इजराइल ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित गाजा समझौते को आधिकारिक तौर पर ठुकरा दिया है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि जब तक हमास वास्तव में अपने हथियार नहीं डाल देता, तब तक इजराइली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। वर्तमान में, इजराइली सेना का लगभग 20 लाख की आबादी वाले फिलिस्तीनी इलाके के आधे से अधिक हिस्से पर नियंत्रण है। नेतन्याहू ने कैबिनेट की बैठक के दौरान कहा कि इजराइल इस 15 सूत्रीय दस्तावेज को खारिज करता है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वाशिंगटन के साथ गाजा की भविष्य की योजनाओं पर चर्चा जारी रहेगी। उन्होंने पिछले हफ्ते भी इसी तरह की बातें कही थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह अपनी सैन्य रणनीति पर अडिग हैं।
सैन्य वापसी पर नेतन्याहू की कड़ी शर्त
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि गाजा से सेना की वापसी तभी संभव है जब हमास पूरी तरह से निहत्था हो जाए। उन्होंने पिछले महीने ट्रंप द्वारा घोषित समझौते को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने दावा किया था कि जैसे ही हमास आतंकवादी समूह के हथियार छोड़ने की प्रक्रिया पूरी होगी, इजराइली सेना पीछे हट जाएगी। दूसरी ओर, हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य बासेम नईम ने कहा कि उनका समूह रोडमैप के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्यस्थ और अमेरिका नेतन्याहू पर दबाव डालेंगे। नेतन्याहू वर्तमान में 27 अक्टूबर को होने वाले अगले चुनावों से पहले सत्ता बनाए रखने के लिए घरेलू तनाव का सामना कर रहे हैं। बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में इजराइल पर हुए हमले से गाजा में युद्ध शुरू हुआ था और अभी वहां एक नाजुक युद्धविराम लागू है।
हूतियों ने मोखा बंदरगाह और अरामको को बनाया निशाना
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने देश के लाल सागर तट पर सरकार के कब्जे वाले मोखा बंदरगाह पर भीषण हमला किया है। यमन सरकार की सहयोगी नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज ने बताया कि इस हमले में कम से कम 7 लोग मारे गए हैं, जिनमें 4 सैनिक और 3 आम नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 15 आम नागरिक घायल हुए हैं। सूचना मंत्रालय के असिस्टेंट अंडरसेक्रेटरी फायेद अल नोमान ने जानकारी दी कि विद्रोहियों ने मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिससे बंदरगाह की इमारतों, घाटों और वहां रखे कमर्शियल सामान व खाने-पीने की चीजों को भारी नुकसान पहुंचा है। सेना ने बताया कि मिसाइलें एक टेलीविजन चैनल के पास भी गिरीं और मोखा यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का मुख्य बंदरगाह है। हूतियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उन्होंने सैन्य बलों और गोदामों को निशाना बनाया है।
इसके साथ ही हूती सेना के प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के जाजान शहर में स्थित अरामको रिफाइनरी को भी ड्रोन से निशाना बनाया है। यह हमला सऊदी ड्रोन द्वारा यमन के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने के जवाब में किया गया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अरामको रिफाइनरी की एक फैसिलिटी में आग लग गई थी, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। इन हमलों ने 2022 के समझौते के बाद यमन में फिर से गृहयुद्ध भड़कने का खतरा पैदा कर दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर ईरान और ओमान की बातचीत
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और ओमान के बीच एक संभावित समझौते की खबरें सामने आई हैं। ये दोनों देश इस जलमार्ग के दोनों ओर स्थित हैं और एक अस्थायी समझौते को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं और इस समझौते के तहत जलमार्ग फिर से खुल जाएगा, जिसमें जहाज ईरान के पास से प्रवेश करेंगे और ओमान के पास से बाहर निकलेंगे। इस अंतरिम अवधि के दौरान जहाजों को बिना किसी शुल्क या टोल के आवाजाही की अनुमति होगी। इस समझौते का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच हुए पुराने अंतरिम समझौते को बहाल करना है। तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस योजना को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्यों का समर्थन प्राप्त है और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
दुश्मन देशों के जहाजों पर ईरान का कड़ा रुख
ईरान ने संकेत दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बावजूद दुश्मन देशों के जहाजों की आवाजाही पर रोक रहेगी। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने इस संबंध में एक रूपरेखा को मंजूरी दी है। ईरानी सांसद के अनुसार, जिन देशों ने ईरान को नुकसान पहुंचाया है, वे तब तक वहां से नहीं गुजर सकते जब तक कि वे इसकी भरपाई न कर दें। अर्ध सरकारी समाचार एजेंसियों फार्स और तस्नीम ने बताया कि अमेरिका और इजराइल को दुश्मन देशों की सूची में रखा गया है और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन होर्मुज तभी खुलेगा जब अमेरिका अपना व्यवहार सुधारेगा। ईरान की मांग है कि अमेरिका उसे धमकी देना बंद करे, युद्ध खत्म करे, नौसैनिक नाकेबंदी हटाए और क्षेत्र से अपनी सेना वापस बुलाए। साथ ही अमेरिका को युद्ध के नुकसान की भरपाई करनी होगी और ईरान की रोकी गई संपत्ति को बिना शर्त जारी करना होगा।
पेंटागन की हथियारों की कमी और समुद्री मार्ग का संकट
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकेबंदी के कारण 53 कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। इस बीच, पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा कि विभाग गोला बारूद की खरीद बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है ताकि सैनिकों को तेजी से हथियार मिल सकें। एक विश्लेषण के अनुसार, ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका के एडवांस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर का स्टॉक काफी कम हो गया है और इस कमी ने यूक्रेन और ताइवान जैसे सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है। पार्नेल ने कहा कि यह कोशिश आधुनिकीकरण की उस मुहिम का हिस्सा है जो 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध से पहले ही चल रही थी।
