खरगे का SIR पर तीखा हमला: बोले यह फ्रैंकनस्टीन राक्षस है जिसने अब अपनों को ही फंसाया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर केंद्र और चुनाव आयोग पर हमला बोला है। उन्होंने इसे वोट चोरी का औज़ार और फ्रैंकनस्टीन राक्षस बताया है, जिसने अब बीजेपी के ही बड़े नेताओं को नोटिस भेजकर फंसा दिया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने SIR को न केवल भारतीय जनता पार्टी द्वारा वोट चोरी करने और लोकतंत्र को खत्म करने का एक औज़ार बताया, बल्कि इस त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया को एक फ्रैंकनस्टीन राक्षस (Frankenstein Monster) करार दिया है। उनके अनुसार, यह एक ऐसी मुसीबत बन गई है जिसने अब खुद अपने ही लोगों को फंसाना शुरू कर दिया है। दिल्ली में इस प्रक्रिया के तहत कई बड़े नामों को नोटिस भेजे जाने के बाद यह विवाद गहरा गया है। खरगे ने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और लोकतांत्रिक ढांचे पर इसके प्रभाव को लेकर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।

क्या है फ्रैंकनस्टीन का राक्षस?

मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी आलोचना में फ्रैंकनस्टीन के राक्षस के मुहावरे का उपयोग किया। आम बोलचाल की भाषा में इसका अर्थ एक ऐसी तकनीक या चीज़ से है जिसे इंसान खुद बनाता है, लेकिन आगे चलकर वही उसके लिए घातक साबित होती है और उसे तबाह कर देती है। फ्रैंकनस्टीन उस वैज्ञानिक का नाम था जिसने इस काल्पनिक राक्षस को बनाया था और खरगे का तर्क है कि बीजेपी ने जिस प्रक्रिया को चुनावी लाभ के लिए शुरू किया था, वह अब उनके लिए ही गले की फांस बन गई है क्योंकि इसमें उनके अपने ही दिग्गज नेताओं को लपेटे में ले लिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया अब उन लोगों के बीच भी हलचल पैदा कर रही है जिन्होंने इसका समर्थन किया था।

दिग्गज नेताओं को नोटिस और VIP मतदाता

दिल्ली में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान कई प्रभावशाली व्यक्तियों को नोटिस भेजे गए हैं। स्रोत के अनुसार, नोटिस पाने वालों में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और वर्तमान विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हैं। इसके अलावा, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) तरनजीत सिंह संधू को भी नोटिस जारी किए गए हैं। इस सूची में कई राज्यसभा सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। खरगे ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिकों और पूर्व नौसेना प्रमुखों को भी इस प्रक्रिया से नहीं बख्शा गया है और चुनाव अधिकारियों का कहना है कि मतदाताओं द्वारा जमा किए गए एन्यूमरेशन फॉर्म में विसंगतियां पाए जाने के बाद ये नोटिस जारी किए गए हैं।

मतदाताओं के नाम काटने पर सवाल और संवैधानिक सिद्धांत

मल्लिकार्जुन खरगे ने उन आधारों पर गंभीर सवाल उठाए हैं जिनके तहत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि जिन लोगों के नाम काटकर उन्हें वोट देने से रोका गया था, उनमें से अब तक के फैसलों में 93 प्रतिशत लोग अपनी अपील जीत गए हैं। इसका मतलब है कि 113943 लोगों को फिर से मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। खरगे ने पूछा कि आखिर किस आधार पर उनका मताधिकार छीना गया था और उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा VIP या चिह्नित मतदाताओं का वर्णन करने वाली प्रेस विज्ञप्ति की भी आलोचना की। खरगे ने सवाल किया कि क्या अब भारत के यूनिवर्सल एडल्ट फ्रेंचाइजी में मतदाताओं की कोई विशेष श्रेणी बन गई है, जो VIP और आम मतदाताओं के बीच अंतर पैदा करती है? उन्होंने तर्क दिया कि यह संविधान के एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य के सिद्धांत का उल्लंघन है।

SIR प्रक्रिया का व्यापक पैमाना

कांग्रेस अध्यक्ष ने देश भर में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बड़े पैमाने पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के पहले तीन चरणों में लगभग 13 दशमलव 8 करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया। यह संख्या देश के कुल 94 दशमलव 78 करोड़ मतदाताओं का लगभग 14 दशमलव 61 प्रतिशत है। खरगे ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे करोड़ों आम मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर खामोश रहते हैं, जबकि VIP लोगों के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार से शुरू हुई यह प्रक्रिया अब दिल्ली पहुंच चुकी है, जिससे सत्ता पक्ष को अब समझ आ रहा है कि कांग्रेस पार्टी पहले दिन से ही इस प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण क्यों कह रही थी।