दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने न्यायपालिका के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 'सत्याग्रह' का रास्ता अपनाया है। मंगलवार को केजरीवाल, सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को नमन किया। आम आदमी पार्टी के नेताओं का स्पष्ट कहना है कि वे जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में अब पेश नहीं होंगे, क्योंकि उन्हें वहां से न्याय की उम्मीद नहीं है।
कपिल मिश्रा का तीखा हमला और तंज
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने केजरीवाल के इस कदम पर अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ' मिश्रा ने आरोप लगाया कि शराब घोटाले के आरोपी अब सत्याग्रह का नाटक कर रहे हैं। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दुनिया में कहीं भी ऐसा नहीं होता कि कोई आरोपी खुद यह तय करे कि उसका जज कौन होगा। कपिल मिश्रा के मुताबिक, केजरीवाल को भली-भांति पता है कि उन्होंने भ्रष्टाचार किया है, इसलिए वे जांच में देरी करने के उद्देश्य से जजों का अपमान कर रहे हैं।
अगर आज गांधी जी जीवित होते तो उन्होंने केजरीवाल को लाठी लेकर दौड़ा दिया होता
— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) April 28, 2026
शराब घोटाला करने वाले सत्याग्रह की बातें कर रहा है
अब ये भी चोर ही निर्णय करेगा कि जज कौन होना चाहिए pic.twitter.com/FSywkXEvrB
मनीष सिसोदिया द्वारा अदालत का बहिष्कार
अरविंद केजरीवाल की राह पर चलते हुए मनीष सिसोदिया ने भी जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर अदालत की कार्यवाही में शामिल होने से पूरी तरह इनकार कर दिया है और सिसोदिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी बात रखते हुए लिखा कि यह किसी व्यक्ति विशेष का मामला नहीं है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भरोसे का सवाल है। उन्होंने कहा कि उनकी अंतरात्मा इस अदालत की कार्यवाही में शामिल होने की इजाजत नहीं देती है और सिसोदिया के अनुसार, जब न्याय होता हुआ न दिखे, तो सत्याग्रह ही एकमात्र विकल्प बचता है।
पार्टी में टूट और तानाशाही के आरोप
पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष श्वेत मलिक ने इस पूरे घटनाक्रम को आम आदमी पार्टी के खात्मे की शुरुआत करार दिया है और मलिक ने कहा कि सात राज्यसभा सांसदों का भाजपा में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि केजरीवाल की तानाशाही से पार्टी के भीतर भारी असंतोष व्याप्त है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल ने अन्ना हजारे के आदर्शों को पूरी तरह त्याग दिया है और भ्रष्टाचार को गले लगा लिया है।
विवाद की मुख्य वजह और कानूनी स्थिति
यह पूरा विवाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में शराब नीति मामले से जुड़ी सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई से संबंधित है, जिसमें केजरीवाल को मिली रिहाई को चुनौती दी गई है। केजरीवाल और सिसोदिया का मुख्य आरोप है कि जज के बच्चों के केंद्र सरकार के पैनल में होने के कारण यहां 'हितों का टकराव' हो रहा है। दूसरी ओर, कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालत का इस तरह से बहिष्कार करना अदालती अवमानना के दायरे में भी आ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिल्ली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जहां एक तरफ आम आदमी पार्टी इसे न्याय की लड़ाई बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसे जांच से बचने का एक तरीका मान रहे हैं।
