देश की राजधानी दिल्ली में आज राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर रही जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक एक विशाल मार्च निकाला। इस विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और संसद से भारतीय चुनाव आयोग की बिल्डिंग तक जाने वाले रास्तों पर कई स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाई गई थी। विपक्षी दल मुख्य रूप से एसआईआर (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। इंडिया (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने इस मार्च की शुरुआत संसद के मकर द्वार से की और उनका लक्ष्य चुनाव आयोग की बिल्डिंग तक पहुंचना था। इस पूरे घटनाक्रम को विपक्षी गठबंधन ने 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' यानी लोकतंत्र बचाओ मार्च का नाम दिया है।
विरोध प्रदर्शन में शामिल 19 विपक्षी दल
इस बड़े विरोध प्रदर्शन में कुल 19 विपक्षी दलों के सांसद और नेता शामिल हुए। इन दलों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), एनसीपी (शरद पवार गुट), शिवसेना (यूबीटी), आरजेडी, सीपीआईएम, सीपीआई, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), पीडीपी, जेएमएम, सीपीआई-एमएल, आईयूएमएल, केरल कांग्रेस (एम), एमडीएमके, वीसीके, आरएसपी, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और केरल कांग्रेस (जे) शामिल हैं। मार्च के दौरान राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने एक सुर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प दोहराया।
आकाशवाणी भवन में नेताओं का जमावड़ा
विरोध प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन के अंदर के दृश्य काफी चर्चा में रहे। सी. वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, दीपेंद्र हुड्डा समेत कांग्रेस के अन्य सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। नेताओं ने वहां बैठकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की और राहुल गांधी ने इस दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से रोका जा रहा है। आकाशवाणी भवन परिसर में विपक्षी नेताओं की मौजूदगी ने इस विरोध प्रदर्शन को और अधिक प्रभावी बना दिया।
राहुल गांधी का पुलिस से तीखा सवाल
आकाशवाणी भवन परिसर में खड़े होकर राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से अपनी बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "मैंने पुलिस से कहा, ‘मैं पहले वहां बैठा हुआ था। आपने मुझे वहां से हटा दिया और अब मैं यहां आया हूं, तो आप मुझे यहां से भी हटाना चाहते हैं। मैं पुलिस से बस इतना पूछ रहा हूं- ठीक है, अगर आप मुझे यहां से हटाना चाहते हैं, तो हटा दीजिए, लेकिन सिर्फ इतना बता दीजिए कि इस देश में मैं कहां बैठ सकता हूं और मैं बस कहीं बैठना चाहता हूं। मैंने पुलिस से विनम्रता से पूछा कि कृपया मुझे बताइए कि मैं कहां बैठ सकता हूं। क्या मैं इंडिया गेट पर बैठ सकता हूं? क्या मैं जंतर-मंतर पर बैठ सकता हूं? क्या मैं सड़क पर बैठ सकता हूं? मैं कहां बैठूं?
लोकतंत्र खत्म होने का आरोप
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा, "पूरा देश जानता है कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार ने मिलकर चुनावी प्रक्रिया को बर्बाद कर दिया है। देश यह बात समझ चुका है। " राहुल गांधी ने आगे कहा कि विपक्ष के 300 सांसद उस कथित तौर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग से मिलना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा है।
चुनाव आयोग की चुप्पी पर सवाल
विपक्ष के नेता ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के चुनावों को लेकर सवाल पूछना चाहते हैं, लेकिन आयोग जवाब नहीं देना चाहता। राहुल गांधी ने कहा, "हम बस चुनाव आयुक्तों- ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते हैं। हम लोकसभा और राज्यसभा, दोनों के विपक्षी सांसद हैं और हम केवल उनसे बात करना चाहते हैं। मुझे समझ नहीं आता कि चुनाव आयोग हमसे बात क्यों नहीं करना चाहता। लाखों लोगों ने हमें वोट दिया है, इसलिए हम केवल चुनाव आयुक्तों से सवाल पूछना चाहते हैं, लेकिन वे जवाब देना नहीं चाहते।
सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का संदेश
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर भी इस विरोध प्रदर्शन को लेकर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, "आज 300 से ज्यादा विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयुक्तों से मिलने के लिए संसद से चुनाव आयोग तक मार्च किया। हम करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं। चुनाव आयुक्त हमसे क्यों नहीं मिल रहे हैं? " इस पोस्ट के जरिए उन्होंने जनता के बीच यह संदेश पहुंचाने की कोशिश की कि विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है और संवैधानिक संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल हो रही हैं।
