सीरिया के न्यायिक इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ आया है। देश की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई है और यह फैसला केवल बशर अल-असद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके भाई माहेर अल-असद को भी समान रूप से दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा दी गई है। अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में असद शासन के दौरान किए गए मानवता के खिलाफ अपराधों और युद्ध अपराधों को इस कठोर सजा का मुख्य आधार बनाया है। इन अपराधों में हत्या, यातना और नागरिकों की मनमानी गिरफ्तारी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
अदालत का फैसला और गंभीर आरोप
सीरियाई अदालत ने स्पष्ट किया कि बशर अल-असद और उनके भाई माहेर अल-असद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी माध्यमों से कार्रवाई जारी रखी जाएगी। अदालत का उद्देश्य उन्हें न्याय के कटघरे में खड़ा करना है ताकि उनके द्वारा किए गए कृत्यों का हिसाब लिया जा सके। फैसले के अनुसार, बशर अल-असद को एक से अधिक व्यक्तियों और विशेष रूप से बच्चों की पूर्व नियोजित एवं जानबूझकर की गई हत्याओं का दोषी पाया गया है। इसके अलावा, उन पर शासन के दौरान बड़े पैमाने पर यातना देने और लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जेलों में डालने के आरोप भी सिद्ध हुए हैं।
असद शासन का पतन और पलायन
यह सजा उस घटनाक्रम के बाद आई है जिसने सीरिया की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया और दिसंबर 2024 में विद्रोही बलों ने एक अत्यंत तीव्र और प्रभावी सैन्य अभियान चलाया। महज 11 दिनों के भीतर विद्रोहियों ने असद शासन के सुरक्षा तंत्र को ध्वस्त कर दिया। जब विद्रोहियों का दबाव असहनीय हो गया, तो बशर अल-असद और उनके भाई माहेर सीरिया छोड़कर भाग गए और रूस की राजधानी मॉस्को में शरण ली। इस पलायन के साथ ही सीरिया में असद परिवार का दशकों पुराना शासन समाप्त हो गया।
माहेर अल-असद की भूमिका
बशर के भाई माहेर अल-असद को भी अदालत ने समान रूप से जिम्मेदार माना है और माहेर सीरियाई सेना की कुख्यात चौथी डिवीजन के कमांडर थे। उन्हें असद शासन का सबसे प्रमुख सुरक्षा अधिकारी और शासन की नीतियों को सख्ती से लागू करने वाला व्यक्ति माना जाता था। अदालत ने पाया कि माहेर ने सैन्य अभियानों का नेतृत्व करते हुए मानवता के खिलाफ अपराध किए और नागरिकों के दमन में मुख्य भूमिका निभाई।
2011 का विद्रोह और गृहयुद्ध
असद शासन के खिलाफ आरोपों की जड़ें वर्ष 2011 में हुए विद्रोह में छिपी हैं। उस समय सीरिया में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए थे, जिन्हें दबाने के लिए असद सरकार ने अत्यधिक सैन्य बल का प्रयोग किया। सरकार पर प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों की बड़े पैमाने पर हत्या और यातना के आरोप लगे। इसके बाद शुरू हुआ गृहयुद्ध लगभग 14 साल तक चला, जिसमें करीब 500000 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। अदालत ने इन सभी वर्षों के दौरान हुई हिंसा के लिए असद को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
आतेफ नजीब और दारा की घटना
अदालत ने बशर के चचेरे भाई आतेफ नजीब को भी मौत की सजा सुनाई है। नजीब दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा विभाग के प्रमुख थे। उन पर 2011 में 15 बच्चों को अमानवीय यातना देने का आरोप था, जिन्होंने दीवार पर असद विरोधी नारे लिखे थे। इस घटना ने पूरे सीरिया में गुस्से की लहर पैदा कर दी थी और विद्रोह की आग भड़क उठी थी और नजीब की सुनवाई के दौरान उन्हें जेल की वर्दी में एक पिंजरे में दिखाया गया, जिसे सीरियाई सरकार ने संक्रमणकालीन न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
असद के बाद भी जारी है हिंसा
असद शासन के खत्म होने के बाद भी सीरिया में शांति बहाल नहीं हो पाई है। मार्च 2025 में असद के वफादार उग्रवादियों ने सुरक्षा बलों पर हमले किए, जिसके जवाब में हुई हिंसा में लगभग 1500 नागरिक मारे गए। इनमें से अधिकांश अलावी समुदाय के लोग थे। बशर अल-असद स्वयं इसी अल्पसंख्यक अलावी संप्रदाय से आते हैं। इसके बाद जुलाई 2025 में सुवैदा प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी, जिसमें 1700 से अधिक लोग मारे गए। उत्तरी सीरिया में भी अलावी नागरिकों को निशाना बनाए जाने की खबरें लगातार आ रही हैं।
संक्रमणकालीन न्याय की कोशिशें
वर्तमान सीरियाई अधिकारी अब असद शासन के दौर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में जुटे हैं। इसके लिए विशेष समितियों का गठन किया गया है और पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारियां की जा रही हैं। सरकार का तर्क है कि दशकों से चली आ रही हिंसा और सांप्रदायिक विभाजन को समाप्त करने के लिए यह कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य है। बशर और माहेर को दी गई यह सजा इसी प्रक्रिया का एक हिस्सा है।
बशर अल-असद का सफर: डॉक्टर से राष्ट्रपति तक
बशर अल-असद ने वर्ष 2000 में 34 वर्ष की आयु में सत्ता संभाली थी। वह पेशे से एक नेत्र चिकित्सक थे और उन्होंने लंदन में अपनी शिक्षा प्राप्त की थी। शुरुआत में उन्हें राजनीति में आने का इच्छुक नहीं माना जाता था, लेकिन उनके बड़े भाई बासिल अल-असद की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया। उन्होंने अपने पिता हाफिज अल-असद की विरासत को आगे बढ़ाया। हालांकि, एक सुधारवादी नेता के रूप में शुरू हुआ उनका सफर 2011 के बाद एक कठोर शासक के रूप में समाप्त हुआ, जिसे अब अदालत ने मौत की सजा सुनाई है।
