व्यापारियों को गैंगस्टरों की धमकियों पर सवाल... रंगदारी पर चर्चा की मांग, आज विधानसभा में क्या-क्या हुआ

राजस्थान विधानसभा में 24 फरवरी को गैंगस्टरों द्वारा व्यापारियों को दी जा रही धमकियों और रंगदारी का मुद्दा छाया रहा। निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने सख्त कार्रवाई की मांग की, जबकि विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन में महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट और बिजली दरों पर भी तीखी बहस हुई।

राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही के दौरान 24 फरवरी को कानून-व्यवस्था और विशेष रूप से गैंगस्टरों द्वारा व्यापारियों को दी जा रही धमकियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। शून्यकाल के दौरान सदन में उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच रंगदारी और सुरक्षा के मुद्दों पर तीखी नोकझोंक हुई। निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने इस मामले को उठाते हुए राज्य में सक्रिय गैंगस्टरों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि व्यापारियों और आम जनता में व्याप्त भय को समाप्त करने के लिए गैंगस्टरों का एनकाउंटर किया जाना आवश्यक है।

गैंगस्टरों के मुद्दे पर सदन में तीखी नोकझोंक

शून्यकाल में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से व्यापारियों को मिल रही धमकियों का मुद्दा उठाते हुए रवींद्र सिंह भाटी ने सरकार से पूछा कि अपराधियों के खिलाफ अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके जवाब में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभालने के बाद से ही गैंगस्टरों और संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाया है। मंत्री ने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती शासन के दौरान राज्य में 'जंगलराज' की स्थिति थी। इस टिप्पणी पर विपक्षी सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया और सदन के बीचों-बीच आकर नारेबाजी शुरू कर दी और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया और रंगदारी के बढ़ते मामलों पर विशेष चर्चा की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की भावनाओं को देखते हुए इस विषय पर आधे घंटे की विशेष चर्चा कराने का आश्वासन दिया।

महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट बजट पर विवाद

सदन में पर्यटन विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट के लिए आवंटित बजट के उपयोग को लेकर उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच तीखी बहस हुई। टीकाराम जूली ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि सरकार ने इस सर्किट के विकास के लिए ₹100 crore का बजट घोषित किया था, लेकिन पिछले दो वर्षों में इसमें से केवल ₹2 lakh के लगभग ही खर्च किए गए हैं। उन्होंने इसे महापुरुषों के नाम पर केवल राजनीति करने का आरोप लगाया। जवाब में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि परियोजनाओं की योजना और निविदा प्रक्रिया में समय लगता है और सरकार महाराणा प्रताप से जुड़े स्थलों के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विकास कार्यों की गति में अब तेजी लाई जा रही है।

ऊर्जा और खाद्य विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा

विधानसभा में आज ऊर्जा और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अनुदान मांगों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। भाजपा विधायक पब्बाराम बिश्नोई ने बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए एक नया सुझाव पेश किया। उन्होंने कहा कि सरकार को 'फ्री बिजली योजना' के तहत सक्षम लोगों के लिए 'स्वैच्छिक गिवअप' अभियान चलाना चाहिए, ताकि जो लोग बिजली बिल भरने में सक्षम हैं, वे अपनी सब्सिडी छोड़ सकें और इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंदों को मिल सके। वहीं, भाजपा के ही वरिष्ठ विधायक कालीचरण सराफ ने उद्योगों के लिए बिजली की ऊंची दरों का मुद्दा उठाया और उन्होंने तर्क दिया कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में राजस्थान में औद्योगिक बिजली दरें अधिक होने के कारण राज्य के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से इन दरों की समीक्षा करने का आग्रह किया।

पशुपालन विभाग के आंकड़ों और चारागाह भूमि पर सवाल

पशुपालन विभाग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान मोबाइल वेटरनरी यूनिट (MVU) के आंकड़ों को लेकर सदन में विवाद हुआ। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने जब विभाग की उपलब्धियों के आंकड़े पेश किए, तो विपक्ष ने उन पर आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि धरातल पर मोबाइल वेटरनरी इकाइयां सक्रिय नहीं हैं, जबकि मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन आंकड़ों में उन पशुओं का विवरण भी शामिल है जिनका इलाज विशेष शिविरों के माध्यम से किया गया है। इसी बीच, केकड़ी से विधायक शत्रुघ्न गौतम ने अजमेर जिले में चारागाह भूमि के आवंटन में कथित अनियमितताओं का गंभीर मामला उठाया और उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर चारागाह भूमि का आवंटन किया गया है। इस पर सरकार की ओर से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।

भाजपा विधायक दल की बैठक और वसुंधरा राजे की उपस्थिति

दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले राजस्थान विधानसभा परिसर में भाजपा विधायक दल की एक महत्वपूर्ण रणनीति बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सदन के भीतर विपक्ष के हमलों का जवाब देने और सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से रखने पर चर्चा की गई। इस बजट सत्र में पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी विधानसभा पहुंचीं। सदन में उनके प्रवेश करते ही कई विधायकों ने उनसे मुलाकात की और उनका अभिवादन किया। वसुंधरा राजे की उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बटोरी, क्योंकि वे सत्र के शुरुआती दिनों में अनुपस्थित रही थीं। सदन की कार्यवाही के दौरान उन्होंने विभिन्न विधायी कार्यों में भाग लिया और सत्ता पक्ष के सदस्यों के साथ अनौपचारिक चर्चा की।