होर्मुज बंद होने पर भी भारत सुरक्षित, ओपेक की फूट से मिलेगा फायदा

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बावजूद भारत की तेल आपूर्ति 44 लाख बैरल प्रतिदिन पर स्थिर बनी हुई है। ओपेक (OPEC) में आई दरार और संयुक्त अरब अमीरात के बाहर निकलने से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे भारत को इराक से होने वाली आपूर्ति की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने के बावजूद भारत की तेल आपूर्ति पर कोई बड़ा संकट मंडराता नहीं दिख रहा है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) में आई दरार का सीधा फायदा भारत को मिलने की उम्मीद है। आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज के बंद होने के बावजूद अप्रैल महीने में भारत की तेल आपूर्ति 44 लाख बैरल प्रतिदिन रही है, जो कि 2025-26 की औसत आपूर्ति 48 लाख बैरल प्रतिदिन से सिर्फ 4 लाख 40 हजार बैरल कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओपेक में आई इस टूट से इस मामूली कमी की भरपाई आसानी से की जा सकती है।

ओपेक में फूट और भारत के लिए नए अवसर

होर्मुज संकट के बीच ओपेक देशों के बीच बढ़ती आपसी फूट भारत के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ओपेक और ओपेक+ से बाहर निकलने के फैसले के बाद वैश्विक तेल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के आसार हैं। इसका सीधा लाभ भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को मिलेगा। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत की आपूर्ति में जो कमी आई थी, अब ओपेक की इस दरार से उसके पूरा होने की संभावना है। वर्तमान में होर्मुज के बंद होने से भारत को औसतन 4,80,000 बैरल प्रतिदिन तेल की कमी हो रही है, विशेषकर इराक से होने वाली सप्लाई लगभग ठप है।

सऊदी अरब और यूएई से वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति

भारत की तेल आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।

ओमान और वेनेजुएला से बढ़ी तेल की खरीद

भारत ने अपनी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए ओमान और वेनेजुएला जैसे देशों पर निर्भरता बढ़ाई है और ओमान से तेल की सप्लाई, जो 2025-26 में मात्र 18 हजार बैरल प्रतिदिन थी, अब बढ़कर 1 लाख बैरल प्रतिदिन के पार पहुंच गई है। इसी तरह, वेनेजुएला से तेल की खरीद में भारी उछाल देखा गया है। पहले वेनेजुएला से भारत केवल 10 हजार बैरल प्रतिदिन तेल खरीद रहा था, जो अब बढ़कर 2 लाख 58 हजार बैरल प्रतिदिन हो गया है। यूएई के साथ भारत के मजबूत संबंधों और विदेश मंत्री एस जयशंकर के हालिया यूएई दौरे ने भी इस आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती दी है। यूएई अब स्वतंत्र रूप से तेल उत्पादन और बेच सकेगा, जिसका लाभ भारत को मिलेगा।

होर्मुज पर अमेरिकी रुख और वैश्विक स्थिति

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य अभी अनिश्चितकाल तक बंद रह सकता है। व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पेंटागन के अधिकारियों से होर्मुज के आउटर को और ज्यादा मजबूती के साथ ब्लॉक करने के लिए कहा है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम ईरान को बैकफुट पर लाने के लिए उठाया गया है। दूसरी तरफ ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत पर पेच फंसा हुआ है और ईरान की नई शर्तों को भी अमेरिका ने नहीं माना है। गौरतलब है कि दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज मार्ग से होकर गुजरता है।