सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में आई जोरदार रिकवरी ने निवेशकों के बीच एक बार फिर उम्मीद की किरण जगा दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ एक सकारात्मक व्यापार समझौते की घोषणा हो सकती है, जिससे बाजार को और गति मिलेगी। इसके अतिरिक्त, वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति शुरू होने से भारत को भी फायदा। होने की उम्मीद है, जो कच्चे तेल की कीमतों को कम कर सकता है। ये और ऐसे कई अन्य कारक हैं जो शेयर बाजार में एक तूफानी तेजी का माहौल बना सकते हैं।
अमेरिकी राजदूत की सकारात्मक टिप्पणी और बाजार का उछाल
भारत में अमेरिकी राजदूत की व्यापार समझौते पर सकारात्मक टिप्पणी ने निवेशकों को खरीदारी का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। इस टिप्पणी के बाद, सोमवार को सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर से 1000 अंकों से अधिक की तेजी के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 100 से अधिक अंकों की बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा। एक समय ऐसा लग रहा था कि लगातार छठे दिन भी शेयर बाजार में गिरावट जारी रहेगी, क्योंकि सेंसेक्स 83 हजार अंकों से नीचे आ गया था। हालांकि, इन दो प्रमुख सकारात्मक खबरों ने शेयर बाजार को। एक बार फिर पटरी पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दर्शाता है कि वैश्विक संकेतों का भारतीय बाजार पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है।
वैश्विक और घरेलू कारक: बाजार की दिशा तय करते हुए
वर्तमान में, शेयर बाजार अपने उच्चतम स्तर से लगभग 2300 अंक पीछे है, लेकिन हालिया तेजी ने भविष्य के लिए कुछ महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार में तेजी का माहौल। बनने में देर नहीं लगती है, खासकर जब वैश्विक कारक अनुकूल हों। मौजूदा समय में, शेयर बाजार को मुख्य रूप से विदेशी कारण ट्रिगर कर रहे हैं, जिनमें अमेरिका के साथ व्यापार समझौता, भू-राजनीतिक तनाव में कमी, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट, और विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से पलायन जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन कारकों का सीधा असर बाजार की धारणा पर पड़ता है।
घरेलू मोर्चे पर मजबूत आर्थिक संकेत
दूसरी ओर, घरेलू स्तर पर ऐसा कोई बड़ा कारण नहीं है जिससे शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिले और देश में टैक्स कलेक्शन के आंकड़े काफी उत्साहजनक रहे हैं, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। महंगाई के आंकड़ों में भी ठहराव देखने को मिला है, और यह। अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सहनशीलता स्तर से नीचे है। जीएसटी कलेक्शन से लेकर अन्य सभी प्रमुख आर्थिक संकेतक बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव को उजागर करते हैं। मैन्युफैक्चरिंग और कुछ अन्य चुनिंदा इंडीकेटर्स को छोड़कर, समग्र स्थिति काफी बेहतर है और ऐसे में, यदि वैश्विक माहौल में कुछ सुधार आता है, तो शेयर बाजार की रफ्तार को और गति मिल सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार की स्थिति कैसी रह सकती है।
महंगाई के आंकड़े बेहतर स्थिति में
मौजूदा समय में, देश में महंगाई के आंकड़े काफी बेहतर स्थिति में हैं, जो बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। 12 जनवरी को जारी किए गए खुदरा महंगाई के आंकड़े इसी कहानी को बयां करते हैं और आंकड़ों के अनुसार, देश में खुदरा महंगाई दर 1. 33 फीसदी दर्ज की गई है, जो पिछले तीन महीनों में सबसे अधिक है। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये आंकड़े अभी भी आरबीआई के सहनशीलता स्तर से नीचे हैं। यह लगातार 11वां महीना है जब देश में महंगाई दर आरबीआई के निर्धारित सहनशीलता स्तर से नीचे बनी हुई है, जो शेयर बाजार के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है और मंगलवार को भी इसका असर शेयर बाजार में काफी सकारात्मक देखने को मिल सकता है, क्योंकि कम महंगाई दर केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों पर नरम रुख अपनाने का अवसर देती है।
टैक्स कलेक्शन में शानदार वृद्धि
12 जनवरी को जारी किए गए टैक्स कलेक्शन के आंकड़े भी काफी बेहतर स्थिति में देखने को मिले हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 9 फीसदी की प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज। की गई है, जिसके बाद यह आंकड़ा 18 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए सरकार का लक्ष्य 25 लाख करोड़ रुपये का है और शेयर बाजार के लिए घरेलू ट्रिगर के हिसाब से ये आंकड़े काफी अच्छे हैं। जानकारों का कहना है कि अगले दो से ढाई महीने में वित्त वर्ष समाप्त। होने जा रहा है, और इस आंकड़े को आसानी से छुआ जा सकता है। साथ ही, रिफंड में जिस तरह से कमी आई है, उससे इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कोई मुश्किल नहीं होनी चाहिए। यह सरकारी राजस्व की मजबूती और आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत है।
ट्रेड डील पर सकारात्मक बातचीत
