राहुल गांधी का बड़ा बयान कहा 2024 का लोकसभा चुनाव अवैध था ज्ञानेश कुमार पर चले केस

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन के जन महाभियोग कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव को अवैध बताया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी ज्ञानेश कुमार और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है और ‘इंडिया’ गठबंधन के द्वारा आयोजित एक विशेष जन महाभियोग कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कई गंभीर और बड़े आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव पूरी तरह से अवैध था और भारतीय जनता पार्टी के सांसद अवैध तरीकों से सदन में पहुंचे हैं। इस कार्यक्रम में लोकसभा सांसदों, राज्यसभा सांसदों और देश के आम नागरिकों की भारी उपस्थिति देखने को मिली, जिसे राहुल गांधी ने एक प्रभावी राजनीतिक हथियार बताया है।

अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वह इस पद पर लंबे समय तक नहीं टिक पाएंगे। कांग्रेस नेता के अनुसार, विपक्ष के पास पहले से ही ऐसे पुख्ता और ठोस सबूत मौजूद हैं, जो यह साबित करने के लिए काफी हैं कि ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं। राहुल गांधी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इन सारे पुख्ता सबूतों और बातों को सार्वजनिक करने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी उन्हें इस पद पर बनाए रखने की जिद करती है, तो यह देश की जनता के सामने पूरी तरह साफ हो जाएगा कि भाजपा का अंदरूनी खेल और वास्तविक एजेंडा क्या है।

तेरह करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाने का गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा आंकड़ा साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में कुल 13 करोड़ 30 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में हर सात में से एक भारतीय नागरिक का नाम सूची से गायब कर दिया गया। कुल मतदाताओं के लिहाज से देखा जाए तो लगभग 15 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान इन सभी मतदाताओं ने कथित तौर पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था और वोट डाला था।

कांग्रेस नेता ने आगे समझाया कि विपक्ष और चुनाव जीतने वाले दलों के बीच वोटों का कुल अंतर केवल 3 प्रतिशत था। इसका मतलब यह हुआ कि पिछले साल का चुनाव महज 3 प्रतिशत वोटों के अंतर से जीता गया था। अब खुद चुनाव आयोग यह मान रहा है कि इनमें से 15 प्रतिशत मतदाताओं को वोट डालने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी। इस परिस्थिति का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने निष्कर्ष निकाला कि चुनाव आयोग खुद इस बात की तस्दीक कर रहा है कि 2024 का लोकसभा चुनाव एक अवैध चुनाव था और भाजपा के लोग अवैध तरीके से संसद में पहुंचे हैं।

ज्ञानेश कुमार को बताया प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का मोहरा

मुख्य चुनाव आयुक्त पर व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों स्तरों पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का मोहरा करार दिया। राहुल गांधी ने कहा कि हो सकता है कि शीर्ष स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह बैठे हों और वे देश के सबसे बड़े नीति निर्माता हों, लेकिन विपक्ष सबसे पहले उनसे नहीं बल्कि उनके मोहरों से निपटेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ज्ञानेश कुमार इस कड़ी में विपक्ष का पहला निशाना हैं। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके अधीन कार्य करने वाले पांच या सात अन्य अधिकारी यह सोचते हैं कि उन्हें कोई कानूनी या राजनीतिक सुरक्षा बचा लेगी, तो उन्हें देश के मौजूदा राजनीतिक हालात और मिजाज को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

राहुल गांधी ने आगे कहा कि देश की जनता का मूड क्या है, इसे समझने के लिए बाहर निकलकर देखना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि अगले दिन यानी कल ही दिल्ली की सड़कों पर एक बड़ा राजनीतिक हथियार उतारा जाएगा, जिसके जरिए एकजुट विपक्ष देश की जनता का असली मिजाज और आक्रोश सरकार के सामने प्रदर्शित कर देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आप हमेशा किसी संस्था की आड़ में छिपकर नहीं बच सकते हैं और आज नहीं तो कल आपको भारत की जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों का सामना करना ही पड़ेगा।

देशद्रोह का मुकदमा चलाने और महाभियोग का प्रस्ताव पारित

कार्यक्रम के अंत में राहुल गांधी ने मांग की कि ज्ञानेश कुमार पर केवल महाभियोग ही नहीं चलाया जाना चाहिए, बल्कि उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा भी दर्ज किया जाना चाहिए ताकि पीड़ित जनता को सही न्याय मिल सके। राहुल गांधी ने कहा कि वे संविधान और देश के आम नागरिकों की आवाज की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और इस दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

इस बीच, जन महाभियोग कार्यक्रम के दौरान ‘इंडिया’ गठबंधन के तमाम प्रमुख नेताओं ने सर्वसम्मति से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने के प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर पारित कर दिया और यह राजनीतिक घटनाक्रम देश की चुनावी निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर एक नए और बड़े संघर्ष की शुरुआत का संकेत दे रहा है, जहां विपक्ष सीधे तौर पर चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।