ईरान का पलटवार: अपाचे और MQ-9 ड्रोन गिराने का दावा, 21 अमेरिकी ठिकानों पर हमले

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। ईरान ने अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर और MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। इसके साथ ही ईरान ने 21 अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं, जिससे डोनाल्ड ट्रंप की शांति वार्ता के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक भीषण युद्ध की शक्ल अख्तियार करता जा रहा है। हालिया घटनाक्रम में ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सेना के एक उन्नत अपाचे हेलीकॉप्टर और एक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर की गई बमबारी के जवाब में की गई है। ईरान की इस जवाबी कार्रवाई ने न केवल युद्ध के मैदान में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों की भी हवा निकाल दी है जिसमें वे शांति और समझौते की बात कर रहे थे। अब स्थिति यह है कि ईरान ने 21 अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर ट्रंप के आक्रामक तेवरों को सीधी चुनौती दी है।

हवाई हमलों और ड्रोन तबाही का विवरण

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए अमेरिका को दो बड़े झटके दिए हैं। सबसे पहले एक उन्नत अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराया गया, जिससे संघर्ष के इस नए दौर की शुरुआत हुई। इसके तुरंत बाद, ईरान ने दक्षिणी ईरान के बुशहर प्रांत के ऊपर उड़ान भर रहे एक MQ-9 रीपर ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया। ईरान ने इस ड्रोन को गिराने का एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें दावा किया गया है कि उन्होंने इस क्षेत्र में तैनात MQ-9 बेड़े का 20 प्रतिशत हिस्सा तबाह कर दिया है। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि ईरान अब केवल रक्षात्मक मुद्रा में नहीं है, बल्कि वह अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को सीधे निशाना बनाने की क्षमता रखता है।

21 ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई और बहरीन में धमाके

अमेरिका ने पहले ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में एयर डिफेंस और रडार ठिकानों पर हवाई हमले किए थे और होर्मुज के पास ईरान के कई रडार सिस्टम तबाह करने का अमेरिका ने दावा किया था। लेकिन इस हमले के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान ने 3 देशों में स्थित 21 अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर बदला लिया। इसमें सबसे प्रमुख हमला बहरीन में स्थित अमेरिकी नेवी के 5वें बेड़े (5th Fleet) पर किया गया। बहरीन में अमेरिकी मुख्यालय के पास भीषण धमाके हुए और वहां एयर रेड अलर्ट जारी करना पड़ा। ईरान ने मिसाइल लॉन्च का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें IRGC के जवान घातक मिसाइलें दागते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह ट्रंप के लिए एक स्पष्ट संदेश था कि ईरान हर फ्रंट पर लड़ने के लिए तैयार है।

ट्रंप के बदलते बयान और कूटनीतिक विफलता

ईरान को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति काफी भ्रमित करने वाली रही है। ट्रंप पहले सोशल मीडिया पर दावा कर रहे थे कि ईरान के बड़े नेताओं के साथ उनकी डील हो रही है और ईरान उनकी शर्तें मान सकता है और हालांकि, ईरान की तरफ से कभी भी इन दावों का समर्थन नहीं किया गया। ट्रंप ने पहले इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को हमले न करने की सलाह दी थी, लेकिन अब वे खुद ईरान पर बमबारी के आदेश दे रहे हैं। ट्रंप ने 2 हफ्तों में ईरान पर टोटल विक्ट्री का ऐलान भी किया है और वे ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमले की धमकी दे रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अब तक 37 बार युद्ध खत्म होने का झूठा दावा कर चुके हैं, जो उनकी कूटनीतिक विफलता को दर्शाता है।

क्षेत्रीय तनाव और इजरायल का हस्तक्षेप

इस पूरे संघर्ष की जड़ें इजरायल के हमलों से भी जुड़ी हुई हैं। 9 जून को दक्षिणी लेबनान के सूर शहर में इजरायल ने बड़ा हमला किया था जिसमें 8 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद से ही ईरान और इजरायल के बीच भी तनाव बढ़ा है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने सऊदी अरब और तुर्किये के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की है और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की निंदा की है। अराघची ने स्पष्ट किया है कि ईरान को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है और उसकी सेना हर हमले का जवाब देगी। वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि न तो इजरायल रुकने को तैयार है और न ही ईरान अपने रुख से पीछे हटने वाला है, जिससे पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा और गहरा गया है।