मेरठ का चर्चित सौरभ सिंह हत्याकांड, जिसे 'नीला ड्रम कांड' के नाम से भी जाना जाता है, अब अपने अंतिम अंजाम तक पहुंच गया है और 9 साल के लंबे प्रेम संबंध और विवाह के बाद शुरू हुई यह कहानी एक खौफनाक हत्या पर जाकर खत्म हुई। 16 महीने तक चले लंबे कोर्ट ट्रायल के बाद, अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए हत्यारन पत्नी और उसके प्रेमी को फांसी की सजा मुकर्रर की है। हालांकि सजा सुना दी गई है, लेकिन इस विश्वासघात की कहानी ने समाज में कई गहरे सवाल छोड़ दिए हैं।
कॉलेज के दिनों से शुरू हुई प्रेम कहानी
इस कहानी की शुरुआत साल 2014-15 के आसपास हुई थी, जब मेरठ के एक कॉलेज में सौरभ सिंह और मुस्कान की पहली मुलाकात हुई थी। कॉलेज के गलियारों में शुरू हुआ यह सिलसिला जल्द ही प्यार में बदल गया। दोनों एक-दूसरे के साथ समय बिताने के बहाने ढूंढते थे और उनका रिश्ता समय के साथ और भी मजबूत होता गया। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि जिस प्यार की कसमें वे खा रहे हैं, उसका अंत इतना वीभत्स होगा।
मर्चेंट नेवी की नौकरी और शादी
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सौरभ ने कड़ी मेहनत की और उसे मर्चेंट नेवी में एक अच्छी नौकरी मिल गई। करियर में स्थिरता आने के बाद सौरभ ने अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचाने का फैसला किया। अपनी पहली छुट्टी के दौरान, सौरभ ने मुस्कान के साथ कोर्ट मैरिज कर ली और शादी के शुरुआती साल बहुत अच्छे बीते और लगभग तीन साल के भीतर उनके घर एक बेटी ने जन्म लिया। सौरभ अपनी पत्नी और बेटी से बहुत प्यार करता था और उनके भविष्य के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था।
साहिल शुक्ला की एंट्री और अवैध संबंध
मर्चेंट नेवी की नौकरी की वजह से सौरभ को साल के कई महीने घर से दूर समुद्र में बिताने पड़ते थे। इसी अकेलेपन के बीच मुस्कान की मुलाकात अपने पुराने कॉलेज मित्र साहिल शुक्ला से हुई। धीरे-धीरे उनकी बातचीत बढ़ी और यह दोस्ती अवैध संबंधों में तब्दील हो गई। जब सौरभ अपनी ड्यूटी पर बाहर रहता था, तब साहिल और मुस्कान का मिलना-जुलना बढ़ गया। दोनों के बीच का रिश्ता इतना गहरा हो गया कि वे अक्सर रातें भी साथ बिताने लगे थे।
साजिश और कत्ल की खौफनाक रात
मार्च का महीना सौरभ के परिवार के लिए खुशियों वाला होने वाला था क्योंकि इसी महीने उनकी शादी की सालगिरह और बेटी का जन्मदिन भी था। इन खुशियों को मनाने के लिए सौरभ 24 फरवरी को अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर मेरठ वापस आ गया। 2 मार्च को पूरा परिवार मॉल गया और वहां जमकर खरीदारी की। लेकिन सौरभ के घर आने से मुस्कान और साहिल का मिलना बंद हो गया था और अपने रास्ते के इस कांटे को हटाने के लिए दोनों ने मिलकर सौरभ की हत्या की साजिश रची। 3 मार्च 2025 की रात को मुस्कान ने सौरभ के खाने में जहर मिला दिया। जब सौरभ बेहोश हो गया, तो दोनों ने मिलकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी।
शव के पास संबंध और नीले ड्रम में पैकिंग
इस हत्याकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि हत्या करने के बाद दोनों आरोपियों ने सौरभ के शव के पास ही शारीरिक संबंध बनाए और फिर वहीं सो गए। 4 मार्च की सुबह जब उन्हें शव को ठिकाने लगाने की चिंता हुई, तो उन्होंने सौरभ के शरीर के टुकड़े किए। इन टुकड़ों को एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में डाला गया और ऊपर से सीमेंट भरकर उसे पूरी तरह पैक कर दिया गया ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद दोनों आरोपी बेखौफ होकर घूमने के लिए हिमाचल प्रदेश चले गए।
गिरफ्तारी और सजा का पूरा घटनाक्रम
आरोपी 17 मार्च को वापस लौटे, लेकिन तब तक पुलिस को मामले की भनक लग चुकी थी। 19 मार्च को पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। 22 मार्च 2025 को जांच के दौरान यह भी संकेत मिले कि इस हत्या के पीछे कुछ अंधविश्वास की बातें भी शामिल थीं। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 12 मई 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इस मामले का ट्रायल 17 सितंबर 2026 को पूरा हुआ। 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी करार दिया। अंततः 14 अक्टूबर 2026 को कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।
