नए CCTV नियमों से बदलेगा बाजार, 1 लाख 30 हजार करोड़ के सेक्टर में इन 3 शेयरों पर नजर

भारत का सीसीटीवी बाजार कड़े सुरक्षा नियमों और डेटा गोपनीयता मानकों के कारण बड़े बदलाव की ओर है। 2031 तक 1 लाख 30 हजार करोड़ रुपये के संभावित बाजार में आदित्य इंफोटेक, डी-लिंक इंडिया और प्राइजर विजटेक जैसी कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं।

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और सीसीटीवी बाजार इस समय एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यह बदलाव केवल कैमरों की बढ़ती मांग के कारण नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा सुरक्षा और डेटा गोपनीयता को लेकर लागू किए गए कड़े नियमों का परिणाम है। भारत जिस तरह से अपनी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, उसे देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि 2031 तक यह सेक्टर 1 लाख 30 हजार करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच जाएगा। सरकार ने अब केवल कैमरों की बिक्री के बजाय उनके भीतर की साइबर सुरक्षा और STQC यानी मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन अनुपालन को अनिवार्य कर दिया है। सरकारी विभागों में बिना सर्टिफिकेशन वाले कैमरों की खरीद पर पाबंदी लगने से सस्ते और असुरक्षित आयातित कैमरों का दबदबा खत्म हो रहा है। इससे भारत में स्थानीय स्तर पर विनिर्माण करने वाली प्रमाणित कंपनियों के लिए करोड़ों रुपये के सरकारी और कॉर्पोरेट ऑर्डर का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

कड़े नियम और स्मार्ट सर्विलांस की नई लहर

भारतीय सीसीटीवी बाजार के बारे में अनुमान है कि यह वर्ष 2031 तक 1 लाख 30 हजार करोड़ रुपये के विशाल स्तर तक पहुंच जाएगा। वर्ष 2026 से 2031 के बीच इस सेक्टर में 19 दशमलव 88 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर यानी CAGR से विकास होने की उम्मीद है। यह बाजार अब केवल मांग के आधार पर नहीं, बल्कि कड़े सरकारी नियमों के कारण अपनी दिशा बदल रहा है। वर्ष 2024 से सरकारी खरीद के तहत सीसीटीवी कैमरों के लिए सुरक्षा परीक्षण की जिम्मेदारी STQC को सौंपी गई है। सरकार ने एक कड़ा आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि मार्च 2026 से सभी सरकारी विभागों में गैर-प्रमाणित या निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरे न उतरने वाले सीसीटीवी उपकरणों की खरीद पर पूर्ण रोक लगा दी जाएगी। अब सरकारी और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में केवल हार्डवेयर नहीं, बल्कि उसका सॉफ्टवेयर, फर्मवेयर, सुरक्षा आर्किटेक्चर और सप्लाई चेन भी खरीद का मुख्य आधार बन चुके हैं। केवल भारत सरकार द्वारा नामित प्रयोगशालाओं से प्रमाणित और STQC व BIS मानकों का पालन करने वाले साइबर-सिक्योर्ड उत्पाद ही बाजार में मान्य होंगे।

आदित्य इंफोटेक: मुनाफे और बाजार हिस्सेदारी में बड़ी बढ़त

आदित्य इंफोटेक यानी AIL ने संगठित भारतीय वीडियो सर्विलांस बाजार में अपनी स्थिति बहुत मजबूत कर ली है और वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी दोगुनी होकर 43 दशमलव 3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। कंपनी के वित्तीय नतीजे भी बेहद शानदार रहे हैं और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 332 दशमलव 5 प्रतिशत बढ़कर 142 करोड़ 20 लाख रुपये हो गया है। इस दौरान कुल परिचालन आय 1402 करोड़ 40 लाख रुपये रही। कंपनी का EBITDA 207 करोड़ 80 लाख रुपये दर्ज किया गया और मार्जिन में 605 बेसिस पॉइंट्स का सुधार होकर यह 14 दशमलव 8 प्रतिशत हो गया है। कंपनी प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 6000 से 6500 करोड़ रुपये का रेवेन्यू रन-रेट हासिल करने का लक्ष्य रखा है। उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनी आंध्र प्रदेश के कडापा में ग्रीनफील्ड प्लांट और ग्रेटर नोएडा में दूसरे क्लस्टर के जरिए अगले 3 सालों में अपनी क्षमता को 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख यूनिट्स प्रतिमाह करने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में कंपनी की क्षमता का उपयोग 85 से 90 प्रतिशत तक हो रहा है। कंपनी के पोर्टफोलियो का 79 प्रतिशत हिस्सा IP यानी इंटरनेट प्रोटोकॉल कैमरों का है। कंपनी अपने फ्लैगशिप ब्रांड CP PLUS के साथ-साथ Nexivue ब्रांड के जरिए छोटे शहरों में भी पैठ बना रही है। कंपनी का कर्ज भी काफी कम हुआ है और Debt-to-Equity रेशियो 0 दशमलव 44 गुना से घटकर 0 दशमलव 07 गुना पर आ गया है।

डी-लिंक इंडिया: स्वदेशी विनिर्माण पर जोर

डी-लिंक इंडिया ने भी घरेलू बाजार की मजबूत मांग के दम पर शानदार प्रदर्शन किया है और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी की समेकित आय 30 दशमलव 6 प्रतिशत बढ़कर 457 करोड़ रुपये हो गई है। कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 20 दशमलव 6 प्रतिशत बढ़कर 35 करोड़ रुपये रहा, जिसमें मार्जिन 7 दशमलव 7 प्रतिशत दर्ज किया गया। कंपनी का शुद्ध लाभ 16 दशमलव 7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 28 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। डी-लिंक इंडिया अब डेटा सेंटर्स के लिए एडवांस switches का विस्तार कर रही है। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत कंपनी की कुल उत्पाद आपूर्ति का दो-तिहाई हिस्सा अब भारत में ही तैयार हो रहा है। कंपनी 30 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज यानी EMS पार्टनर्स के साथ काम करती है। कंपनी का नेटवर्क भी काफी विशाल है, जिसमें 3 नेशनल डिस्ट्रीब्यूटर्स और 15000 से अधिक रीसेलर्स शामिल हैं।

प्राइजर विजटेक: इंफ्रास्ट्रक्चर बूम का मिल रहा लाभ

प्राइजर विजटेक के राजस्व में भी 35 दशमलव 5 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कंपनी का समेकित राजस्व बढ़कर 42 करोड़ रुपये हो गया है। इस दौरान ऑपरेटिंग प्रॉफिट 10 करोड़ रुपये रहा और ऑपरेटिंग मार्जिन 23 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि शुद्ध लाभ 6 करोड़ रुपये रहा। कंपनी को आने वाले समय में देश में बनने वाले 2 करोड़ 50 लाख नए घरों और 80 नए हवाई अड्डों जैसे प्रोजेक्ट्स से बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। कंपनी की पकड़ 3000 तहसीलों में है और इसके पास 11000 से अधिक डीलरों का नेटवर्क है। गुजरात के गांधीनगर में कंपनी का एकीकृत प्लांट है जिसकी वार्षिक क्षमता 50 लाख सीसीटीवी यूनिट्स की है। कंपनी ने स्वदेशी सिस्टम-ऑन-चिप यानी SoC विकसित करने के लिए IndieSemic के साथ समझौता भी किया है, जिससे चिप स्तर पर भारत में निर्माण संभव हो सकेगा।