नेपाल बाढ़ तबाही: मरने वालों का आंकड़ा 1355 पहुंचा, आज राष्ट्रीय शोक दिवस पर सार्वजनिक अवकाश

नेपाल में बाढ़ से मची तबाही के बाद सरकार ने सोमवार 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है। इस आपदा में अब तक 1355 लोगों की जान जा चुकी है और 5000 लोग लापता हैं।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 26 अगस्त को तिब्बत के निकटवर्ती क्षेत्रों, विशेष रूप से रसुवा और उसके आसपास के जिलों में शुरू हुई इस तबाही ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1355 लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा, लगभग 5000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इस भारी त्रासदी को देखते हुए नेपाल सरकार ने सोमवार 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाने का निर्णय लिया है और इस अवसर पर पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है।

राष्ट्रीय शोक दिवस और श्रद्धांजलि सभाएं

नेपाल में आई इस आपदा को आज 13 दिन पूरे हो चुके हैं। हिंदू मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद 13वें दिन को शोक अवधि का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए सरकार ने सोमवार को राष्ट्रीय शोक घोषित किया है और नेपाल के गृह मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस दिन देशभर के सभी सरकारी कार्यालयों और विदेशों में स्थित नेपाली राजनयिक मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। इस आपदा के प्रति सामूहिक रूप से शोक प्रकट करने के लिए नेपाल के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है।

बीरगंज में दीप प्रज्वलन और प्रार्थना

बिहार-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल से सटे बीरगंज महानगरपालिका में भी शोक की लहर देखी गई। यहां के प्रसिद्ध घंटाघर चौक पर एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया और इस दौरान स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने दिवंगत आत्माओं की चिर शांति के लिए दीप प्रज्वलन किया और प्रार्थना की। नेपाल के विभिन्न शहरों और गांवों में इसी तरह के आयोजन किए जा रहे हैं, जहां लोग इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले अपने परिजनों और देशवासियों को याद कर रहे हैं। यह शोक दिवस पूरे देश की एकजुटता और दुख को प्रदर्शित कर रहा है।

खोज और बचाव अभियान में जुटी एजेंसियां

बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल के बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है। घरों, सड़कों और पुलों के साथ-साथ कई हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स भी इसकी चपेट में आए हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है। विशेष रूप से हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। इस कठिन समय में भारतीय सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और बीआरओ (BRO) भी नेपाल की मदद कर रहे हैं। ये टीमें न केवल बचाव कार्य में जुटी हैं, बल्कि संपर्क टूटने वाले इलाकों के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने का काम भी कर रही हैं ताकि राहत सामग्री पहुंचाई जा सके।

विस्थापन और संपत्ति का भारी नुकसान

इस आपदा का प्रभाव कितना व्यापक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक कम से कम 32000 परिवार विस्थापित हो चुके हैं। आपदा के कारण 7500 मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं। लोगों की आजीविका के साधन छिन गए हैं और जरूरी बुनियादी ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया है। सुरक्षाबल और बचाव दल दिन-रात लापता 5000 लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। सरकार और प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विस्थापित हुए हजारों लोगों के पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने की है।