अमेरिका में होने वाले आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है और वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर अब केवल 37 प्रतिशत रह गई है। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1990 के बाद से मिडटर्म चुनावों से पहले किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह सबसे कम रेटिंग दर्ज की गई है। हालांकि, इन गिरते आंकड़ों के बावजूद ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि नवंबर में होने वाले इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की बड़ी जीत होगी।
ऐतिहासिक गिरावट और प्रशासनिक चुनौतियां
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ट्रंप प्रशासन इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। अप्रूवल रेटिंग में आई इस भारी गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इनमें ईरान के साथ बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू स्तर पर आर्थिक चिंताएं सबसे ऊपर हैं। अमेरिका में तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई ने आम जनता के बीच असंतोष पैदा किया है, जिसका सीधा असर राष्ट्रपति की लोकप्रियता पर पड़ता दिख रहा है। 37 प्रतिशत की यह रेटिंग पिछले 36 वर्षों के चुनावी इतिहास में एक नकारात्मक रिकॉर्ड के रूप में देखी जा रही है।
राज्यों में चुनाव प्रचार की तैयारी
पोलिटिको की एक रिपोर्ट के अनुसार, गिरती रेटिंग के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। वे जल्द ही उन राज्यों में चुनाव प्रचार शुरू करने वाले हैं जहां रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा मजबूत है और इस कदम का उद्देश्य अपनी पसंद के उम्मीदवारों को मजबूती देना और पार्टी के आधार को एकजुट करना है। मामले की जानकारी रखने वाले दो विशेषज्ञों का हवाला देते हुए पोलिटिको ने बताया कि ट्रंप चुनाव के दिन से पहले आयोवा, फ्लोरिडा, टेक्सास और अलास्का जैसे राज्यों का दौरा करेंगे। इसके अलावा, अगले हफ्ते उनके ओक्लाहोमा जाने का भी कार्यक्रम है।
ईरान के सीजफायर प्रस्ताव को ठुकराया
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ट्रंप प्रशासन कड़ा रुख अपनाए हुए है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान द्वारा दिए गए सात दिन के सीजफायर (युद्धविराम) के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप ने अपने करीबियों से कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर बमबारी की कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। यह बयान उनके उस भाषण के बाद आया है जो उन्होंने इस हफ्ते की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दिया था, जिसमें उन्होंने ईरान को गंभीर चेतावनी दी थी।
संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप का कड़ा रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान के भविष्य को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, "मुझे एक बड़ा फैसला लेना है। क्या ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा जिससे वे फिर से खड़े हो सकें और पहले से कहीं ज्यादा बेहतर देश बन सकें? शायद मिडिल ईस्ट या दुनिया के सबसे बेहतरीन देशों में से एक। या फिर मैं इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह खत्म कर दूं, और वह भी जल्दी, ताकि उन्हें दोबारा लोगों और देशों को मारने और बर्बाद करने का मौका न मिले?
ईरान की शांति योजना और चुनाव की तारीख
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने गुरुवार को जानकारी दी थी कि ईरान ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक सात दिवसीय योजना का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत शुरू करने का प्रयास शामिल था। हालांकि, अमेरिका ने फिलहाल इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को आयोजित किए जाएंगे, जो ट्रंप प्रशासन के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होंगे।
