राजस्थान विधानसभा के वर्तमान सत्र के दौरान सदन में बजट आवंटन और उसके वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रश्नकाल के दौरान राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार की घोषणाएं और धरातल पर किए गए कार्य मेल नहीं खा रहे हैं। जूली ने विशेष रूप से महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट विकास योजना और मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के आंकड़ों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार बिना पर्याप्त तैयारी और ठोस तथ्यों के सदन में जवाब पेश कर रही है, जिससे सदन की गरिमा और जनहित प्रभावित हो रहा है।
महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट और बजट का विवरण
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सदन में महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट विकास योजना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2024-25 के बजट में इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए ₹100 करोड़ की भारी-भरकम राशि की घोषणा की गई थी। 83 लाख ही खर्च किए जा सके हैं। जूली ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ₹100 करोड़ के मुकाबले इतनी मामूली राशि का खर्च होना सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है। उन्होंने पूछा कि क्या महाराणा प्रताप जैसे महान व्यक्तित्व के नाम पर केवल राजनीति की जाएगी या वास्तव में धरातल पर कोई विकास कार्य भी नजर आएगा।
मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के आंकड़ों पर आपत्ति
सदन की कार्यवाही के दौरान चूरू विधानसभा क्षेत्र में संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (MVUs) से जुड़ा मामला भी गरमाया। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर नेता प्रतिपक्ष ने असहमति जताई और सरकारी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि क्षेत्र की तीन मोबाइल यूनिट्स ने 15 फरवरी तक कुल 36,549 पशुओं का उपचार किया है। टीकाराम जूली ने इन आंकड़ों को व्यावहारिक रूप से असंभव करार दिया और उन्होंने तर्क दिया कि यदि इन आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए, तो एक दिन में एक यूनिट द्वारा किए जाने वाले उपचारों की संख्या तार्किक नहीं लगती। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा सदन में भ्रामक और फर्जी आंकड़े पेश किए जा रहे हैं ताकि सरकार की विफलताओं को छिपाया जा सके।
सदन में विपक्ष द्वारा जांच की मांग
पशु चिकित्सा इकाइयों के आंकड़ों में विसंगति को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सदन को गलत जानकारी देना एक गंभीर मामला है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। जूली ने जोर देकर कहा कि जब तक आंकड़ों की सत्यता की जांच नहीं होती, तब तक सरकार के दावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता और विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता के टैक्स के पैसे का हिसाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए और मोबाइल यूनिट्स की कार्यप्रणाली की भौतिक समीक्षा की जानी चाहिए।
सरकार की तैयारियों पर नेता प्रतिपक्ष के सवाल
टीकाराम जूली ने अपने संबोधन में भजनलाल सरकार की समग्र कार्यशैली पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री और विभाग बिना किसी ठोस कार्ययोजना के सदन में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के पास न तो स्पष्ट विजन है और न ही पुख्ता तथ्य। जूली ने दावा किया कि विपक्ष पूरी मुस्तैदी के साथ सरकार की कमियों को उजागर कर रहा है और सदन से लेकर सड़क तक जनता की आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि केवल कागजी घोषणाओं से प्रदेश का विकास संभव नहीं है और इसके लिए प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
