मध्य-पूर्व में जारी ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव अब एक गंभीर वैश्विक आर्थिक संकट का रूप लेता जा रहा है। तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण पूरी दुनिया में महंगाई का स्तर बढ़ गया है, जिसका सबसे विनाशकारी प्रभाव गरीब देशों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है और 25 करोड़) लोग या तो गरीबी रेखा के नीचे जा चुके हैं या फिर इसके कगार पर खड़े हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और 'ट्रिपल शॉक'
तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), वर्तमान में तनाव का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इस क्षेत्र में अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने तेल की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका सीधा परिणाम वैश्विक तेल आपूर्ति में गिरावट के रूप में सामने आया है, जिससे शिपिंग और बीमा लागत में भारी वृद्धि हुई है। UNDP की 27 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में इस संकट को 'ट्रिपल शॉक' (Triple Shock) के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके कारण कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 90-120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई हैं। इसके अतिरिक्त, फर्टिलाइजर की कीमतों में 15-20% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ रही हैं और गरीब देशों में भुखमरी का खतरा पैदा हो गया है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इस संकट से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 55% कच्चा तेल मध्य पूर्व से आयात करता है, जिसके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है। खाड़ी देशों (Gulf) में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले धन (Remittances) पर भी इसका असर पड़ रहा है, क्योंकि भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का 38% हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। परिवहन लागत महंगी होने से दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का खतरा है। 25% तक की वृद्धि हो सकती है। फर्टिलाइजर महंगे होने से खेती और खाद्य महंगाई पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भुखमरी का खतरा
इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव अफ्रीका और एशिया के गरीब देशों, छोटे द्वीपीय राष्ट्रों और ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है। 5 करोड़ लोग भुखमरी के खतरे में आ सकते हैं। वर्तमान में सैकड़ों तेल टैंकर रास्ते में फंसे हुए हैं और शिपिंग इंश्योरेंस की दरों में भारी उछाल आया है। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) पूरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे रोजमर्रा की चीजें महंगी हो रही हैं।
2 करोड़ लोगों को गरीबी के गर्त में जाने से रोका जा सकता है। इसके लिए कैश ट्रांसफर और एनर्जी सब्सिडी जैसे उपाय आवश्यक हैं, लेकिन कई विकासशील देशों पर पहले से ही भारी कर्ज का बोझ होने के कारण यह कदम उठाना चुनौतीपूर्ण है। जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम नहीं होता और तेल की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक यह संकट जारी रहने की आशंका है और यह युद्ध अब केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक संकट बन चुका है जिसकी भारी कीमत गरीब जनता चुका रही है।