अमेरिकी राजदूत और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सर्गियो गोर ने व्यापार समझौते पर जो संकेत दिए हैं, वे काफी हद तक भारत के लिए सकारात्मक हैं और उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और दुनिया का सबसे बड़ा देश होने के नाते, अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता निश्चित रूप से होगा। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देश इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही किसी न किसी नतीजे पर पहुंचेंगे और इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति अगले दो सालों में भारत का दौरा भी कर सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंध काफी अच्छे माने जाते हैं, ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी भी तरह की खटास की कोई बात नहीं है। इसी वजह से सोमवार को शेयर बाजार का सेंटीमेंट काफी सकारात्मक रहा, और आने वाले दिनों में भी इसके ऐसे ही बने रहने की उम्मीद है।
बजट में होने वाले संभावित ऐलान
वहीं दूसरी ओर, 1 फरवरी यानी रविवार को वित्त वर्ष 2027 के लिए बजट पेश होने वाला है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार के बजट में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि, सरकारी खर्च, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत एक नई योजना की घोषणा भी कर सकती है,। जिसमें सरकार के साथ निजी क्षेत्र को भी जोड़ा जाएगा ताकि बुनियादी ढांचे के विकास पर तेजी से काम हो सके। यह शेयर बाजार के लिए एक बहुत ही सकारात्मक खबर है, क्योंकि इससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, इस साल देश का कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) 15 से 20 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है, जो निवेश और विकास को गति देगा।
कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट
हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी देखने को मिली थी और कीमतें 63 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं। हालांकि, आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने की संभावना है। इसका मुख्य कारण वेनेजुएला के कच्चे तेल की आपूर्ति का बाजार में आना है, जो मौजूदा समय में अमेरिका के नियंत्रण में आ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला के तेल की आपूर्ति बाजार में आने से कच्चे तेल की कीमतों में कमी आएगी। जून या जुलाई तक कच्चे तेल की कीमतें न केवल 60 डॉलर बल्कि 55 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे देखने को मिल सकती हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह एक बहुत बड़ी। राहत होगी, जिससे महंगाई पर नियंत्रण और व्यापार घाटे में कमी आएगी।
ब्याज दरों में संभावित कटौती
महीने के आखिरी हफ्ते में अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण बैठक होने जा। रही है, जिसमें 25 बेसिस प्वाइंट की ब्याज दर कटौती की संभावना जताई जा रही है। यह भारत के लिए एक सकारात्मक खबर है, क्योंकि इससे डॉलर इंडेक्स में कमी आएगी और भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी और रुपये की मजबूती से आयात सस्ता होगा और शेयर बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। मौजूदा समय में भले ही महंगाई के आंकड़े फेड के सहनशीलता स्तर 2 फीसदी से ऊपर हों, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर फेड काफी आक्रामक है, जो राष्ट्रपति ट्रंप की सोच के साथ मेल खा रही है। वैसे पिछली पॉलिसी बैठक में फेड रिजर्व के चेयरमैन ने कहा था कि साल 2026 में सिर्फ एक ही। रेट कट हो सकता है, लेकिन अमेरिकी आर्थिक संकेतक एक और रेट कट की ओर ही इशारा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, आरबीआई भी मौजूदा वित्त वर्ष के आखिरी और कैलेंडर ईयर की पहली एमपीसी बैठक। में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है, जो शेयर बाजार के लिए काफी सकारात्मक है।
जीडीपी ग्रोथ के उत्साहजनक आंकड़े
हाल ही में सरकार ने आर्थिक विकास को लेकर ताजा अनुमान जारी किए हैं, जिसके तहत देश में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) मौजूदा वित्त वर्ष में 7. 4 फीसदी रहने का अनुमान है। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 90 बेसिस प्वाइंट ज्यादा है, जो देश और शेयर बाजार दोनों के लिए काफी सकारात्मक है। जानकारों की मानें तो जीएसटी सुधार जीडीपी के अनुमानित आंकड़ों को और संशोधित कर सकता है। मुमकिन है कि यह आंकड़ा सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को चौंकाते हुए 8 फीसदी के करीब भी पहुंच सकता है। ऐसे में, शेयर बाजार फिर से रॉकेट की तरह ऊपर जा सकता है, क्योंकि मजबूत आर्थिक वृद्धि कंपनियों की आय और निवेशकों के भरोसे को बढ़ाती है।
एकमात्र चिंता: विदेशी निवेशकों का पलायन
या वेल्थ के डायरेक्टर अनुज गुप्ता का कहना है कि शेयर बाजार के लिए आने वाले दिनों के लिए काफी सकारात्मक सेंटीमेंट बन रहे हैं, जिसकी शुरुआत सोमवार को सर्गियो गोर के बयान से हो चुकी है और हालांकि, इन सभी सकारात्मक संकेतों के बावजूद एक परेशानी अभी भी बनी हुई है, और वह है विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से पलायन। उन्होंने बताया कि सोमवार को शेयर बाजार की शानदार रिकवरी के बाद भी। विदेशी निवेशकों ने बाजार से 3600 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की। वहीं, मौजूदा महीने में वे अब तक 15,400 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। अनुज गुप्ता ने आगे कहा कि अगर जल्द ही व्यापार समझौते पर कोई सकारात्मक खबर आती है, तो यह पलायन रुक सकता है और शेयर बाजार में बंपर तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि विदेशी निवेश बाजार की तरलता और गहराई के लिए महत्वपूर्ण होता है।