अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से यह खबर सामने आई है कि अमेरिका अब पूरे ICC संगठन को ही प्रतिबंधों के दायरे में लाने की योजना बना चुका है। इस बड़े फैसले का आधिकारिक ऐलान किसी भी समय किया जा सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान इस निर्णय को अंतिम रूप दिया जा सकता है और हालांकि, इस संवेदनशील मामले पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन इस कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
ICC की भूमिका और अमेरिका का रुख
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC दुनिया भर में युद्ध अपराधों, नरसंहार और मानवता के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों की जांच करने और उन पर मुकदमे चलाने के लिए जिम्मेदार है और इस वैश्विक संस्था की स्थापना वर्ष 2002 में की गई थी। ICC की कार्यप्रणाली यह है कि वह तब हस्तक्षेप करता है जब किसी देश की सरकार अपने यहां हुए गंभीर अपराधों की जांच करने में या तो सक्षम नहीं होती या फिर उसकी मंशा जांच करने की नहीं होती। गौरतलब है कि अमेरिका ICC का सदस्य देश नहीं है। ऐसे में अगर ट्रंप प्रशासन पूरे संगठन पर प्रतिबंध लगाता है, तो इससे अमेरिका और ICC के बीच पहले से चला आ रहा तनाव एक नए और अधिक गंभीर स्तर पर पहुंच सकता है।
इजराइली नेताओं और अफगानिस्तान जांच पर विवाद
ट्रंप प्रशासन द्वारा ICC को घेरने के पीछे मुख्य कारण इजराइली नेताओं के खिलाफ जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट और अमेरिकी सैनिकों से जुड़ी पुरानी जांचें हैं और अमेरिकी अधिकारी लगातार यह मांग कर रहे हैं कि ICC इजराइली नेताओं के खिलाफ जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट को तुरंत वापस ले। इसके अलावा, अमेरिका चाहता है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की भूमिका से जुड़ी ICC की पुरानी जांच को भी हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए। अमेरिका इन जांचों को अपने संप्रभु अधिकारों और अपने सहयोगियों के हितों पर हमला मानता है।
मार्को रुबियो की मुहिम और पिछले प्रतिबंध
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जुलाई के महीने में ICC को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए एक विशेष मुहिम की शुरुआत की थी। उन्होंने न केवल अमेरिका की ओर से कड़े रुख की वकालत की, बल्कि दुनिया के अन्य देशों से भी अपील की कि वे ICC से बाहर निकल जाएं। यह ध्यान देने वाली बात है कि अमेरिका पहले भी ICC के कई जजों और वकीलों पर व्यक्तिगत रूप से प्रतिबंध लगा चुका है। लेकिन यह पहली बार होगा जब पूरे ICC संगठन को ही प्रतिबंधों की सूची में डाल दिया जाएगा। यह कदम कोर्ट की पूरी संरचना को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
प्रतिबंधों का ICC के कामकाज पर असर
यदि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग पूरे ICC पर प्रतिबंध लागू कर देता है, तो इसके परिणाम अत्यंत गंभीर होंगे और इन प्रतिबंधों के लागू होने के बाद कोई भी अमेरिकी नागरिक या कंपनी बिना विशेष सरकारी अनुमति के ICC को किसी भी प्रकार का पैसा, सामान या सेवाएं नहीं दे सकेगी। चूंकि दुनिया की अधिकांश बैंकिंग प्रणाली अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बैंक भी ICC के साथ किसी भी प्रकार के लेनदेन से बचेंगे। इससे कोर्ट की आईटी सेवाएं, बीमा, नए जांचकर्ताओं की नियुक्ति और रोजमर्रा के बैंकिंग कार्य पूरी तरह से ठप हो सकते हैं। यहां तक कि कोर्ट में काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों को उनका वेतन देने में भी बड़ी कानूनी और तकनीकी अड़चनें आ सकती हैं।
ट्रंप का पुराना विवाद और वर्तमान स्थिति
डोनाल्ड ट्रंप और ICC के बीच यह विवाद उनके पहले राष्ट्रपति कार्यकाल से ही चला आ रहा है। वर्ष 2024 में दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर से प्राथमिकता पर आ गया है। हाल ही में जब ICC ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की प्रक्रिया शुरू की, तो ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट के अधिकारियों पर कार्रवाई करने की अपनी पुरानी योजना को फिर से सक्रिय कर दिया। अब इस योजना को पूरे संगठन पर प्रतिबंध लगाकर अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली में एक नया मोड़ आने की संभावना है।
