अमेरिका का बड़ा कदम: भारत और चीन समेत 5 देशों पर लगेगा 100 प्रतिशत टैरिफ, सीनेट में बिल पास

अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध कड़े करने के लिए 'सेंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026' पास किया है, जिसके तहत भारत और चीन सहित पांच देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान है।

अमेरिकी सीनेट ने रूस पर आर्थिक दबाव को और अधिक कड़ा करने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला विधेयक पारित किया है। इस विधेयक को सेंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026 के नाम से जाना जा रहा है। इस नए कानून के तहत भारत और चीन सहित पांच देशों पर 100 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। भारत और चीन के अलावा इस सूची में स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों को भी शामिल किया गया है। यह कदम एक ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है और भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी तेल की खरीद बढ़ानी पड़ रही है।

विधेयक का पारित होना और राजनीतिक पृष्ठभूमि

सेंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026 को दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किया गया था। इस विधेयक को मंगलवार को अमेरिकी सीनेट में मतदान के लिए पेश किया गया, जहां इसे भारी बहुमत से मंजूरी मिल गई। मतदान के दौरान 86 सीनेटरों ने इस विधेयक के पक्ष में अपना मत दिया, जबकि केवल 12 सीनेटरों ने इसके विरोध में मतदान किया। विशेष बात यह है कि यह विधेयक उस समय पारित किया गया जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की अमेरिका के कैपिटल हिल में मौजूद थे और इस कानून का मुख्य लक्ष्य रूस की अर्थव्यवस्था पर इतना दबाव बनाना है कि वह यूक्रेन पर अपने हमलों को रोकने के लिए मजबूर हो जाए। अमेरिका का मानना है कि रूस के व्यापारिक भागीदारों पर दबाव डालकर वह रूस की युद्ध मशीनरी को मिलने वाली वित्तीय मदद को रोक सकता है।

भारत पर प्रभाव और ऊर्जा संकट की स्थिति

यह विधेयक विशेष रूप से उन देशों को लक्षित करता है जिन्होंने रूसी तेल और गैस के अपने आयात को जारी रखा है या बढ़ाया है। भारत के संदर्भ में यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे पहले खाड़ी देशों से आने वाला कच्चा तेल भारत के कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हुआ करता था। लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति लगभग बंद हो गई है। ऐसी स्थिति में भारतीय तेल शोधन कंपनियों के पास रूसी कच्चे तेल को एक मुख्य विकल्प के रूप में चुनने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। अब अमेरिका का यह नया कानून इसी निर्भरता को खत्म करने के लिए भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात करता है।

टैरिफ की वर्तमान स्थिति और छूट के प्रावधान

अगर वर्तमान टैरिफ ढांचे की बात करें तो भारत पर अभी 10 प्रतिशत का अमेरिकी टैरिफ लागू है। वहीं चीन को 12 दशमलव 5 प्रतिशत टैरिफ वाले स्लैब में रखा गया है। इसके अतिरिक्त चीन के कुछ विशिष्ट सामानों पर 7 दशमलव 5 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक के अलग शुल्क भी प्रभावी हैं। स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों पर भी वर्तमान में 10 से 12 दशमलव 5 प्रतिशत के बीच अमेरिकी टैरिफ लागू हैं। लेकिन इस नए बिल के कानून बनने के बाद यह सीधे 100 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने संकेत दिया है कि यदि कोई देश रूस से अपनी गैस खरीद को रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम कर देता है, तो उसे इस भारी टैरिफ से छूट दी जा सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी और भविष्य की राह

अप्रैल 2025 में पेश किए गए इस विधेयक को लेकर सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने स्पष्ट किया था कि भारत और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कड़े कदम को अपनी मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य रूस की पूर्ण आर्थिक नाकेबंदी करना है। अब इन पांचों देशों के सामने यह बड़ी चुनौती होगी कि वे या तो रूस से अपने ऊर्जा आयात में भारी कटौती करें या फिर अमेरिका के साथ अपने व्यापार में 100 प्रतिशत टैरिफ का सामना करने के लिए तैयार रहें। यह कानून वैश्विक व्यापार संबंधों में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, विशेषकर उन देशों के लिए जो अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस पर निर्भर हैं।