इजराइल-लेबनान संघर्ष: दशकों पुरानी दुश्मनी और सैन्य हमलों के मुख्य कारण

इजराइल और लेबनान के बीच तनाव चरम पर है। हिजबुल्लाह के हमलों के बाद इजराइली सेना ने लेबनान में व्यापक सैन्य कार्रवाई की है। यह संघर्ष 1948 से चला आ रहा है, जिसके पीछे हिजबुल्लाह का उदय, सीमा विवाद और फिलिस्तीनी शरणार्थियों जैसे गहरे ऐतिहासिक और राजनीतिक कारण जिम्मेदार हैं।

इजराइल और लेबनान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। हालिया घटनाक्रम में लेबनान स्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह द्वारा इजराइली क्षेत्रों पर रॉकेट हमले किए गए, जिसके जवाब में इजराइली रक्षा बलों (IDF) ने लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह के ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए हैं और सैन्य रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल ने लेबनान के लगभग 53 गांवों को खाली करने की चेतावनी जारी की है, जो इस संघर्ष के और अधिक विस्तार की ओर संकेत करता है। यह वर्तमान टकराव केवल तात्कालिक घटनाओं का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे दशकों पुराना जटिल इतिहास और भू-राजनीतिक कारण मौजूद हैं। इजराइल और लेबनान के बीच की यह शत्रुता 1948 में इजराइल के एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उदय के साथ ही शुरू हो गई थी।

हिजबुल्लाह का उदय और क्षेत्रीय प्रभाव

इजराइल और लेबनान के बीच शत्रुता का सबसे प्रमुख कारक हिजबुल्लाह का अस्तित्व है। हिजबुल्लाह एक शिया राजनीतिक और सैन्य संगठन है, जिसका गठन 1980 के दशक के शुरुआती वर्षों में हुआ था। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इस संगठन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य लेबनान से इजराइली सेना को बाहर निकालना और इजराइल के अस्तित्व का विरोध करना था। हिजबुल्लाह को ईरान का व्यापक सैन्य और वित्तीय समर्थन प्राप्त है। इजराइली सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हिजबुल्लाह के पास आधुनिक रॉकेटों और मिसाइलों का एक विशाल भंडार है, जो सीधे तौर पर इजराइल की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है और ईरान द्वारा समर्थित यह संगठन लेबनान की राजनीति में भी गहरी पैठ रखता है, जिससे लेबनान सरकार के लिए इस संगठन की गतिविधियों को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

सीमा विवाद और 'ब्लू लाइन' का संघर्ष

दोनों देशों के बीच तनाव का दूसरा बड़ा कारण अनसुलझा सीमा विवाद है। इजराइल और लेबनान के बीच कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है। साल 2000 में इजराइली सेना की वापसी के बाद, संयुक्त राष्ट्र ने एक अस्थायी सीमा रेखा निर्धारित की थी जिसे 'ब्लू लाइन' कहा जाता है। हालांकि, लेबनान इस रेखा के कुछ हिस्सों को स्वीकार नहीं करता है। विशेष रूप से 'शेबा फार्म्स' (Shebaa Farms) नामक क्षेत्र विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है। लेबनान इस क्षेत्र को अपना मानता है, जबकि इजराइल इसे 1967 के युद्ध के दौरान सीरिया से जीते गए गोलन हाइट्स का हिस्सा बताता है। इसके अतिरिक्त, भूमध्य सागर में समुद्री सीमा और वहां मौजूद प्राकृतिक गैस के भंडारों को लेकर भी दोनों देशों के बीच लंबे समय तक विवाद रहा है, जो समय-समय पर सैन्य तनाव का कारण बनता है।

फिलिस्तीनी शरणार्थी और 1982 का युद्ध

ऐतिहासिक रूप से, लेबनान में फिलिस्तीनी शरणार्थियों की उपस्थिति ने भी इजराइल के साथ संबंधों को खराब करने में बड़ी भूमिका निभाई है और 1948 और 1967 के युद्धों के बाद बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी शरणार्थी लेबनान में बस गए थे। 1970 के दशक में, फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) ने लेबनान को इजराइल के खिलाफ हमलों के लिए अपना मुख्य आधार बना लिया था। इसके जवाब में, इजराइल ने 1982 में लेबनान पर एक बड़ा सैन्य आक्रमण किया, जिसे 'ऑपरेशन पीस फॉर गैलिली' के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध के दौरान इजराइली सेना बेरूत तक पहुंच गई थी। हालांकि इजराइल बाद में पीछे हट गया, लेकिन उसने दक्षिण लेबनान के एक हिस्से पर 2000 तक कब्जा बनाए रखा। इस लंबे सैन्य कब्जे ने लेबनान में इजराइल विरोधी भावनाओं को और अधिक मजबूत किया।

2006 का युद्ध और वर्तमान सैन्य स्थिति

इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच 2006 में हुआ 34 दिवसीय युद्ध दोनों देशों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। यह युद्ध हिजबुल्लाह द्वारा दो इजराइली सैनिकों के अपहरण के बाद शुरू हुआ था। इस संघर्ष में लेबनान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ और इजराइल को भी महत्वपूर्ण सैन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 के माध्यम से युद्ध विराम लागू किया गया था, लेकिन इसके प्रावधानों का पूर्ण पालन कभी नहीं हो सका। वर्तमान में, गाजा में चल रहे संघर्ष के बीच हिजबुल्लाह ने इजराइल के उत्तरी मोर्चे पर हमले तेज कर दिए हैं। इजराइली अधिकारियों के अनुसार, वे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी स्तर की सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार हैं और यह स्थिति पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की संभावना को जन्म दे रही है।