अमेरिका में भीषण गर्मी का कहर: मिनेसोटा से मिसिसिपी तक 4 करोड़ लोग लू की चपेट में

अमेरिका के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, जहां तापमान 120 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंचने की आशंका है और 4 करोड़ लोग प्रभावित हैं।

भारत के साथ-साथ अब अमेरिका भी भीषण गर्मी की जबरदस्त चपेट में आ गया है। रविवार को अमेरिका के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में रहने वाले कम से कम 4 करोड़ लोग इस जानलेवा गर्मी और लू का सामना कर रहे थे। देश के एक बहुत बड़े हिस्से में लगातार दूसरे दिन तेज धूप और भारी उमस ने आम जनजीवन को पूरी तरह से बेहाल कर दिया है। इस मौसम का सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिल रहा है, जो इस तपती गर्मी के कारण काफी परेशान हैं और प्रशासन और विभिन्न गैर-सरकारी संगठन अब अलर्ट मोड पर आ गए हैं ताकि लोगों को इस आपदा से बचाया जा सके।

मिनेसोटा से मिसिसिपी तक फैला गर्मी का दायरा

अमेरिका में पारा लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 100 डिग्री फारेनहाइट (38 डिग्री सेल्सियस) से अधिक का ‘हीट इंडेक्स’ यानी गर्मी का वास्तविक एहसास कराने वाला तापमान एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। यह प्रभाव मिनेसोटा से लेकर मिसिसिपी तक और पश्चिम में दक्षिणी कैलिफोर्निया और नेवादा तक देखा जा रहा है और नेशनल वेदर सर्विस (NWS) ने चेतावनी जारी की है कि दक्षिण-पश्चिम के कुछ विशिष्ट इलाकों में यह तापमान 120 डिग्री फारेनहाइट (49 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच सकता है। इतनी अधिक गर्मी मानव शरीर के लिए अत्यंत जोखिम भरी साबित हो सकती है।

भीषण गर्मी के पीछे ‘हीट डोम’ का हाथ

मौसम वैज्ञानिकों ने इस भीषण गर्मी का मुख्य कारण एक और ‘हीट डोम’ (Heat Dome) को बताया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, हीट डोम एक ऐसी वायुमंडलीय घटना है जिसमें उच्च दबाव वाली स्थितियां गर्म हवा को एक निश्चित क्षेत्र में कैद कर लेती हैं। यह कैद हुई हवा बाहर नहीं निकल पाती, जिससे पहले से ही अधिक तापमान और ज्यादा बढ़ जाता है और लंबे समय तक बना रहता है। यह स्थिति एक ढक्कन की तरह काम करती है जो गर्मी को नीचे की ओर दबाती है, जिससे धरातल पर रहने वाले लोगों को भीषण तपिश का सामना करना पड़ता है।

बेघर लोगों की बढ़ती मुश्किलें और राहत कार्य

इस भीषण गर्मी का सबसे दर्दनाक असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिनके पास सिर छिपाने के लिए छत नहीं है। अमेरिका में बेघर लोगों की मदद करने वाले नेटवर्क ‘थ्रेशोल्ड CoC’ के आउटरीच मैनेजर पीट मिलर ने स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश डाला है। ओमाहा, नेब्रास्का में लोगों को पानी की बोतलें बांटते समय मिलर ने कहा, "बहुत अधिक गर्मी है और हम ऐसे बहुत से लोगों को देख रहे हैं जो तीखी गर्मी से काफी परेशान हैं। ये लोग बुरी तरह थक चुके हैं और उनकी हालत वाकई खतरनाक है। यहाँ उमस बहुत अधिक है। आप 30 सेकंड के लिए भी बाहर खड़े हों तो पसीने से तर-बतर हो जाते हैं।

गर्मी के कारण रिकॉर्ड टूटे और आयोजन रद्द हुए

गर्मी का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि खेल और अन्य आयोजनों पर भी पड़ रहा है। रैपिड सिटी, साउथ डकोटा में शनिवार को तापमान 112 डिग्री फारेनहाइट (44 डिग्री सेल्सियस) दर्ज किया गया, जो वहां का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। इसी तरह, शाकोपी, मिनेसोटा के कैंटरबरी पार्क में रविवार को होने वाली घुड़दौड़ को गर्मी के खतरों को देखते हुए रद्द करना पड़ा। यह दर्शाता है कि गर्मी का स्तर किस कदर खतरनाक हो चुका है कि सामान्य व्यावसायिक और मनोरंजक गतिविधियां भी ठप हो गई हैं।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान और भविष्य की चेतावनी

NWS के मौसम वैज्ञानिक बॉब ओरावैक ने बताया कि वर्तमान में यह गर्मी देश के मध्य हिस्से में बहुत से लोगों को प्रभावित कर रही है। हालांकि, अगले हफ्ते की शुरुआत तक गर्मी का मुख्य केंद्र दक्षिण की ओर खिसकने की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि नमी वाली हवा ‘हीट डोम’ के ऊपरी हिस्से के आसपास अस्थिरता पैदा कर रही है, जिसके कारण रविवार को ग्रेट लेक्स के आसपास जोरदार तूफान, अचानक बाढ़ और ओले गिरने का खतरा बना हुआ था। ओरावैक ने कहा, "अगर देश के एक हिस्से में ‘हीट डोम’ बनता है, तो दूसरे हिस्से में उससे जुड़ा अलग तरह का मौसम देखने को मिलता है। " उनके अनुसार, हफ्ते के मध्य तक मध्य अमेरिका को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन सप्ताहांत तक तापमान फिर से बढ़ने के आसार हैं।

प्रशासन की सलाह और ऐतिहासिक आंकड़े

बढ़ते खतरे को देखते हुए अधिकारियों ने आम जनता के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को हीट स्ट्रोक का सबसे अधिक खतरा है। प्रशासन ने सलाह दी है कि लोग एयर कंडीशनिंग या कूलिंग सेंटर का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। इसके अलावा, भरपूर मात्रा में पानी पीने और सीधी धूप में जाने से बचने की हिदायत दी गई है। नेशनल सेंटर्स फॉर एनवायरनमेंटल इंफॉर्मेशन के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अमेरिका के मुख्य भू-भाग में साल की पहली छमाही अब तक की दूसरी सबसे गर्म छमाही रही है, जो जलवायु में हो रहे बड़े बदलावों की ओर संकेत करती है।