इजराइल में फिलिस्तीनियों को फांसी देने की तैयारी: दोहरी न्याय व्यवस्था पर क्यों उठे सवाल?

इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर ने नए फांसीघर का दौरा किया है, जिससे फिलिस्तीनी कैदियों को मौत की सजा देने की तैयारी पर विवाद छिड़ गया है और दोहरी न्याय व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

इजराइल में फिलिस्तीनी कैदियों को फांसी देने की तैयारियों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इजराइल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर ने मध्य इजराइल में निर्माणाधीन एक नए फांसीघर की साइट का दौरा किया है। इस दौरे का एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसने मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच चिंता पैदा कर दी है। यह कदम इजराइल की न्याय प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

फांसीघर का निर्माण और बेन ग्विर का बयान

रिपोर्टों के अनुसार, जिस परिसर का बेन ग्विर ने दौरा किया, वहां मौत की सजा की तामील के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। इस परिसर में एक डेथ रो विंग, फांसी का मुख्य ढांचा और एक विशेष स्थान बनाया जा रहा है जहां पीड़ितों के परिवार फांसी की पूरी प्रक्रिया को देख सकेंगे। बेन ग्विर ने इस दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी सरकार ने आतंकवाद के दोषियों के लिए मौत की सजा का कानून लागू करने और फांसीघर बनाने का जो वादा जनता से किया था, उसे अब पूरा किया जा रहा है। उन्होंने अपने बयान में जोर देकर कहा कि आतंकवादियों के लिए सिर्फ एक ही सजा होनी चाहिए, और वह है फांसी।

दोहरी न्याय व्यवस्था का विवाद

इस फैसले का सबसे विवादित पहलू यह माना जा रहा है कि मौत की सजा वाला यह कानून व्यवहार में मुख्य रूप से फिलिस्तीनियों पर ही लागू होगा। मार्च में इजराइल की संसद ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में हत्या के दोषियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया था। यह कानून सैन्य अदालतों के माध्यम से लागू किया जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि ये सैन्य अदालतें आमतौर पर इजराइली नागरिकों पर मुकदमा नहीं चलाती हैं। इसी कारण से कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने इसे दोहरी न्याय व्यवस्था करार दिया है और इस मामले को इजराइल की सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है, जहां याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कानून जीवन के अधिकार, गरिमा, समानता और निष्पक्ष सुनवाई जैसे बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करता है।

इजराइली जेलों में फिलिस्तीनी कैदियों के आंकड़े

इजराइली मानवाधिकार संगठन हामोक्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इजराइल की जेलों में वर्तमान में 9300 से ज्यादा फिलिस्तीनी बंद हैं। इनमें से लगभग 3200 लोग प्रशासनिक हिरासत में रखे गए हैं। प्रशासनिक हिरासत की इस व्यवस्था के तहत सैन्य कमांडर किसी भी व्यक्ति को बिना कोई औपचारिक आरोप लगाए 6 महीने तक हिरासत में रख सकते हैं। इस अवधि को बार-बार बढ़ाया भी जा सकता है। हिरासत का आधार अक्सर ऐसी गोपनीय जानकारी होती है, जिसे न तो आरोपी और न ही उसका वकील देख सकता है।

गाजा शांति प्रयासों के बीच बढ़ता तनाव

बेन ग्विर का यह कदम ऐसे समय में आया है जब गाजा में शांति प्रक्रिया पहले से ही अटकी हुई है। इजराइल की मांग है कि हमास द्वारा पूरी तरह हथियार डालने के बाद ही इजराइली सेना की वापसी होगी, जबकि हमास और मध्यस्थ देश चरणबद्ध तरीके से सेना की वापसी चाहते हैं। इसी बीच, रिपोर्टों के अनुसार अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बाद से गाजा में 1250 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। वेस्ट बैंक में भी इस साल इजराइली सेना या बसने वालों की कार्रवाई में कम से कम 76 फिलिस्तीनियों की मौत हुई है, जिनमें 18 बच्चे शामिल हैं।

बेन ग्विर के पुराने विवादित बयान

इतामार बेन ग्विर पहले भी अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। हाल ही में उन्होंने गाजा में हर रात दर्जनों लोगों की लक्षित हत्या (टारगेटेड किलिंग) किए जाने की वकालत की थी और कुछ फिलिस्तीनियों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की थीं। उनके इन बयानों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई संगठनों ने आलोचना की है। ऐसे में फांसीघर बनाने का यह ताजा फैसला इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष में कानून, मानवाधिकार और सजा की सीमाओं को लेकर एक नई और गंभीर बहस को जन्म दे रहा है।