राजनीति के अखाड़े में अरविंद केजरीवाल को उस शख्स ने पटखनी दी है, जिसे खुद केजरीवाल संगठन का चाणक्य मानते थे। आम आदमी पार्टी के सांसदों की बगावत से जितने हैरान आम लोग हैं, उतने ही अरविंद केजरीवाल भी हैं और राघव चड्ढा पर एक्शन के बाद संभावित खतरे पर मंथन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अपने सबसे खास और भरोसेमंद मनीष सिसोदिया और संजय सिंह से पूछा था कि पार्टी की कमजोर कड़ी कौन साबित हो सकता है या पाला बदल सकता है? पार्टी के लिए पहले स्वाति मालीवाल और राघव चड्ढा की बगावत जगजाहिर थी और हरभजन सिंह भी हमेशा सतही रहे, इसलिए पार्टी आलाकमान इनको लेकर पहले से ही सतर्क था।
संदीप पाठक की गारंटी और केजरीवाल का गणित
मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने अरविंद केजरीवाल को भरोसा दिलाया था कि मरे से मरे हाल में 4 सांसद ऐसे हैं जो टस से मस नहीं होंगे। उनमें संजय सिंह, एनडी गुप्ता, बलबीर सिंह सीचेवाल और संदीप पाठक के नाम शामिल थे। संदीप पाठक की गारंटी खुद संजय सिंह और मनीष सिसोदिया ने ली थी। पार्टी के पास कुल 10 राज्यसभा सांसद हैं (7 पंजाब और 3 दिल्ली)। केजरीवाल का गणित था कि इन 10 में से 4 वफादार रहेंगे। बाकी बचे 6 में से 2 (राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल) पहले से बागी थे। केजरीवाल को लगा कि अगर बाकी बचे 4 सांसद अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी, हरभजन सिंह और राजेंद्र गुप्ता भी राघव का साथ दे दें, तो भी पार्टी का नुकसान नहीं होगा क्योंकि दलबदल कानून से बचने के लिए 2/3 संख्या (7 सांसद) चाहिए। केजरीवाल आश्वस्त थे कि 7 का आंकड़ा नहीं जुटेगा, लेकिन उन्हें पता नहीं चला कि उनका चौथा वफादार (संदीप पाठक) ही राघव का सातवां बागी बन गया है।
चाणक्य का 'डबल क्रॉस' और रणनीति का खुलासा
सूत्रों के मुताबिक, संदीप पाठक ने अरविंद केजरीवाल के साथ 'डबल क्रॉस' किया। एक तरफ केजरीवाल उन पर पूरा भरोसा कर रहे थे, तो दूसरी तरफ पाठक खुद केजरीवाल से मिलने आते और बताते कि कौन-कौन राघव चड्ढा के संपर्क में है। पाठक बातों ही बातों में केजरीवाल से यह भी उगलवा लेते थे कि आगे का प्लान ऑफ एक्शन क्या है और राघव चड्ढा को पार्टी कैसे काउंटर करेगी। केजरीवाल ने दिल खोलकर सारी बातें बताईं, लेकिन वह नहीं जानते थे कि संदीप पाठक वही सारी बातें राघव चड्ढा को बता रहे थे। यह सिलसिला बगावत से एक दिन पहले तक चला और 24 अप्रैल को दोपहर 1:30 बजे केजरीवाल को खबर मिली कि सातवां सांसद संदीप पाठक है। केजरीवाल ने तुरंत गुजरात में मौजूद मनीष सिसोदिया को फोन किया और सिसोदिया ने जब पूछा कि सातवां कौन है, तो जवाब मिला- संदीप पाठक।
20 दिनों की पटकथा और दबाव की राजनीति
सांसदों को तोड़ने की शुरुआत 2 अप्रैल को हुई थी, जब राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया था। राघव चड्ढा ने अन्य सांसदों को मोबिलाइज करना शुरू किया। 14 अप्रैल को अशोक मित्तल के ठिकानों पर ED की रेड हुई, जिसका मनोवैज्ञानिक दबाव अन्य उद्योगपति सांसदों पर पड़ा। 22 अप्रैल को मुंबई में हरभजन सिंह के घर बीजेपी नेता विनोद तावड़े को भेजा गया और बीसीसीआई एग्रीमेंट्स रद्द करने की चेतावनी दी गई। अमेरिका में इलाज करा रहे राजेंद्र गुप्ता से ओवरसीज बीजेपी के पदाधिकारियों ने मुलाकात की। 22 अप्रैल को ही विक्रम साहनी ने केजरीवाल से मिलकर उन्हें गुमराह किया कि अन्य सांसदों ने चिट्ठी पर दस्तखत कर दिए हैं।
अंतिम समय तक गुमराह रहे केजरीवाल
23 अप्रैल को संदीप पाठक ने केजरीवाल से डेढ़ घंटे तक बात की और केजरीवाल ने विक्रम साहनी से मिली जानकारी पाठक के साथ साझा कर दी। पाठक ने ही अशोक मित्तल को केजरीवाल के आवास पर बुलाया, जहां मित्तल ने केजरीवाल को भरोसा दिया कि वे पार्टी के साथ हैं। केजरीवाल को इस कदर गुमराह किया गया कि 24 अप्रैल शाम 7 बजे के लिए विक्रम साहनी ने केजरीवाल से मीटिंग का समय लिया हुआ था। केजरीवाल इंतजार करते रहे, लेकिन सुबह 11 बजे ही सभी 7 बागी सांसदों ने राज्यसभा सभापति को बीजेपी में विलय की चिट्ठी सौंप दी। ” पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विलय नियमों के विरुद्ध है और इसे कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि सांसदों का बीजेपी में विलय करना उनके लिए कानूनी रूप से फायदेमंद हो सकता है क्योंकि वे इसे कोर्ट में चुनौती देंगे जिससे सांसदों की सदस्यता जा सकती है। अगर ये सांसद अलग गुट बनाते तो पार्टी के लिए अधिक मुश्किलें पैदा होतीं। फिलहाल पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को कानूनी और राजनीतिक रूप से देख रही है।
