दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान इस रणनीतिक रास्ते को बिना टैक्स या शुल्क वसूले खोलने के लिए तैयार नहीं है, जबकि ट्रंप बिना किसी शर्त और बिना शुल्क दिए इसे खुलवाने पर अड़े हुए हैं। यह विवाद अब एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य अग्निपरीक्षा में बदल चुका है, जहां दोनों पक्ष अपनी साख बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप की 48 घंटे की मोहलत और बारूदी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए 48 घंटे का समय दिया है। ट्रंप का कहना है कि या तो गुरुवार सुबह तक होर्मुज को जहाजों के लिए खोल दिया जाए, वरना ईरान को इसकी भारी बारूदी कीमत चुकानी पड़ेगी। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने उन्हें फोन करके बातचीत की इच्छा जताई है और ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है और उनके लिए ऐसा करना समझदारी भरा होगा। हालांकि, ट्रंप की इस धमकी को उनकी गनबोट डिप्लोमेसी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए वह ईरान पर दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवाना चाहते हैं।
ईरान और ओमान के बीच द्विपक्षीय वार्ता
होर्मुज को लेकर एक तरफ ट्रंप की धमकियां हैं, तो दूसरी तरफ ईरान और ओमान के बीच एक अलग समझौता आकार ले रहा है। ईरानी न्यूज चैनल प्रेस टीवी के मुताबिक, तेहरान और मस्कट के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। ईरान ने साफ कर दिया है कि यह वार्ता पूरी तरह से द्विपक्षीय है और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं है। ईरान का उद्देश्य ओमान के साथ मिलकर शिपिंग ट्रांसपोर्ट के लिए एक नया तंत्र विकसित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप बार-बार धमकियां देकर इस समझौते में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं ताकि वह दुनिया को दिखा सकें कि ईरान ने अमेरिकी दबाव में आकर यह कदम उठाया है।
60 दिनों की प्रस्तावित व्यवस्था और तकनीकी पेच
एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि होर्मुज के लिए 60 दिनों की एक अस्थायी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। इस तंत्र के तहत, होर्मुज में प्रवेश करने वाले जहाज ईरानी शिपिंग रूट का उपयोग करेंगे, जबकि बाहर जाने वाले जहाज ओमान के करीब वाली लेन से गुजरेंगे। ईरान अपनी इनबाउंड लेन पर तो पूरा नियंत्रण रखेगा ही, साथ ही वह ओमान की तरफ वाली आउटबाउंड लेन पर भी निगरानी और हस्तक्षेप का अधिकार मांग रहा है और यही वह बिंदु है जहां मामला उलझा हुआ है।
भौगोलिक स्थिति और निगरानी का अधिकार
होर्मुज जलडमरूमध्य की चौड़ाई इसके सबसे संकरे हिस्से में केवल 39 किमी है। यहां ईरान के लराक द्वीप और ओमान के जाजीरत सलामा द्वीप के बीच की दूरी बहुत कम है। 5 किमी का अपना-अपना जलक्षेत्र है। 7 किमी की शिपिंग लेन बचती है। जब जहाज होर्मुज से बाहर निकलते हैं, तो भौगोलिक बनावट के कारण उन्हें कुछ समय के लिए ईरानी जलक्षेत्र के बहुत करीब से या उसके भीतर से गुजरना पड़ता है। इसी आधार पर ईरान आउटबाउंड लेन की निगरानी का अधिकार चाहता है ताकि वह सुनिश्चित कर सके कि इस रास्ते का इस्तेमाल उसके खिलाफ नहीं होगा।
अमेरिका की शर्तें बनाम ईरान की जिद
इस पूरे विवाद में पर्दे के पीछे भी बड़ी कूटनीति चल रही है। ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ लगातार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी के संपर्क में हैं। अमेरिका चाहता है कि क्षेत्र में स्थायी सीजफायर लागू हो और परमाणु वार्ता फिर से शुरू हो। इसके विपरीत, ईरान की शर्त है कि अमेरिका तुरंत उसकी नाकाबंदी हटाए और तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को खत्म करे। सबसे बड़ा विवाद शुल्क यानी फीस वसूलने को लेकर है और ईरान हर जहाज से गुजरने का शुल्क चाहता है, जिसे अमेरिका अपनी हार के रूप में देख रहा है। अगर ईरान को शुल्क वसूलने की अनुमति मिलती है, तो यह ट्रंप के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी।
