पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत ने अपने शानदार ऊर्जा प्रबंधन और रणनीतिक कुशलता का लोहा मनवाया है। दुनिया भर के बाजारों में उथल-पुथल और सप्लाई चेन टूटने के डर के बावजूद, भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की 100% निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की गई है। भारत ने इस अंतरराष्ट्रीय संकट को जिस तरह से हैंडल किया है, वह आज वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बन गया है। कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता के बाद भी भारत के मजबूत मैनेजमेंट ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को पूरी तरह सुरक्षित रखा है, जिससे आम आदमी की रसोई से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक हर मोर्चा अजेय बना हुआ है।
ईंधन और एलपीजी की शत-प्रतिशत आपूर्ति की गारंटी
बाजार में पैनिक फैलाकर मुनाफा कमाने की कोशिश करने वाले सटोरियों और जमाखोरों के मंसूबों को व्यवस्था ने पूरी तरह विफल कर दिया है। पूरे देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी है और वर्तमान में देश का एक भी गैस डिस्ट्रीब्यूटर ‘ड्राई’ नहीं हुआ है। 8 लाख गैस सिलेंडरों की सुरक्षित डिलीवरी की जा रही है। सिस्टम की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 98% बुकिंग डिजिटल माध्यम से और 94% डिलीवरी सुरक्षित कोड (DAC) के जरिए हो रही है। कालाबाजारी रोकने के लिए एक ही दिन में 2100 से अधिक छापे मारे गए, जिसमें 310 एजेंसियों पर जुर्माना लगाया गया और 70 के लाइसेंस तुरंत सस्पेंड कर दिए गए।
अर्थव्यवस्था की रफ्तार और महंगाई पर नियंत्रण
भारत की विकास दर को बनाए रखने के लिए देश की रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के बीच, भारतीय जनता को राहत देने के लिए 10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी कटौती को बरकरार रखा गया है। इसके अलावा, कमर्शियल सेक्टर जैसे अस्पताल, फार्मा और कृषि क्षेत्र की सप्लाई को 70% तक बहाल कर दिया गया है। छोटे कामगारों की सुविधा के लिए 5 किलो वाले सिलेंडरों की बिक्री एक दिन में 82,000 के आंकड़े को पार कर गई है। 45 लाख नए पीएनजी (पाइपलाइन गैस) कनेक्शन चालू किए जा चुके हैं।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और रेस्क्यू ऑपरेशंस
भारत ने न केवल अपनी सीमाओं के भीतर बल्कि विदेशों में भी अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। पश्चिम एशिया के अस्थिर माहौल में भारतीय दूतावास 24×7 सक्रिय हैं। वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात 2,764 भारतीय नाविकों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित निकाला गया है। 96 लाख यात्री सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। इसके अतिरिक्त, ईरान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से 2,445 भारतीयों को जमीनी रास्ते से सुरक्षित निकालकर भारत ने अपने रेस्क्यू मॉडल की ताकत पूरी दुनिया को दिखाई है।
