ट्रंप प्रशासन को झटका: एआई पॉलिसी एडवाइजर श्रीराम कृष्णन ने दिया इस्तीफा

व्हाइट हाउस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पॉलिसी एडवाइजर श्रीराम कृष्णन ने जून के अंत में अपना पद छोड़ने की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन में एआई विनियमन के लिए राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। चेन्नई में जन्मे कृष्णन ने इस सफर को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया है।

व्हाइट हाउस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पॉलिसी एडवाइजर श्रीराम कृष्णन ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि वे जून के अंत में अपना पद छोड़ देंगे। ट्रंप प्रशासन के भीतर अत्याधुनिक तकनीकों के लिए नीतियां तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कृष्णन का यह फैसला वाशिंगटन के राजनीतिक और तकनीकी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी इस योजना को साझा किया और अपने कार्यकाल को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया।

एआई विनियमन और राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान

वाशिंगटन में शक्तिशाली नई प्रणालियों को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच, श्रीराम कृष्णन एआई के विकास को विनियमित करने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने के ट्रंप प्रशासन के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। उनका काम ऐसे समय में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है जब एआई की क्षमताओं को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ी हुई है और उदाहरण के लिए, एंथ्रोपिक के मिथोस ने कथित तौर पर बैंकों जैसे जटिल कंप्यूटर सिस्टम में साइबर सुरक्षा कमजोरियों को उजागर करने की क्षमता प्रदर्शित की है। इस तरह की तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए, कृष्णन एक ऐसी नीति बनाने पर काम कर रहे थे जो नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।

चेन्नई से अमेरिका तक का सफर और पेशेवर उपलब्धियां

श्रीराम कृष्णन का भारत से गहरा और अटूट कनेक्शन है। उनका जन्म तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में हुआ था, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा और चेन्नई की एसआरएम यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। साल 2007 में वे अपने सपनों को उड़ान देने के लिए अमेरिका चले गए। अमेरिका में उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के साथ काम किया, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट, याहू, फेसबुक, एक्स और स्टैप जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों में उनके अनुभव ने उन्हें एआई और डेटा नीतियों की गहरी समझ प्रदान की।

कृष्णन ने साल 2016 में अमेरिका की नागरिकता हासिल की थी। उनकी पत्नी आरती राममूर्ति भी भारतीय मूल की हैं और वे भी तकनीकी क्षेत्र में सक्रिय हैं। कृष्णन का करियर ग्राफ यह दर्शाता है कि कैसे एक भारतीय छात्र ने अपनी मेहनत और मेधा के दम पर अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष पदों तक अपनी जगह बनाई। उनके इस्तीफे से ट्रंप प्रशासन को एक अनुभवी नीति सलाहकार की कमी महसूस हो सकती है, विशेषकर एआई जैसे संवेदनशील और तेजी से बदलते क्षेत्र में।

भविष्य की योजनाएं और आभार

अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कृष्णन ने लिखा कि इस महीने के आखिर में वे व्हाइट हाउस में अपनी भूमिका छोड़ देंगे और हालांकि उन्होंने पद छोड़ने के पीछे के किसी विशिष्ट कारण का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उन्होंने भविष्य की अपनी योजनाओं के बारे में संकेत जरूर दिए हैं। उन्होंने बताया कि कुछ समय के ब्रेक के बाद, वे एआई से जुड़ी उन बड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए फिर से काम करेंगे, जिनका सामना वर्तमान में अमेरिका कर रहा है।

" उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वे अपने कार्यकाल और देश के प्रति अपनी सेवा को लेकर अत्यंत गौरवान्वित महसूस करते हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनके जाने के बाद ट्रंप प्रशासन एआई नीति के मोर्चे पर किसे जिम्मेदारी सौंपता है और कृष्णन अपनी अगली पारी की शुरुआत किस रूप में करते हैं।