भारतीय शेयर बाजार में 542 दिनों बाद ऐतिहासिक तेजी सेंसेक्स 2000 अंकों के पार पहुंचा

अमेरिकी चुनाव नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में 9 प्रतिशत की गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार में 542 दिनों की सबसे बड़ी तेजी देखी गई है। सेंसेक्स 2078 अंक उछलकर 79379 के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे निवेशकों की संपत्ति में 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।

भारतीय शेयर बाजार में आज 5 नवंबर 2026 को कारोबार के दौरान रिकॉर्डतोड़ तेजी देखने को मिल रही है। दिवाली से पहले ही दलाल स्ट्रीट पर जश्न का माहौल बन गया है। सेंसेक्स ने रॉकेट जैसी छलांग लगाते हुए 2078 रुपये 35 पैसे अंकों यानी 2 रुपये 68 पैसे प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त दर्ज की है। इस उछाल के साथ सेंसेक्स 79379 रुपये 75 पैसे के स्तर पर पहुंच गया है। जिससे महज 5 घंटे में निवेशकों की दौलत 8 लाख करोड़ रुपये बढ़ गई है। वहीं निफ्टी भी शानदार मजबूती के साथ 24557 रुपये 80 पैसे के स्तर पर कारोबार कर रहा है। सुबह से ही गिफ्ट निफ्टी में 300 अंकों से ज्यादा की बढ़त दिख रही थी। इसी वजह से बाजार खुलते ही निफ्टी को 24300 का स्तर पार करने में आसानी हुई।

542 दिनों का लंबा इंतजार और ऐतिहासिक उछाल

पूरे 542 दिनों के बाद शेयर बाजार में करीब 2000 अंकों की इतनी बड़ी तूफानी तेजी देखी गई है। इससे पहले पिछले साल 12 मई 2025 को सेंसेक्स रिकॉर्ड 2975 रुपये 43 पैसे अंक यानी 3 रुपये 74 पैसे प्रतिशत उछला था। उस समय भारत-पाकिस्तान के बीच अचानक हुए सीजफायर समझौते से तनाव खत्म हुआ था और साथ ही अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड डील को लेकर दुनिया भर में सकारात्मक माहौल बना था। आज की ये नई तेजी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों के अलावा कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के दम पर आई है।

अमेरिकी चुनाव और कच्चे तेल का असर

बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ ग्लोबल संकेतों का है। अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा के साथ सीनेट दोनों में जीत दर्ज की है। इन नतीजों से वाशिंगटन में राजनीतिक अनिश्चितता खत्म हो गई है। इसके बाद अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट पर 44 साल की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई। डाउ जोंस 3 रुपये 03 पैसे प्रतिशत यानी 1569 अंक, एसएंडपी 500 1 रुपये 58 पैसे प्रतिशत के अलावा नैस्डैक 1 रुपये 44 पैसे प्रतिशत उछलकर बंद हुआ। इसी ग्लोबल संकेत का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दूसरी सबसे बड़ी राहत कच्चे तेल के मोर्चे पर आई है। चुनाव नतीजों के बाद अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक नेताओं ने पश्चिम एशिया में शांति बातचीत तेज करने के बयान दिए हैं। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 9 प्रतिशत तक टूटकर 94 डॉलर 12 पैसे प्रति बैरल पर आ गईं। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत क्रूड ऑयल बाहर से खरीदता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से देश के आयात बिल, चालू खाता घाटे के साथ महंगाई को काबू करने में सीधी मदद मिलती है।

विदेशी निवेशकों की वापसी और बैंकिंग सेक्टर का दम

डॉलर इंडेक्स में नरमी के अलावा अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई भारत जैसे बाजारों की तरफ तेजी से लौट रहे हैं। बीते कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 7284 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की है। इस चौतरफा पैसे के आने से निवेशकों की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ है।

इस ऐतिहासिक तेजी में बैंकिंग के साथ फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों ने सबसे आगे रहकर बाजार को संभाला है। निफ्टी बैंक 1516 अंकों के भारी उछाल के साथ 57429 रुपये 65 पैसे के नए शिखर पर पहुंच गया है। वहीं बैंकेक्स में भी 2 रुपये 85 पैसे प्रतिशत की जोरदार तेजी है। निफ्टी आईटी 1 रुपये 80 पैसे प्रतिशत बढ़कर 32639 के स्तर पर पहुंच गया है। मिडकैप इंडेक्स में भी 1 रुपये 42 पैसे प्रतिशत की मजबूत खरीदारी हुई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक के अलावा एक्सिस बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में हुई खरीदारी ने अकेले इंडेक्स को 1300 अंक से ऊपर धकेल दिया।

बाजार की भविष्य की दिशा

बाजार की इस तूफानी रफ्तार पर एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने अपनी राय दी है। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट से भारतीय शेयर बाजार को बड़ा सहारा मिला है। हालांकि, बाजार आगे किस दिशा में जाएगा, ये दो मुख्य बातों पर निर्भर करेगा। पहला ये कि विदेशी निवेशकों का पैसा आना कितना टिकाऊ रहता है। दूसरा ये कि कच्चे तेल का भाव 95 डॉलर के नीचे बना रहता है या नहीं।