदी हैं, जिन्हें खामेनेई परिवार का बेहद करीबी माना जाता है। वाहिदी की नियुक्ति इसी साल मार्च में पाकपूर के स्थान पर की गई थी। पाकपूर की मृत्यु सीनियर खामेनेई के साथ एक बैठक के दौरान हुई थी। आईआरजीसी की स्थापना 1979 में सुप्रीम लीडर के पद की रक्षा के लिए की गई थी और वर्तमान में इस बल में लगभग 2 लाख सदस्य शामिल हैं।
अमेरिका के साथ जारी संघर्ष ने ईरान के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। जहां पहले सुप्रीम लीडर के पास अंतिम शक्ति होती थी, वहीं अब आईआरजीसी के कमांडर ही देश की दिशा तय कर रहे हैं। मुज्तबा खामेनेई की अनुपस्थिति और उनके स्वास्थ्य को लेकर बनी रहस्यमयी स्थिति ने आईआरजीसी को सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर दिया है।
