पाकिस्तान की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की 73 वर्षीय बहन अलीमा खान को अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। यह कार्रवाई पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) द्वारा प्रस्तावित एक बड़े विरोध-प्रदर्शन से ठीक पहले की गई है और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अलीमा खान को लाहौर में हिरासत में लिया गया और उसके तुरंत बाद उन्हें कोट लखपत जेल भेज दिया गया है। अलीमा खान को 30 दिनों की अवधि के लिए हिरासत में रखने का निर्णय लिया गया है। वह अपने भाई इमरान खान की रिहाई के लिए लगातार आवाज उठाती रही हैं, जो वर्ष 2023 से जेल में बंद हैं।
किस कानून के तहत हुई कार्रवाई?
अलीमा खान की यह गिरफ्तारी पंजाब सार्वजनिक व्यवस्था रखरखाव अध्यादेश, 1960 के तहत की गई है। यह कानून स्थानीय पुलिस और प्रशासन को यह अधिकार देता है कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं, जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा महसूस होता हो। प्रशासन का मानना है कि अलीमा खान की गतिविधियों से क्षेत्र की शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी, जिसके आधार पर यह कदम उठाया गया है। लाहौर के उपायुक्त मोहम्मद अली एजाज ने इस संबंध में 30 दिन की हिरासत का औपचारिक आदेश जारी किया है।
विरोध प्रदर्शन और गिरफ्तारी का समय
यह कार्रवाई इमरान खान की पार्टी पीटीआई द्वारा 27 सितंबर को आयोजित होने वाले नियोजित विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले हुई है। पीटीआई ने सरकार पर पूर्व क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान को जेल से रिहा करने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से इस प्रदर्शन की घोषणा की थी और इमरान खान को अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बेदखल कर दिया गया था और तब से वह कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की गिरफ्तारियों से विरोध प्रदर्शन के दौरान होने वाली संभावित अशांति को रोका जा सकता है।
घर से निकलते समय लिया गया हिरासत में
इमरान खान की एक अन्य बहन, नोरीन नियाजी ने स्थानीय मीडिया जियो न्यूज को बताया कि अलीमा खान को उस समय हिरासत में लिया गया जब वह अपने घर से निकल रही थीं और नोरीन ने बताया कि उन्हें बाद में जानकारी मिली कि अलीमा को कोट लखपत जेल ले जाया गया है। उन्होंने प्रशासन की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि सरकार महिलाओं को गिरफ्तार करने को लेकर इतनी चिंतित क्यों है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को अनुचित बताया है।
पार्टी की प्रतिक्रिया और कानूनी विकल्प
पीटीआई के केंद्रीय सूचना सचिव शेख वकास अकरम ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए मांग की कि अलीमा खान को तुरंत अदालत में पेश किया जाना चाहिए। अकरम ने कहा कि एक बहन को सिर्फ इसलिए सजा दी जा रही है क्योंकि वह अपने भाई के हक के लिए आवाज उठा रही है और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पंजाब लोक व्यवस्था रखरखाव अध्यादेश के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति के पास इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देने का अधिकार होता है। इसके अलावा, वे प्रांतीय सरकार के समक्ष भी अपना पक्ष रख सकते हैं। फिलहाल, अलीमा खान को 30 दिनों तक जेल में ही रहना होगा जब तक कि अदालत से उन्हें कोई राहत नहीं मिल जाती।
