अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। जिस ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई के खिलाफ ट्रंप कभी बेहद सख्त रुख अपनाते थे और उन्हें खत्म करने की कसमें खाते थे, अब उन्हीं के लिए उनके सुर पूरी तरह बदल गए हैं। ट्रंप अब मुज्तबा खामेनेई को एक शानदार और सम्मानित नेता बता रहे हैं। इस अचानक आए बदलाव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और हर कोई इसके पीछे के रहस्य को जानने के लिए उत्सुक है। ट्रंप ने न केवल मुज्तबा की तारीफ की है, बल्कि उनसे मुलाकात कर शांति का रास्ता निकालने की इच्छा भी जताई है। सवाल यह उठता है कि आखिर ट्रंप के इस हृदय परिवर्तन के पीछे की असली वजह क्या है और क्या यह ईरान की सैन्य ताकत का असर है?
ईरान अमेरिका युद्ध के 100 दिन और जमीनी हकीकत
एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट के अनुसार, 7 जून 2026 को ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध को 100 दिन पूरे होने जा रहे हैं। यह समय सीमा अमेरिका के लिए वैसी साबित नहीं हुई जैसी उसने उम्मीद की थी। दुनिया की महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका के सामने ईरान ने न तो घुटने टेके और न ही किसी समझौते के लिए हाथ आगे बढ़ाया। इसके विपरीत, ईरानी सेना ने इजराइल से लेकर अरब देशों और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक ऐसा विध्वंसक जवाब दिया कि अमेरिकी रणनीतिकार दंग रह गए। युद्ध के शुरुआती 40 दिनों में ही अमेरिकी सेना को इतना भारी नुकसान उठाना पड़ा कि उसे पश्चिम एशिया में स्थित अपने कई महत्वपूर्ण सैन्य बेस खाली करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
अमेरिकी सेना को हुआ भारी वित्तीय और सैन्य नुकसान
इस युद्ध में अमेरिका को जो आर्थिक और सैन्य चोट पहुंची है, वह बेहद गंभीर है। ईरान के जवाबी हमलों में अब तक अमेरिका के 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा के आधुनिक हथियार और उपकरण तबाह हो चुके हैं। अगर हम इन नुकसानों का विस्तार से विश्लेषण करें, तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इस जंग में अमेरिका के 24 MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट हो चुके हैं, जिनकी कुल कीमत 6720 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा, 8 KC-135 एयरक्राफ्ट भी बर्बाद हुए हैं, जिनकी कीमत 2960 करोड़ रुपये है। वायुसेना को एक और बड़ा झटका तब लगा जब उसके 5 F-15 फाइटर जेट ढेर हो गए, जिनकी कीमत 4175 करोड़ रुपये है। इतना ही नहीं, अमेरिका का 1 अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान भी गिराया गया, जिसकी कीमत 1020 करोड़ रुपये है। सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान 4 THAAD एयर डिफेंस सिस्टम के तबाह होने से हुआ है, जिनकी कुल कीमत 80000 करोड़ रुपये है।
ट्रंप का स्वीकारोक्ति: ईरान वेनेजुएला नहीं है
ट्रंप के इस बदले हुए रवैये के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान की वह सैन्य शक्ति मानी जा रही है, जिसके सामने अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है और खुद डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार किया है कि ईरान की स्थिति वेनेजुएला जैसी नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान वेनेजुएला से बहुत अलग है और वहां जाकर कुछ ही मिनटों में सैन्य ऑपरेशन पूरा करके वापस आना संभव नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अब इस युद्ध की जटिलताओं में फंस चुके हैं और अपनी अंतरराष्ट्रीय साख को बचाने के लिए मुज्तबा खामेनेई के साथ कोई डील करना चाहते हैं और यही वजह है कि वे अब मुलाकात के लिए बेताब दिख रहे हैं और अपने बयानों में लगातार नरमी ला रहे हैं।
मुज्तबा की तारीफ और भविष्य की कूटनीति
हाल ही में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें मुज्तबा खामेनेई से मिलकर बहुत खुशी होगी और उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे देखना चाहते हैं कि क्या दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि अगर समझौते की गुंजाइश बनती है, तो वे मुलाकात के लिए तैयार हैं और उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी और उन्होंने मुज्तबा की प्रतिष्ठा को बहुत अच्छा बताते हुए उनके प्रति सम्मानजनक व्यवहार करने की बात कही। जब एक पत्रकार ने मुज्तबा के परिवार पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए मुलाकात की संभावना पर सवाल उठाया, तो ट्रंप ने उन्हें पेशेवर करार दिया। इससे यह संकेत मिलता है कि ट्रंप को उम्मीद है कि ईरानी नेतृत्व युद्ध और शांति के बीच के फर्क को समझते हुए कूटनीतिक रास्ता अपनाएगा। अब देखना यह होगा कि क्या मध्य पूर्व में शांति की कोई नई किरण दिखाई देती है या यह केवल एक राजनीतिक दांव है।
