भारतीय शेयर बाजार में लागू किए गए नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) ने अपने कार्यान्वयन के दूसरे ही दिन ट्रेडर्स के बीच खलबली मचा दी है। इस नए नियम के कारण बाजार बंद होने के ठीक पहले के कुछ मिनटों में ऐसी हलचल हुई कि कई अनुभवी ट्रेडर्स का गणित पूरी तरह बिगड़ गया और विशेष रूप से निफ्टी 50 की वीकली एक्सपायरी होने के कारण इस उतार-चढ़ाव का असर बहुत गहरा रहा। जहां ट्रेडर्स 3 बजकर 15 मिनट के भाव को ही अंतिम मानकर अपनी रणनीति बना रहे थे, वहीं क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान आए बदलाव ने उनके मुनाफे को भारी घाटे में बदल दिया।
आखिरी मिनटों में निफ्टी का चौंकाने वाला व्यवहार
गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स में शुरुआत से ही कमजोरी देखी जा रही थी। दोपहर 3 बजकर 20 मिनट तक बाजार का माहौल पूरी तरह मंदी की गिरफ्त में था और निफ्टी करीब 310 अंक यानी 1 पॉइंट 3 प्रतिशत टूटकर 24463 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। लेकिन जैसे ही क्लोजिंग ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू हुई, बाजार का रुख पूरी तरह पलट गया। जब आधिकारिक क्लोजिंग आंकड़े सामने आए, तो निफ्टी 159 अंकों की गिरावट के साथ 24615 पर सेटल हुआ। इसका अर्थ यह है कि बाजार बंद होने की प्रक्रिया के दौरान इंडेक्स में 151 अंकों की जबरदस्त रिकवरी दर्ज की गई। वहीं सेंसेक्स की बात करें तो यह 0 पॉइंट 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78429 के स्तर पर बंद हुआ।
ऑप्शन ट्रेडिंग में हुआ भारी नुकसान
इस नए सिस्टम का सबसे घातक असर ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स पर पड़ा और निफ्टी का 24600 वाला पुट ऑप्शन (PE), जो दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक 100 रुपये से अधिक पर ट्रेड कर रहा था, सेटलमेंट के बाद शून्य हो गया। इसके विपरीत, निफ्टी का 24500 वाला कॉल ऑप्शन (CE), जिसकी कीमत 3 बजकर 15 मिनट पर केवल 30 रुपये थी, सेटलमेंट के समय तक पांच गुना तक बढ़ गया। यह अचानक आया उछाल सामान्य ट्रेडिंग का हिस्सा नहीं था, बल्कि क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान निफ्टी की वैल्यू में हुए 150 अंकों के एडजस्टमेंट का परिणाम था। इस वजह से कॉल राइटर्स और पुट राइटर्स दोनों को ही अपनी उम्मीद के विपरीत भारी वित्तीय चोट पहुंची।
एक्सचेंजों का टर्नओवर और मार्केट शेयर
क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का पूरी तरह दबदबा रहा और एनएसई पर इस दौरान 1542 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्ज किया गया, जो कुल मार्केट शेयर का 99 पॉइंट 4 प्रतिशत है। दूसरी ओर, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इस दौरान केवल 9 करोड़ 40 लाख रुपये का ही कारोबार हो सका। लिक्विडिटी का यह बड़ा हिस्सा एनएसई पर होने के कारण वहां होने वाले बड़े सौदों ने निफ्टी के फाइनल सेटलमेंट प्राइस को काफी ऊपर धकेल दिया, जिससे उन ट्रेडर्स को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ जो बाजार के गिरने की उम्मीद में शॉर्ट पोजीशन लेकर बैठे थे।
विशेषज्ञों की राय और ट्रेडर्स को चेतावनी
एक्सिस सिक्योरिटीज के हेड ऑफ रिसर्च राजेश पल्विया के अनुसार, क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के पहले दिन का असर केवल कागजी था, लेकिन एक्सपायरी के दिन यह वास्तविक नुकसान में बदल गया। ट्रेडर्स ने यह मान लिया था कि 3 बजकर 15 मिनट का भाव ही अंतिम है, जबकि असली खेल ऑक्शन में होना बाकी था। उस समय एट-द-मनी (ATM) कॉल ऑप्शन के लिए ओपन इंटरेस्ट लगभग 33 लाख शेयरों का था। जब इतने बड़े वॉल्यूम के बीच अचानक 150 अंकों का अंतर आता है, तो ट्रेडर्स के पास संभलने का मौका नहीं बचता। जानकारों का कहना है कि जैसे-जैसे इस सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ेगी, यह अंतर कम हो सकता है, लेकिन फिलहाल सावधानी ही एकमात्र बचाव है।
भविष्य के लिए क्या है रणनीति
बाजार के जानकारों की स्पष्ट सलाह है कि ट्रेडर्स को, विशेषकर एक्सपायरी वाले दिन, क्लोजिंग ऑक्शन शुरू होने से पहले ही अपनी सभी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ यानी बंद कर देना चाहिए। ऑक्शन के दौरान होने वाले प्राइस एडजस्टमेंट को प्रेडिक्ट करना या उसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है और कागजी घाटा तो रिकवर किया जा सकता है, लेकिन एक्सपायरी के दिन आखिरी मिनटों में होने वाला यह वास्तविक नुकसान किसी भी छोटे या बड़े ट्रेडर की पूंजी को मिनटों में साफ कर सकता है। इसलिए सुरक्षित ट्रेडिंग के लिए ऑक्शन विंडो से पहले ही बाजार से बाहर निकल जाना ही समझदारी है।
