अमेरिका-ईरान में महायुद्ध का खतरा: परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज पर गहराया गतिरोध

ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के बावजूद तनाव चरम पर है। परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी को लेकर दोनों देश आमने-सामने हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जबकि ईरान संवर्धित यूरेनियम पर झुकने को तैयार नहीं है।

ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के चलते फिलहाल युद्ध तो नहीं हो रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति गंभीर बनी हुई है और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि परमाणु प्रोग्राम शुरुआती बातचीत का अनिवार्य हिस्सा हो, जबकि ईरान फिलहाल इस विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। दोनों पक्षों की ओर से जारी जुबानी हमलों के कारण एक दिन समझौते की संभावनाएं नजर आती हैं, तो अगले ही दिन युद्ध की आशंका बढ़ जाती है और वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत अटकी हुई है और अन्य देशों द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता के प्रयास भी अब तक सफल नहीं हो सके हैं।

ईरान का शांति प्रस्ताव और ट्रंप की प्रतिक्रिया

इस गतिरोध के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान की परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनाई गई जिद मानी जा रही है और ईरान संवर्धित यूरेनियम सौंपने और अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने की शर्त पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरान ने बातचीत के लिए तीन चरणों वाला एक नया प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपने सहयोगियों के साथ बैठक की। इस बैठक में ईरान का प्रस्ताव सुनने के बाद ट्रंप भड़क गए और उन्होंने इस शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया। ट्रंप ने ईरान की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट और नाकाबंदी की शर्तें

ईरान की पहली शर्त यह थी कि अमेरिका उसकी नाकाबंदी को खत्म करे, जिसके बाद ही बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी। ईरान ने स्थायी रूप से युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव भी दिया और कहा कि यदि नाकाबंदी हटाई जाती है, तो होर्मुज स्ट्रेट को पहले की तरह खोल दिया जाएगा। हालांकि, असली विवाद संवर्धित यूरेनियम पर अटका है। ईरान का कहना है कि बातचीत के दौरान परमाणु प्रोग्राम पर कोई चर्चा नहीं होगी, जबकि अमेरिका ने परमाणु प्रोग्राम को ही अपनी 'रेडलाइन' घोषित कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि बिना परमाणु मुद्दे को सुलझाए होर्मुज खोलने से अमेरिकी पक्ष कमजोर हो जाएगा।

आर्थिक संकट और तेल उत्पादन पर खतरा

अमेरिका की नाकाबंदी पिछले 15 दिनों से जारी है और इसका ईरान पर भारी दबाव है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि यह नाकाबंदी अगले 13 दिनों तक और जारी रही, तो ईरान को अपने तेल के कुएं बंद करने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल के कुएं 72 घंटों से ज्यादा समय के लिए बंद हुए, तो उन्हें दोबारा शुरू करने में महीनों लग सकते हैं, जिससे भविष्य का उत्पादन प्रभावित होगा। इसके अलावा, ईरान में अनाज और जरूरी सामानों की आपूर्ति भी बाधित हो रही है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। इस संकट के बीच चीन और रूस से भी मदद मिलना मुश्किल दिख रहा है।

राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के बयान

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने होर्मुज स्ट्रेट को एक 'आर्थिक परमाणु हथियार' बताया है, जिसका इस्तेमाल ईरान दुनिया की ऊर्जा को बंधक बनाने के लिए कर रहा है। वहीं, ईरान के राजनेता महमूद नबावियन ने बातचीत को व्यर्थ बताते हुए कहा कि वे एक ग्राम यूरेनियम भी नहीं हटाएंगे और उन्हें केवल शस्त्रागार भरने के लिए युद्धविराम चाहिए था। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का कोई अधिकार नहीं है। एनपीटी समीक्षा सम्मेलन के अध्यक्ष डो हंग वियत ने भी चेतावनी दी है कि परमाणु शस्त्रागारों का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन स्थिति को बेहद गंभीर बना रहा है।