भारतीय चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और प्रशासनिक सुधारों को लागू करने के उद्देश्य से कई बड़े फैसलों की घोषणा की है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने शनिवार को चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में हालिया विवादों को ध्यान में रखते हुए आयोग की व्यवस्था में व्यापक बदलाव करने का निर्णय लिया गया है। अब से चुनाव आयोग की किसी भी बैठक का एजेंडा पहले ही जारी कर दिया जाएगा और बैठक में हुई कार्यवाही की जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही के नए मानक
चुनाव आयोग के अनुसार, भविष्य में होने वाली सभी बैठकों का एजेंडा पहले से ही तय और प्रसारित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयोग के भीतर होने वाली चर्चाओं और निर्णयों के बारे में स्पष्टता बनी रहे। इसके साथ ही, बैठकों के कार्यवृत्त (मिनट्स) भी जारी किए जाएंगे, जिससे आयोग की कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ेगी। यह कदम हाल के दिनों में आयोग की आंतरिक प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवालों के जवाब में उठाया गया है। आयोग का मानना है कि कार्यवाही को सार्वजनिक करने से चुनावी प्रक्रिया में हितधारकों और आम जनता का विश्वास मजबूत होगा।
विदेश यात्रा और अनुशासन के लिए सख्त नियम
बैठक के दौरान लिया गया एक और बड़ा फैसला चुनाव अधिकारियों की विदेश यात्रा से संबंधित है। आयोग ने अनिवार्य कर दिया है कि चुनाव आयोग से जुड़े किसी भी अधिकारी को किसी भी विदेशी यात्रा पर जाने से पहले आयोग से पूर्व अनुमति लेनी होगी और बिना स्पष्ट अनुमति के कोई भी अधिकारी विदेश यात्रा नहीं कर सकेगा। इसके अतिरिक्त, आयोग ने निर्देश दिया है कि चुनाव आयुक्तों द्वारा अधिकारियों को जारी किए गए सभी निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि आयोग की मुख्य जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित रहे।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और मतदाता संपर्क
आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। उन मतदाताओं की सहायता के लिए जिन्हें SIR प्रक्रिया के दौरान अनमैप्ड स्टेटस या लॉजिकल गड़बड़ियों के कारण नोटिस मिला है, बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को उनके घर जाने का निर्देश दिया गया है। BLO खुद आवश्यक दस्तावेज इकट्ठा करेंगे और उन्हें ECINet पोर्टल पर अपलोड करेंगे। यह पहल सुनिश्चित करती है कि मतदाताओं को सुनवाई के लिए ERO या AERO कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, सिवाय उन विशेष मामलों के जहां ERO इसे आवश्यक समझते हैं। ऐसे मामलों में सुनवाई ऑनलाइन आयोजित की जाएगी और मतदाता के परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य इसमें शामिल हो सकता है।
दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए संशोधित समय-सीमा
दिल्ली और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के अनुरोध पर, आयोग ने SIR प्रक्रिया से संबंधित दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ा दी है। दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है, जबकि उनके निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर 2026 तय की गई है। महाराष्ट्र के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 12 अक्टूबर 2026 है और निपटारे की समय-सीमा 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। इन विस्तारों का उद्देश्य मतदाताओं को मतदाता सूची में किसी भी विसंगति को सुधारने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करना है।
IT बुनियादी ढांचा और प्रदर्शन मूल्यांकन
आयोग ने कानूनों और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए ECINet पोर्टल की समीक्षा करने का निर्णय लिया है और एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (DEC) की अध्यक्षता वाली समिति, जिसमें IIT और IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे, यह समीक्षा करेगी। IT से संबंधित किसी भी नए प्रोजेक्ट के लिए अब अधिकारियों की समिति (COO) से गहन चर्चा के बाद मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, आयोग ने सभी अधिकारियों के लिए वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) को पूरा करने की एक सख्त समय-सीमा तय की है, जिसे हर साल 31 दिसंबर तक पूरा करना अनिवार्य होगा।
कैबिनेट सचिव को पत्र और SIR पर स्पष्टीकरण
चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए एक पत्र के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि यह पत्र चुनाव आयोग या उसके IT विभाग की किसी नीतिगत बात से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। आयोग ने यह भी बताया कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी किए गए कार्य-वितरण आदेश दो आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए थे। SIR प्रक्रिया के बारे में आयोग ने दोहराया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR आयोजित करने का निर्णय 24 जून 2025 को सर्वसम्मति से लिया गया था। यह प्रक्रिया बिहार से शुरू हुई और बाद में पश्चिम बंगाल और 30 अन्य राज्यों में विस्तारित हुई। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने आदेश में इस प्रक्रिया को बरकरार रखा था। आयोग ने यह भी बताया कि गोवा में BLO को 97 पहचाने गए छूटे हुए मतदाताओं से संपर्क करने का निर्देश दिया गया है, जिनमें से 81 ने पहले ही फॉर्म 6 भर दिया है।
