नासा का स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी मिशन संकट में लिंक स्पेसक्राफ्ट वायुमंडल में जलकर हुआ खाक

नासा के 22 साल पुराने स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को बचाने का मिशन विफल हो गया है। इसे बचाने गया लिंक स्पेसक्राफ्ट तकनीकी खराबी के कारण नष्ट हो गया जिससे 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। स्विफ्ट अब नवंबर में धरती पर गिर सकता है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के 22 साल पुराने अंतरिक्ष टेलीस्कोप स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को बचाने की कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है। स्विफ्ट को बचाने के लिए भेजा गया निजी अंतरिक्ष यान लिंक अपना मिशन पूरा करने में विफल रहा और शुक्रवार को धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते ही नष्ट हो गया और करीब 3 महीने पहले लॉन्च किए गए इस लिंक स्पेसक्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य स्विफ्ट को एक सुरक्षित और ऊंची कक्षा में पहुंचाना था। इस पूरे मिशन पर लगभग 3 करोड़ डॉलर यानी करीब 250 करोड़ रुपये का खर्च आया था। कैटेलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित इस यान की विफलता के बाद अब स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी के भी जल्द ही धरती पर गिरने की आशंका बढ़ गई है।

स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी का महत्व और संकट

स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को साल 2004 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। इसे तैयार करने में लगभग 36 करोड़ 40 लाख डॉलर या करीब 3500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आई थी। यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड में होने वाली सबसे शक्तिशाली और क्षणिक घटनाओं जैसे गामा-रे विस्फोट और तारों के फटने की निगरानी के लिए बनाया गया है। स्विफ्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेजी से दिशा बदलने की क्षमता है, जो इसे अंतरिक्ष विज्ञान में एक फर्स्ट रिस्पॉन्डर या पहले चेतावनी देने वाले यंत्र की भूमिका देती है। जब भी अंतरिक्ष में कोई बड़ी घटना होती है, स्विफ्ट तुरंत उसकी पहचान कर दूसरे टेलीस्कोपों को उस दिशा में देखने का संकेत भेजता है और हालांकि, सूर्य से निकलने वाले शक्तिशाली फ्लेयर्स के कारण इसकी कक्षा उम्मीद से ज्यादा तेजी से नीचे आने लगी, जिससे इसके धरती पर गिरने का खतरा पैदा हो गया।

लिंक स्पेसक्राफ्ट की तकनीकी विफलता

स्विफ्ट को बचाने के लिए कैटेलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज ने लिंक स्पेसक्राफ्ट को 3 जुलाई को लॉन्च किया था। इस मिशन की योजना यह थी कि लिंक स्विफ्ट तक पहुंचेगा और अपनी 3 रोबोटिक भुजाओं की मदद से उसे पकड़कर एक ऊंची कक्षा में ले जाएगा। लेकिन लॉन्च के तुरंत बाद ही लिंक में इलेक्ट्रॉनिक समस्याएं शुरू हो गईं और यान को सही दिशा में रखने के लिए जरूरी 3 रिएक्शन व्हील में से 2 ने काम करना बंद कर दिया। इसके अलावा, एक खराब वाल्व की वजह से यान तेजी से घूमने लगा, जिससे संचार में बाधा आई। हालांकि इंजीनियरों ने बाद में नियंत्रण पा लिया, लेकिन तब तक काफी ईंधन खत्म हो चुका था। लिंक के पास स्विफ्ट को उठाने के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं बचा था, जिसके कारण अगस्त में इस बचाव मिशन को आधिकारिक तौर पर रोक दिया गया था।

मिशन से मिली महत्वपूर्ण सीख

भले ही लिंक स्विफ्ट को बचाने में सफल नहीं रहा, लेकिन कैटेलिस्ट की टीम ने इस दौरान कई महत्वपूर्ण परीक्षण किए। इंजीनियरों ने यान की 3 फीट लंबी 3 रोबोटिक भुजाओं को चलाने का अभ्यास किया। लिंक स्पेसक्राफ्ट स्विफ्ट के बेहद करीब पहुंचने में भी सफल रहा, जहां दोनों के बीच की दूरी केवल 12 से 15 किलोमीटर रह गई थी। इस दौरान लिंक ने स्विफ्ट की तस्वीरें भी लीं और कैटेलिस्ट के सीईओ गोन्ही ली ने कहा कि यह एक महत्वाकांक्षी मिशन था और इससे मिली सीख भविष्य के सैटेलाइट रिकवरी मिशनों में काम आएगी। नासा के शॉन डोमागल-गोल्डमैन ने भी कहा कि स्विफ्ट का मिशन खत्म होना दुखद है, लेकिन इस कोशिश ने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान किया है।

स्विफ्ट का भविष्य और नासा की तैयारी

लिंक के नष्ट होने के बाद अब स्विफ्ट अंतरिक्ष में अकेला है और उसकी कक्षा लगातार नीचे आ रही है। नासा के अनुसार, स्विफ्ट फिलहाल ब्रह्मांड की निगरानी कर रहा है, लेकिन उसके पास अब केवल एक महीने का समय बचा है। उम्मीद है कि स्विफ्ट नवंबर की शुरुआत में धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर जाएगा और नष्ट हो जाएगा। नासा अब इस बात पर विचार कर रहा है कि स्विफ्ट के जाने के बाद ब्रह्मांडीय घटनाओं पर नजर रखने की उसकी जिम्मेदारी को कौन सा मिशन पूरा करेगा। 22 वर्षों तक अंतरिक्ष में अपनी सेवाएं देने वाला यह टेलीस्कोप जल्द ही इतिहास का हिस्सा बन जाएगा।