ट्रंप की नेतन्याहू को चेतावनी: ईरान पर हमले जारी रहे तो इजराइल पड़ सकता है अकेला

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि इजराइल ने जवाबी हमले बंद नहीं किए, तो उसे इस युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं मिलेगा और वह अकेला पड़ सकता है।

मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच हाल ही में हुए सैन्य हमलों ने वैश्विक स्तर पर चिंता की लहर पैदा कर दी है और हालांकि यह मिनी वॉर फिलहाल थमती नजर आ रही है, लेकिन इसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच के मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। दोनों नेताओं के बीच हितों का टकराव इस स्तर पर पहुंच गया है कि ट्रंप ने नेतन्याहू को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर इजराइल ने ईरान पर अपने हमले जारी रखे, तो वह इस जंग में पूरी तरह अकेला पड़ सकता है। यह स्थिति तब पैदा हुई है जब पूरा क्षेत्र एक बड़े युद्ध की कगार पर खड़ा है।

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच तीखी बातचीत

घटनाक्रम की शुरुआत 7 जून की रात को हुई जब ईरान ने इजराइल पर हमला किया। इस हमले के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर बात की और उन्हें जवाबी कार्रवाई न करने की सलाह दी। ट्रंप का तर्क था कि वह आने वाले कुछ दिनों में ईरान के साथ एक बड़ी डील करने की योजना बना रहे हैं, जिससे इन सैन्य हमलों का महत्व खत्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर डील सफल नहीं होती है, तो अमेरिका खुद युद्ध की कमान संभालेगा। हालांकि, नेतन्याहू ने इस सलाह को मानने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि इजराइल की चुप्पी से ईरान का मनोबल बढ़ेगा और दुनिया में एक गलत संदेश जाएगा। इसके बाद नेतन्याहू ने ईरान पर जवाबी हमले शुरू कर दिए।

विवाद तब और बढ़ गया जब 8 जून को ट्रंप ने दोबारा नेतन्याहू को फोन किया। इस बार ट्रंप का लहजा काफी सख्त था। " ट्रंप ने साफ कर दिया कि अगर इजराइल के ये हमले एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदलते हैं, तो अमेरिका इसमें शामिल नहीं होगा और इजराइल को अकेले ही ईरान का सामना करना पड़ेगा। जब नेतन्याहू ने पूछा कि क्या इजराइल के रुकने पर ईरान भी हमले रोकेगा, तो ट्रंप ने सकारात्मक जवाब दिया। इसके बाद नेतन्याहू ने फिलहाल हमले रोक दिए हैं, लेकिन भविष्य में कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।

इजराइल का पक्ष और सुरक्षा की चुनौतियां

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि इजराइल को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि फिलहाल गोलीबारी इसलिए रुकी है क्योंकि तेहरान ने हमले बंद कर दिए हैं, लेकिन अगर ईरान फिर से हमला करता है, तो इजराइल जबरदस्त जवाब देगा और रिपोर्ट्स के अनुसार, नेतन्याहू की रणनीति ईरान को उकसाने की हो सकती है, जैसा कि लेबनान में एयर स्ट्राइक के दौरान देखा गया था। दूसरी ओर, ट्रंप इस युद्ध से अमेरिका को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं और खुद को एक शांतिदूत के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

अमेरिका कैसे करता है इजराइल की सुरक्षा?

इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था में अमेरिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमेरिका तीन अलग-अलग स्तरों पर इजराइल की मदद करता है। पहली लेयर ट्रैकिंग और अर्ली वार्निंग की है। जैसे ही ईरान से कोई मिसाइल लॉन्च होती है, खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी रडार उसे तुरंत ट्रैक कर लेते हैं। ये रडार मिसाइलों के थर्मल सिग्नेचर का डेटा अमेरिकी सैटेलाइट को भेजते हैं, जो सीधे इजराइल के कमांड सेंटर को सूचना देते हैं। इससे इजराइल को हमले से 15 मिनट पहले ही चेतावनी मिल जाती है।

दूसरी लेयर में मिसाइलों को बीच रास्ते में ही नष्ट करना शामिल है। इराक और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों से F-16 और F-15 जैसे लड़ाकू विमान उड़ान भरते हैं और ईरानी ड्रोन व क्रूज मिसाइलों को हवा में ही मार गिराते हैं। इसके अलावा, जमीन पर तैनात पैट्रियट सिस्टम भी सक्रिय रहते हैं। तीसरी लेयर इजराइल की सीमाओं के करीब काम करती है। भूमध्य सागर और लाल सागर में तैनात अमेरिकी नौसेना के डिस्ट्रॉयर अपनी मिसाइलों से ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को निशाना बनाते हैं। जो मिसाइलें इन तीनों लेयर्स को पार कर जाती हैं, उन्हें अंत में इजराइल का अपना डिफेंस सिस्टम नष्ट करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका लगभग आधा खतरा खुद ही खत्म कर देता है, जिसके बिना इजराइल के लिए ईरान को रोकना बहुत मुश्किल होगा।

हूती विद्रोहियों के हमले और भविष्य का संकट

पिछले 24 घंटों के दौरान, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी इजराइल के ईलात शहर को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। हालांकि इन हमलों से अब तक कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन ये इजराइल के इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार पर दबाव डाल रहे हैं। ट्रंप और नेतन्याहू के बीच का यह तनाव आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है। जहां इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं अमेरिका अपने वैश्विक हितों को देखते हुए इस संघर्ष से दूरी बनाने की कोशिश में है।