अमेरिका में इस हफ्ते भीषण और जानलेवा हीटवेव का खतरा मंडरा रहा है, जिसका सीधा असर 4 जुलाई को होने वाले स्वतंत्रता दिवस के जश्न पर पड़ने वाला है। जब पूरा देश 1776 में ब्रिटेन से मिली आजादी की सालगिरह मनाने की तैयारी कर रहा है, तब मौसम विभाग की इस चेतावनी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय मौसम सेवा यानी एनडब्ल्यूएस ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका के एक बहुत बड़े हिस्से में प्रचंड गर्मी की लहर चलने वाली है। इस खतरनाक मौसम से करीब 12 करोड़ लोगों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। तापमान के 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है, जिससे कई पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं। अमेरिका में 4 जुलाई को राष्ट्रीय अवकाश होता है और लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं, लेकिन इस बार गर्मी रंग में भंग डाल सकती है।
राष्ट्रीय मौसम सेवा की गंभीर चेतावनी
राष्ट्रीय मौसम सेवा (NWS) ने अपने बुलेटिन में स्पष्ट किया है कि अमेरिका के बड़े हिस्से में न केवल तापमान बढ़ेगा, बल्कि हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी भी बहुत ज्यादा रहेगी। एनडब्ल्यूएस के मुताबिक, दिन के समय तो भारी गर्मी पड़ेगी ही, लेकिन रात के समय भी स्थिति चिंताजनक रहेगी। रात में तापमान इतना अधिक रहने वाला है कि लोगों के लिए सामान्य रूप से सांस लेना भी मुश्किल हो सकता है। शरीर को ठंडा होने का समय नहीं मिलेगा, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यह सब ठीक उस समय हो रहा है जब लोग 4 जुलाई की छुट्टियों के लिए बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे इस जानलेवा गर्मी से बचने के लिए जरूरी एहतियात बरतें।
तापमान का बढ़ता ग्राफ और प्रभावित इलाके
गर्मी का यह प्रकोप केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी देश कनाडा में भी इसका असर दिख रहा है। ओंटारियो में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। अमेरिका में यह हीटवेव पूर्वी तट से लेकर देश के मध्य इलाकों तक फैल जाएगी। एनडब्ल्यूएस की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार तक मिडवेस्ट और मिसिसिपी घाटी में गर्मी अपने चरम पर होगी। इसके बाद, छुट्टियों वाले वीकेंड के दौरान यह गर्मी ओहियो घाटी और पूर्वी तट की ओर बढ़ेगी। अनुमान है कि पारा 35 से लेकर 40 दशमलव 6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। नमी के कारण हीट इंडेक्स 100 से 115 फारेनहाइट तक जा सकता है, जो सेल्सियस में 38 से 46 डिग्री के बराबर होता है। यह स्तर मानव शरीर के लिए अत्यंत जोखिम भरा माना जाता है।
प्रमुख शहरों में आपातकालीन इंतजाम
भीषण गर्मी को देखते हुए न्यूयॉर्क और डेट्रॉइट जैसे बड़े शहरों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है और न्यूयॉर्क सिटी में मेयर जोहरान ममदानी ने इमरजेंसी प्लान लागू कर दिया है। पूरे शहर में सैकड़ों कूलिंग सेंटर खोले गए हैं ताकि जिन लोगों के पास एयर कंडीशनर की सुविधा नहीं है, वे वहां जाकर राहत पा सकें। इसी तरह, डेट्रॉइट शहर में भी तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक जाने की आशंका है, जिसके मद्देनजर वहां कई एंटरटेनमेंट सेंटरों को एयर कंडीशनर के साथ जनता के लिए खोल दिया गया है। प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे हाइड्रेटेड रहें और धूप में निकलने से बचें।
यूरोप में गर्मी का तांडव और वैज्ञानिक कारण
अमेरिका से पहले यूरोप में भी गर्मी ने भारी तबाही मचाई है। वहां के कई देशों में तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। इस चिलचिलाती गर्मी के कारण अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले फ्रांस में ही 1000 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या 65 साल और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खतरनाक हीटवेव जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के प्रभाव का सीधा परिणाम है और वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी के कारण अब ऐसी चरम मौसम घटनाएं बार-बार देखने को मिल रही हैं, जो जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रही हैं।
