भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त बिकवाली का दौर देखने को मिला, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 1 प्रतिशत से अधिक टूट गए। इस अचानक आई गिरावट के पीछे ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जैसे प्रमुख कारण रहे। बाजार खुलने के मात्र 20 मिनट के भीतर निवेशकों की 4 लाख 47 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कमाई डूब गई। सुबह 9 बजकर 35 मिनट तक सेंसेक्स 890 अंक गिरकर 73,759 पॉइंट 94 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 में 239 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,244 पॉइंट 45 पर पहुंच गया। बाजार में घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंडिया विक्स (India VIX), जो बाजार की अस्थिरता को मापता है, 8 प्रतिशत से अधिक उछलकर 16 पॉइंट 62 पर पहुंच गया।
निवेशकों को लगा भारी झटका
इस गिरावट के कारण शेयर बाजार की कुल वैल्यूएशन में भारी कमी आई है। एक दिन पहले बीएसई (BSE) की कुल वैल्यूएशन 4,62,67,787 करोड़ 61 लाख रुपये थी, जो बुधवार को कारोबार शुरू होने के महज 20 मिनट के भीतर गिरकर 4,58,20,622 करोड़ 26 लाख रुपये पर आ गई। इसका सीधा मतलब है कि निवेशकों को 4,47,165 करोड़ 35 लाख रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बाजार का माहौल इतना खराब था कि एनएसई पर लगभग 1,634 शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि केवल 913 शेयरों में तेजी आई और 84 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में रहे, जहां निफ्टी मिडकैप 100 में 0 पॉइंट 7 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0 पॉइंट 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार गिरने के 6 मुख्य कारण
विशेषज्ञों ने बाजार में आई इस सुनामी के लिए निम्नलिखित 6 कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:
- ईरान-अमेरिका तनाव में बढ़ोतरी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध खत्म होने के दावों के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हो रहा है। इजराइल द्वारा लेबनान पर हमले जारी रहने से वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम खतरे में है। अमेरिकी सेना ने खाड़ी में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम करने और जवाबी कार्रवाई करने की पुष्टि की है, जिससे अनिश्चितता बढ़ गई है।
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। वहीं, WTI क्रूड भी 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है। होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, उसके बंद होने की आशंका ने निवेशकों को डरा दिया है।
- रुपये की कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे गिरकर 95 रुपये 50 पैसे पर आ गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल को बढ़ा रही हैं, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ गया है। तकनीकी रूप से 94 रुपये 85 पैसे एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर है, जबकि 95 रुपये 75 पैसे अगला समर्थन क्षेत्र है।
- विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली: विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने 8,363 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे पहले 29 मई को 22,102 करोड़ रुपये और 1 जून को 3,843 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली हुई थी।
- बॉन्ड यील्ड में तेजी: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई है। 10 साल के नोट पर यील्ड बढ़कर 4 पॉइंट 457 प्रतिशत और 30 साल के बॉन्ड पर 4 पॉइंट 97 प्रतिशत हो गई है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशक इक्विटी बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाना सुरक्षित समझते हैं।
- IT शेयरों में मुनाफावसूली: पिछले कुछ सत्रों में आईटी शेयरों में भारी तेजी आई थी। निफ्टी आईटी इंडेक्स तीन सत्रों में 8 प्रतिशत चढ़ा था। आज टीसीएस, एचसीएल टेक और इंफोसिस जैसे शेयरों में 2 से 5 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया।
क्या है जानकारों की राय?
जियोजित इन्वेस्टमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, पश्चिम एशिया के संघर्ष और 97 डॉलर के करीब पहुंचे कच्चे तेल के कारण भारत के लिए ऊर्जा संकट बना रहेगा। उन्होंने बताया कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में सैमसंग और टीएसएमसी जैसी कंपनियों के कारण तेजी है, लेकिन भारत में वित्त वर्ष 2027 में मुनाफे की रफ्तार धीमी रह सकती है। हालांकि, घरेलू रिटेल निवेशकों का भरोसा बाजार के लिए एक राहत की बात है, जो लगातार निवेश कर रहे हैं।
