Shashi Tharoor News / थरूर बोले- नेहरू की गलतियां स्वीकारें, पर हर समस्या का दोषी ठहराना गलत; मोदी सरकार नेहरू-विरोधी

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि नेहरू की गलतियां स्वीकारना जरूरी है, लेकिन उन्हें हर समस्या के लिए अकेले दोषी ठहराना अनुचित है। उन्होंने मोदी सरकार को 'नेहरू-विरोधी' बताया। थरूर ने केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में अपने लेखक जीवन और पढ़ने की आदतों पर भी बात की।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में जवाहरलाल नेहरू की विरासत और आधुनिक भारतीय राजनीति में उनकी भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए और उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के पहले प्रधानमंत्री की गलतियों को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है, लेकिन देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले दोषी ठहराना पूरी तरह से गलत और अनुचित है। थरूर ने मोदी सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वे निश्चित रूप से 'नेहरू-विरोधी' हैं, भले ही उन्हें लोकतंत्र-विरोधी न कहा जाए।

नेहरू की विरासत और आलोचना

थरूर ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण के प्रति अपनी गहरी प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक बताया, जिन्होंने इसे मजबूती से स्थापित किया। हालांकि, थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह नेहरू की हर मान्यता और नीति का बिना आलोचना समर्थन नहीं कर सकते और उनका मानना है कि एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिसमें नेहरू के योगदान को स्वीकार किया जाए और साथ ही उनकी नीतियों या निर्णयों की आलोचनात्मक समीक्षा भी की जाए। यह दृष्टिकोण इतिहास को समझने और उससे सीखने के लिए महत्वपूर्ण है।

मोदी सरकार पर टिप्पणी

कांग्रेस सांसद ने मोदी सरकार की नीतियों और दृष्टिकोण पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह यह नहीं कहेंगे कि मोदी सरकार लोकतंत्र-विरोधी है, लेकिन वे निश्चित रूप से 'नेहरू-विरोधी' हैं। थरूर के अनुसार, नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है, जिस पर देश की वर्तमान समस्याओं का दोष मढ़ा जा रहा है। यह टिप्पणी भारतीय राजनीति में नेहरू की विरासत को लेकर चल रही बहस को दर्शाती है, जहां अक्सर वर्तमान सरकारें पिछली सरकारों, विशेषकर नेहरूवादी नीतियों पर, समस्याओं का ठीकरा फोड़ती हैं।

लेखक शशि थरूर का जीवन

थरूर ने गुरुवार को केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में अपने लेखक जीवन के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि बचपन में अस्थमा की बीमारी के कारण उनका झुकाव किताबों की ओर हुआ। उस समय टेलीविजन और मोबाइल फोन जैसे मनोरंजन के साधन नहीं थे, इसलिए किताबें ही उनकी सबसे करीबी साथी बन गईं और उन्होंने यह भी साझा किया कि उनका पहला उपन्यास बहुत कम उम्र में लिखा गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश स्याही गिरने के कारण वह नष्ट हो गया। श्री नारायना गुरू की जीवनी उनकी 28वीं पुस्तक है, जो उनके विस्तृत साहित्यिक सफर को दर्शाती है।

पढ़ने की संस्कृति और युवा पीढ़ी

थरूर ने पढ़ने की आदतों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ने की आदत घट रही है, लेकिन केरल आज भी पढ़ने की संस्कृति में अग्रणी बना हुआ है और उन्होंने 1989 में 'The Great Indian Novel' लिखने के पीछे का कारण बताया कि उस समय भारत में व्यंग्य विधा लगभग न के बराबर थी। युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए, थरूर ने सलाह दी कि आज के दौर में कम पन्नों वाली छोटी किताबें ज्यादा प्रभावी हो सकती हैं, क्योंकि लोगों के पास पढ़ने के लिए समय कम होता जा रहा है। यह टिप्पणी आधुनिक जीवनशैली और पढ़ने की आदतों में आ रहे बदलावों को रेखांकित करती है।

थरूर के पिछले चर्चित बयान

शशि थरूर अपने मुखर बयानों के लिए जाने जाते हैं, जो अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं। 1 जनवरी को केरल के वायनाड स्थित सुल्तान बथेरी में उन्होंने कहा था कि वह कभी पार्टी लाइन। से नहीं भटके हैं और 17 साल से पार्टी में हैं, उनके सहकर्मियों के साथ अच्छे संबंध हैं। 27 दिसंबर को उन्होंने विदेश नीति पर बात करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री का हारना भारत के। हारने जैसा है और भारत को पाकिस्तान से आने वाले सुरक्षा खतरों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। 25 दिसंबर को उन्होंने देश में गैरकानूनी तरीके से रहने वाले लोगों (अवैध प्रवासियों) के खिलाफ सरकार के एक्शन का। समर्थन किया था, यह कहते हुए कि देश की सीमाओं की सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था को संभालना सरकार की जिम्मेदारी है। 4 नवंबर को उन्होंने भारत की वंशवादी राजनीति की आलोचना करते हुए एक लेख में कहा था कि भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है और जब तक यह परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, तब तक लोकतांत्रिक सरकार का असली मतलब पूरा नहीं हो सकेगा। ये बयान थरूर के विविध राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर स्पष्ट विचारों को दर्शाते हैं।