मध्य पूर्व में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी ड्रोनों ने रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला किया, जिससे परिसर को क्षति पहुंची है। यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा की गई उस कूटनीतिक अपील के ठीक बाद हुई है, जिसमें इस्लामाबाद ने तेहरान से सऊदी अरब पर हमला न करने का आग्रह किया था। इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला
मंगलवार को ईरानी ड्रोनों ने रियाद में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस हमले से दूतावास की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है और इसके तुरंत बाद, सऊदी अरब के पूर्वी शहर धाहरान में भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी जारी की गई। धाहरान वह क्षेत्र है जहां वैश्विक तेल दिग्गज कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) का मुख्यालय स्थित है। सुरक्षा अलर्ट के कारण क्षेत्र में परिचालन को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
तेल रिफाइनरी और ऊर्जा बाजारों पर प्रभाव
सऊदी अरब के रास तनुरा स्थित प्रमुख तेल रिफाइनरी पर भी सोमवार को ड्रोन हमला होने की सूचना मिली है और रास तनुरा दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्रों में से एक है। इस हमले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान का दावा है कि अमेरिका सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ सैन्य गतिविधियों के लिए कर रहा है, जिसे उसने इन हमलों का मुख्य कारण बताया है और हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू कर दिए हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और रक्षा समझौते का हवाला
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से सऊदी अरब पर हमला न करने की अपील की थी। डार ने इस्लामाबाद और रियाद के बीच सितंबर में हुए आपसी रक्षा समझौते का उल्लेख करते हुए ईरान को आगाह किया था। इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और डार ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
ईरान की शर्तें और तेहरान का रुख
पाकिस्तानी विदेश मंत्री के साथ बातचीत के दौरान, तेहरान ने आश्वासन मांगा था कि सऊदी अरब की जमीन का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए नहीं किया जाएगा। ईरान का रुख यह रहा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति को खतरा मानता है और पाकिस्तान की अपील के बावजूद, ईरान ने अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी, जो यह संकेत देती है कि क्षेत्रीय कूटनीति वर्तमान में सैन्य तनाव को कम करने में सीमित साबित हो रही है।
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच उच्च स्तरीय संवाद
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर विस्तृत चर्चा की। प्रधानमंत्री शरीफ ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता व्यक्त की और किसी भी खतरे की स्थिति में समर्थन का आश्वासन दिया और हालांकि, पाकिस्तानी नेतृत्व ने ईरान के साथ संबंधों को संतुलित करने का प्रयास भी किया है। पाकिस्तान ने क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और हत्याओं की निंदा की है, लेकिन अमेरिकी भूमिका पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया है और यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच रक्षा संधि की शर्तों को सार्वजनिक रूप से चर्चा में लाया गया है।
