संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा की 11 रिक्त सीटों के लिए आज बिहार, ओडिशा और हरियाणा में मतदान की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदान सुबह 9 बजे प्रारंभ हुआ और यह शाम 4 बजे तक जारी रहेगा। इसके तुरंत बाद शाम 5 बजे से मतों की गिनती शुरू की जाएगी और परिणाम आज ही घोषित होने की संभावना है। द्विवार्षिक राज्यसभा चुनावों के इस चरण में कुल 10 राज्यों की 37 सीटें खाली हो रही थीं, जिनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। शेष 11 सीटों पर राजनीतिक समीकरणों और अतिरिक्त उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण मतदान अनिवार्य हो गया है।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, निर्विरोध चुने गए प्रमुख नेताओं में पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, अभिषेक मनु सिंघवी, विनोद तावड़े और बाबुल सुप्रियो शामिल हैं। हालांकि, बिहार, ओडिशा और हरियाणा में उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध सीटों से अधिक होने के कारण मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इन राज्यों में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए व्हिप जारी किए हैं और बैठकों का दौर चलाया है।
बिहार में पांच सीटों के लिए राजनीतिक समीकरण और रस्साकशी
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए मतदान हो रहा है, जहां 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य विधानसभा की 243 सीटों के संख्या बल के आधार पर एक उम्मीदवार को जीत के लिए प्रथम वरीयता के 41 वोटों की आवश्यकता है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास वर्तमान में 202 विधायकों का समर्थन है, जबकि विपक्षी महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो दो दशकों तक राज्य की कमान संभालने के बाद अब राज्यसभा जा रहे हैं, प्रमुख उम्मीदवार हैं। उनके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा, जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और भाजपा के शिवेश कुमार चुनावी मैदान में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी सूत्रों के अनुसार, एनडीए को 4 सीटों पर स्पष्ट बढ़त हासिल है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। एनडीए के पास 4 सीटें जीतने के बाद 38 अतिरिक्त वोट बचेंगे, जबकि पांचवीं सीट सुरक्षित करने के लिए उन्हें 3 और वोटों की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पास 25 विधायक हैं और महागठबंधन के अन्य सहयोगियों को मिलाकर यह संख्या 35 तक पहुंचती है। आरजेडी उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह की जीत के लिए पार्टी को कम से कम 6 अतिरिक्त वोटों की दरकार है। इस स्थिति में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के 5 विधायक और एक निर्दलीय विधायक की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
ओडिशा में चार सीटों पर पांच उम्मीदवारों के बीच मुकाबला
ओडिशा में राज्यसभा की 4 सीटों के लिए मतदान हो रहा है, जहां 5 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ओडिशा विधानसभा की कुल 147 सीटों के गणित के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 30 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास विधानसभा में 79 सीटें हैं और 3 निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ यह संख्या 82 हो जाती है। भाजपा ने सुजीत कुमार और मनमोहन सामल को मैदान में उतारा है, जिनकी जीत सुनिश्चित मानी जा रही है और भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में दिलीप राय को भी समर्थन दिया है।
विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) के पास 48 विधायक हैं और उसने संत्रुप्त मिश्रा और दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बनाया है। संत्रुप्त मिश्रा की जीत के लिए आवश्यक वोट बीजेडी के पास मौजूद हैं, लेकिन दत्तेश्वर होता के लिए पार्टी को अतिरिक्त वोटों की व्यवस्था करनी होगी और कांग्रेस के 14 और सीपीआई के 1 विधायक का समर्थन भी विपक्षी खेमे के लिए महत्वपूर्ण है। मतदान से ठीक पहले बीजेडी ने अपने दो निलंबित विधायकों, सनातन महाकुड और अरविंद महापात्र को पार्टी के पक्ष में वोट करने का निर्देश दिया है, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हरियाणा में दो सीटों पर तीन दावेदारों के बीच कड़ा संघर्ष
हरियाणा की 2 राज्यसभा सीटों के लिए 3 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 31 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जिससे उनके पहले उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत तय है। इसके बाद भाजपा के पास 17 अतिरिक्त वोट बचेंगे। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को जीत के लिए 14 और वोटों की आवश्यकता होगी।
कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जो उनके उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की जीत के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, हरियाणा में पूर्व में हुए राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग का इतिहास रहा है, जिससे कांग्रेस खेमे में सतर्कता देखी जा रही है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के 2 विधायकों और अन्य निर्दलीयों का रुख इस चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। सभी दलों ने अपने विधायकों को मतदान प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।
मतदान प्रक्रिया और सुरक्षा के कड़े प्रबंध
निर्वाचन आयोग ने तीनों राज्यों की विधानसभाओं में मतदान के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं। मतदान की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जा रही है और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। विधायकों को अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को मतपत्र दिखाने के बाद ही मतपेटी में डालने का नियम लागू है, ताकि क्रॉस वोटिंग पर अंकुश लगाया जा सके। शाम 4 बजे मतदान समाप्त होने के बाद मतपेटियों को सील किया जाएगा और शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। चुनाव परिणामों की आधिकारिक घोषणा देर रात तक होने की उम्मीद है।
