दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली: अमेरिका ईरान तनाव से सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी में गिरावट

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण सेंसेक्स 561 अंक 46 पॉइंट गिरकर 77,054 अंक 94 पॉइंट पर बंद हुआ। निफ्टी भी 158 अंक 95 पॉइंट की गिरावट के साथ 24,052 अंक 5 पॉइंट के स्तर पर आ गया।

भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन काफी निराशाजनक रहा और दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों को भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा। बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत रहे और कारोबार की समाप्ति पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 561 अंक 46 पॉइंट की बड़ी गिरावट के साथ 77,054 अंक 94 पॉइंट के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 158 अंक 95 पॉइंट टूटकर 24,052 अंक 5 पॉइंट के स्तर पर आ गया। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले काफी ज्यादा रही।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर

बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी और तात्कालिक वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव रहा। खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान पर सैन्य कार्रवाई की है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरानी शिपिंग पर फिर से सख्ती बढ़ाने और प्रतिबंधों को कड़ा करने के संकेत दिए हैं। इन घटनाक्रमों ने वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है और भारतीय बाजार भी इस वैश्विक दबाव से अछूता नहीं रहा और दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद अंततः भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। निवेशकों को डर है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और वित्तीय बाजारों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 84 डॉलर 60 सेंट प्रति बैरल तक पहुंच गई। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। महंगा तेल न केवल देश के व्यापार घाटे को बढ़ाता है, बल्कि इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों की उत्पादन लागत में वृद्धि होने की भी आशंका रहती है। इसी चिंता के कारण निवेशकों ने ऑटो, बैंकिंग और फाइनेंस जैसे संवेदनशील सेक्टरों के शेयरों में जमकर बिकवाली की, जिससे बाजार का सेंटिमेंट और बिगड़ गया।

सेक्टरवार गिरावट और शेयरों का हाल

मंगलवार के कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में सबसे ज्यादा 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा पीएसयू बैंक इंडेक्स 1 प्रतिशत 80 पॉइंट, ऑटो इंडेक्स 1 प्रतिशत 60 पॉइंट, बैंक इंडेक्स 1 प्रतिशत 10 पॉइंट और आईटी इंडेक्स 1 प्रतिशत तक टूट गए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 0 प्रतिशत 40 पॉइंट और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो एचसीएल टेक्नोलॉजीज, श्रीराम फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ, टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। एचसीएल टेक में गिरावट का मुख्य कारण कंपनी के भविष्य के ग्रोथ आउटलुक को लेकर ब्रोकरेज फर्मों द्वारा जताई गई चिंता रही।

बाजार के लिए आगे की राह

हालांकि, गिरते बाजार में भी कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई और निवेशकों को सहारा दिया। भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, टीसीएस और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज जैसे शेयर बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहे और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है। आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की चाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां और तेल की कीमतें ही भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगी। फिलहाल निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।