ईरान की सत्ता के भीतर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमें राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के अधिकारों में भारी कटौती की बात कही गई है। इजराइली चैनल 14 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मामलों में राष्ट्रपति की भूमिका को काफी सीमित कर दिया है। यह घटनाक्रम ईरान के प्रशासनिक ढांचे में सेना और धार्मिक नेतृत्व के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
निर्णय लेने की शक्ति में बड़ा बदलाव
रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ईरान के राष्ट्रीय हितों से जुड़े बड़े मुद्दों पर अब राष्ट्रपति की राय निर्णायक नहीं होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा, देश का परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ होने वाली किसी भी प्रकार की बातचीत जैसे संवेदनशील विषयों पर अब रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी का फैसला ही अंतिम माना जाएगा और इसका सीधा अर्थ यह है कि इन रणनीतिक मामलों में राष्ट्रपति की मंजूरी अब अनिवार्य या अंतिम नहीं रह गई है।
सत्ता के भीतर खींचतान और इस्तीफे की चर्चा
इजराइली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति पजशकियान और देश के शीर्ष नेतृत्व के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। पजशकियान लगातार इस बात की शिकायत कर रहे थे कि उनकी चुनी हुई सरकार को देश के बड़े और रणनीतिक फैसलों से पूरी तरह दूर रखा जा रहा है। खबरों में यह भी कहा गया है कि उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पहले इस्तीफे की पेशकश भी की थी। अब यह दावा किया जा रहा है कि सर्वोच्च नेता ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के सभी रणनीतिक फैसले सेना की सलाह और उनकी जरूरतों के अनुसार ही लिए जाएंगे।
युद्ध और सीमा सुरक्षा पर राष्ट्रपति का बयान
इन प्रशासनिक बदलावों के बीच राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने सार्वजनिक रूप से ईरान का रुख स्पष्ट किया है और उन्होंने कहा है कि ईरान किसी भी तरह की जंग को न तो जारी रखना चाहता है और न ही उसे आगे बढ़ाने का इच्छुक है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि देश की सुरक्षा पर किसी भी प्रकार का खतरा मंडराता है, तो ईरान अपनी सीमाओं की रक्षा करने में पीछे नहीं हटेगा। पजशकियान ने युद्ध की तुलना एक बीमारी से करते हुए कहा कि चाहे वह मोहल्ले का छोटा विवाद हो या दो देशों के बीच का बड़ा संघर्ष, युद्ध हमेशा नुकसानदेह होता है।
इस्तीफे की खबरों का खंडन
राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अपने पद से इस्तीफा देने की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सरकारी टेलीविजन को दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपना पद नहीं छोड़ेंगे और वह सेना के साथ मिलकर देश के लिए काम कर रहे हैं। उनका यह स्पष्टीकरण उस समय आया है जब वरिष्ठ धर्मगुरु मोहम्मद बाकर खर्राजी ने एक चौंकाने वाला दावा किया था। खर्राजी के अनुसार, पजशकियान अब तक 28 बार इस्तीफा देने की धमकी दे चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति को चेतावनी दी गई थी कि यदि उन्होंने अगली बार इस्तीफे की बात की, तो उसे तुरंत स्वीकार कर लिया जाएगा।
मध्यस्थता पर डोनाल्ड ट्रम्प का बयान
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और बातचीत के संदर्भ में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का भी बयान सामने आया है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ जो बातचीत चल रही है, वह खुद ईरान के अनुरोध पर शुरू हुई है। उन्होंने इस प्रक्रिया में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों के समर्थन का उल्लेख किया। ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रम्प ने अपने बयान में पाकिस्तान का नाम कहीं भी नहीं लिया, जबकि हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में पाकिस्तान को ईरान और अमेरिका के बीच एक संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा था।
सेना के अधीन चलेगी सरकार
ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष की खबरों के बीच यह बात प्रमुखता से उभर रही है कि सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति को कड़ा संदेश दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई ने पजशकियान से साफ कह दिया है कि अब सरकार सेना के निर्देशों और उनकी रणनीतियों के हिसाब से ही काम करेगी। अमेरिका के साथ संवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर रिवोल्यूशनरी गार्ड की राय को ही प्राथमिकता दी जाएगी। सेना के वरिष्ठ कमांडर अहमद वाहिदी को इन सभी मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार देकर सर्वोच्च नेता ने यह संकेत दे दिया है कि वह राष्ट्रपति के इस्तीफे की चेतावनियों को अब और महत्व नहीं देंगे।
