संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक रणनीति में एक बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। अमेरिका अब ईरान की जब्त की गई संपत्तियों का उपयोग उन खाड़ी देशों की मदद के लिए करने की योजना बना रहा है, जिन्हें हालिया संघर्षों के दौरान भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यह योजना एक ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक बातचीत के जटिल दौर से गुजर रहे हैं। एक तरफ जहां ईरान अपने फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड को जारी करने की मांग कर रहा है, वहीं अमेरिका इन संपत्तियों को मुआवजे के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय की नई रणनीति
सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्रालय यानी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ईरान के खिलाफ एक नई और सख्त आर्थिक रणनीति तैयार कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अपने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे उन सभी कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों की गहन जांच करें, जिनके माध्यम से ईरान की जब्त संपत्तियों को मरम्मत और पुनर्निर्माण के कार्यों में लगाया जा सके और अमेरिका का स्पष्ट मानना है कि ईरान ने जिन देशों के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है, उसकी आर्थिक कीमत भी ईरान को ही चुकानी चाहिए।
खाड़ी देशों से नुकसान का विस्तृत ब्यौरा तलब
इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए ट्रेजरी विभाग ने खाड़ी देशों से संपर्क किया है और उनसे युद्ध और हमलों के कारण हुए नुकसान का पूरा ब्यौरा देने को कहा है। अमेरिका यह सटीक जानकारी चाहता है कि सड़कों, इमारतों, ऊर्जा ढांचे और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की मरम्मत पर कुल कितना खर्च आएगा और हालांकि अभी यह पूरी तरह तय नहीं हुआ है कि किन ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन इसमें विदेशों में फ्रीज किए गए बैंक खाते, नकद राशि और अन्य संपत्तियां जैसे कि जब्त किए गए तेल टैंकर शामिल हो सकते हैं। यह कदम ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है।
शांति वार्ता और ईरान की 24 अरब डॉलर की मांग
यह योजना ऐसे समय में चर्चा में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष रूप से शांति वार्ता भी चल रही है। ईरान का लगातार यह रुख रहा है कि किसी भी समझौते पर पहुंचने के लिए उस पर लगे कड़े प्रतिबंधों को हटाना होगा और विदेशों में फंसे उसके अरबों डॉलर के फंड को जारी करना होगा। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अपनी करीब 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति को रिलीज करने की मांग अमेरिका के सामने रखी है। अमेरिका की नई योजना इस मांग के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि वह इस पैसे को ईरान को वापस करने के बजाय नुकसान की भरपाई में खर्च करना चाहता है।
खाड़ी देशों पर हमले और सैन्य तनाव
क्षेत्र में तनाव का मुख्य कारण ईरान द्वारा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान जैसे कई खाड़ी देशों पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमले हैं। शनिवार को यह तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरानी रडार ठिकानों पर हमला कर उन्हें निशाना बनाया। अमेरिकी सेना के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस कार्रवाई से पहले उसने ईरान के कुछ ड्रोनों को मार गिराया था, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे थे।
कुवैत और बहरीन में मिसाइल हमले
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागकर जवाबी हमला किया। कुवैत सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कुल 7 बैलिस्टिक मिसाइलें आबादी वाले इलाकों के ऊपर से गुजरीं। इन मिसाइलों के कारण कुछ संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं मिली। बहरीन में भी स्थिति तनावपूर्ण रही और वहां सायरन बजाकर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों और शेल्टरों में जाने की सलाह दी गई। इन हमलों ने क्षेत्र में असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है, जिसे देखते हुए अमेरिका अब आर्थिक दंड की रणनीति अपना रहा है।
