अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी सख्त विदेश नीति और व्यापारिक। कूटनीति का परिचय देते हुए क्यूबा के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इस आदेश के तहत अमेरिका उन सभी देशों पर भारी टैरिफ लगाएगा जो क्यूबा को तेल की आपूर्ति करेंगे। ट्रंप का यह कदम न केवल क्यूबा के लिए एक बड़ा झटका है बल्कि यह सीधे तौर पर मेक्सिको जैसे देशों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है जो लंबे समय से क्यूबा के ऊर्जा संकट में उसके मददगार रहे हैं।
मेक्सिको पर दबाव बनाने की रणनीति
ट्रंप के इस नए आदेश का मुख्य उद्देश्य मेक्सिको पर दबाव डालना माना जा रहा है। मेक्सिको की सरकारी तेल कंपनी पेमेक्स (Pemex) क्यूबा के लिए तेल की एक महत्वपूर्ण लाइफलाइन बनी हुई है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को जीवित रखने में बाहरी तेल आपूर्ति का बड़ा हाथ है। यदि मेक्सिको क्यूबा को तेल देना बंद कर देता है तो क्यूबा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले देशों को यह चुनना। होगा कि वे अमेरिका के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं या क्यूबा की मदद करना चाहते हैं।
क्यूबा में गहरा सकता है ऊर्जा संकट
क्यूबा पहले से ही दशकों पुराने अमेरिकी प्रतिबंधों और आंतरिक आर्थिक कुप्रबंधन के कारण गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। देश में बिजली की कटौती और ईंधन की कमी एक सामान्य बात हो गई है। अब तक क्यूबा अपनी तेल की जरूरतों के लिए वेनेजुएला और मेक्सिको पर निर्भर रहा है। हालांकि वेनेजुएला खुद राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से गुजर रहा है जिसके कारण वहां से होने वाली आपूर्ति में पहले ही कमी आई है। ऐसे में अगर मेक्सिको भी ट्रंप के टैरिफ के डर से पीछे हट जाता है तो क्यूबा में अंधेरा छा सकता है और वहां की परिवहन व्यवस्था ठप हो सकती है।
वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा की बारी
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला के खिलाफ भी कड़े कदम उठाए थे और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने की कोशिशों का समर्थन किया था और ट्रंप ने पहले ही कहा था कि वेनेजुएला का तेल अब क्यूबा नहीं जाएगा। अब क्यूबा पर सीधे प्रहार करके ट्रंप यह संदेश देना चाहते हैं कि लैटिन अमेरिका में समाजवाद और साम्यवाद के प्रभाव को खत्म करना उनकी प्राथमिकता है। ट्रंप का मानना है कि क्यूबा की सरकार गिरने की दहलीज पर है और आर्थिक दबाव इसे अंतिम धक्का दे सकता है।
पेमेक्स की रिपोर्ट और भविष्य की चुनौतियां
मेक्सिको की सरकारी तेल कंपनी पेमेक्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार उसने जनवरी से सितंबर 2025 के बीच हर दिन लगभग 20 हजार बैरल तेल क्यूबा को भेजा है। यह आपूर्ति क्यूबा की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए बेहद जरूरी है। ट्रंप के नए आदेश के बाद मेक्सिको की सरकार के सामने एक बड़ी धर्मसंकट की स्थिति पैदा हो गई है। यदि मेक्सिको तेल भेजना जारी रखता है तो उसे अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले अपने अन्य सामानों पर भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा जिससे उसकी अपनी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मेक्सिको। के राष्ट्रपति इस अमेरिकी दबाव का सामना कैसे करते हैं।
