होर्मुज पर ईरान का 7 दिन वाला प्रस्ताव, ट्रंप ने ठुकराई शर्तें, अब आधिकारिक जवाब का इंतजार

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 12 अरब डॉलर की संपत्ति और तेल प्रतिबंध हटाने के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सात दिन में खोलने का प्रस्ताव दिया था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ठुकरा दिया है।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को मात्र 7 दिन के भीतर खोलने की बात कही गई थी। हालांकि, इस प्रस्ताव के साथ ईरान ने कुछ कड़ी शर्तें भी रखी थीं, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया है। इस कूटनीतिक खींचतान के बीच ईरान का कहना है कि उसे अभी भी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है और वह औपचारिक जवाब मिलने के बाद ही अपनी अगली रणनीति तय करेगा।

समझौते की प्रमुख शर्तें और मांगें

ईरानी विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, यह नया प्रस्ताव जून में हुए इस्लामाबाद समझौते की शर्तों को तेजी से लागू करने पर केंद्रित है और ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका को उसकी कम से कम 12 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्ति को तुरंत जारी करना होगा। इसके अलावा, ईरानी तेल के निर्यात पर लगी सभी पाबंदियों को हटाना और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म करना इस प्रस्ताव का अनिवार्य हिस्सा है। ईरान ने यह भी मांग की है कि पूरे क्षेत्र में जारी सैन्य संघर्षों को रोका जाए, जिसमें विशेष रूप से लेबनान का जिक्र किया गया है। ईरान का मानना है कि इन शर्तों के पूरा होने पर ही क्षेत्र में शांति की बहाली संभव है।

सात दिनों का विस्तृत रोडमैप

ईरान द्वारा प्रस्तावित योजना में एक निश्चित समय-सीमा का खाका तैयार किया गया था। ईरान के मुताबिक, यदि अमेरिका इन शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो शुरुआती तकनीकी और कूटनीतिक कदमों को पूरा करने में 4 से 5 दिन का समय लगेगा। इसके बाद, 6वें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। योजना के 7वें दिन, दोनों देशों के बीच एक अंतिम और व्यापक समझौते पर बातचीत शुरू करने का प्रावधान था। इस बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम सहित उन सभी मुद्दों को शामिल किया जाना था जिन पर दोनों देश सहमत हों। यह 7 दिन की समय-सीमा उसी दिन से प्रभावी मानी जानी थी जिस दिन अमेरिका इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति देता।

ट्रंप का कड़ा रुख और आर्थिक दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि ईरान यह समझौता केवल इसलिए करना चाहता है क्योंकि होर्मुज की नाकाबंदी के कारण उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को एक स्टील की दीवार करार दिया और दावा किया कि अब ईरान के पास धन का प्रवाह रुक गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 24 घंटे के दौरान लगभग 20 जहाज होर्मुज से गुजरे हैं, हालांकि विशेषज्ञों के पास इस आंकड़े को लेकर अलग-अलग राय है। ट्रंप का आरोप है कि ईरान ने दुनिया के लिए मुश्किलें पैदा करने के मकसद से होर्मुज को बंद किया था, लेकिन अमेरिका ने इतिहास की सबसे बड़ी सैन्य नाकाबंदी करके उसे जवाब दिया है।

वैश्विक तेल व्यापार और भविष्य की आशंकाएं

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक माना जाता है। मौजूदा संघर्ष से पहले, वैश्विक तेल और गैस व्यापार का लगभग 1/5 हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता था, जो इसकी रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है। इस बीच, वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट ने तनाव को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के कुछ करीबी सहयोगी मध्यावधि चुनावों के संपन्न होने के बाद ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो क्षेत्र में अस्थिरता और अधिक बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर संकट पैदा होने का खतरा है।