Adhik Maas Kalashtami 2026: जून की कालाष्टमी क्यों है खास? जानें तिथि और महत्व

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Adhik Maas Kalashtami 2026: जून की कालाष्टमी क्यों है खास? जानें तिथि और महत्व
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हिंदू धर्म की समृद्ध परंपराओं में कालाष्टमी के व्रत का एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली कालाष्टमी पूर्णतः भगवान शिव के सबसे रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप, भगवान काल भैरव को समर्पित होती है। धार्मिक ग्रंथों में काल भैरव को समय, न्याय और सुरक्षा के अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजा जाता है। वे अपने भक्तों के जीवन से संकटों को हरने वाले और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने वाले माने जाते हैं। हालांकि, जून 2026 में आने वाली कालाष्टमी कोई साधारण तिथि नहीं है। इस बार एक ऐसा दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है जो पूरे तीन साल के अंतराल के बाद आता है, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ गई है।

अधिकमास की कालाष्टमी का विशेष महत्व

इस वर्ष कालाष्टमी का महत्व इसलिए अत्यधिक बढ़ गया है क्योंकि यह ज्येष्ठ अधिकमास की अवधि में पड़ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिकमास का संयोग लगभग हर तीन साल में एक बार बनता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास के दौरान किए गए किसी भी प्रकार के जप, तप, दान, व्रत और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यही कारण है कि श्रद्धालु इस दिन को भगवान काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए एक स्वर्णिम अवसर के रूप में देखते हैं। इस दौरान की गई आराधना से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

अधिकमास कालाष्टमी 2026 की सटीक तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 8 जून 2026, सोमवार को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 9 जून 2026, मंगलवार को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में व्रत और पूजा के निर्धारण के लिए उदया तिथि और प्रदोष काल के समय को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी शास्त्रीय गणना के आधार पर, अधिकमास कालाष्टमी का व्रत और पूजन 8 जून 2026, सोमवार को ही संपन्न किया जाएगा। श्रद्धालुओं को इसी समय सीमा के भीतर अपनी धार्मिक क्रियाएं पूर्ण करनी चाहिए।

पूजा विधि और अनुष्ठान के चरण

कालाष्टमी के दिन पूजा की एक निश्चित और पवित्र विधि का पालन किया जाता है। इस दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात, मन ही मन भगवान शिव और उनके स्वरूप काल भैरव का ध्यान करना चाहिए। घर के मंदिर या किसी पवित्र पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करें और भगवान काल भैरव को पुष्प, धूप, फल तथा मिष्ठान अर्पित करें। इस विशेष दिन पर ओम कालभैरवाय नमः मंत्र का निरंतर जाप करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन पूर्ण श्रद्धा के साथ दिनभर उपवास रखते हैं और रात्रि के समय विशेष पूजा-अर्चना कर अपना व्रत पूर्ण करते हैं।

कालाष्टमी व्रत के लाभ और धार्मिक फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति कालाष्टमी का व्रत पूरी निष्ठा से रखता है, उसके जीवन से भय, शत्रु बाधा और हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह व्रत न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि व्यक्ति के आत्मविश्वास और सकारात्मकता में भी वृद्धि करता है। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से काल भैरव की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है, जिससे उनके लंबे समय से रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने लगती है। 2026 की यह अधिकमास कालाष्टमी आध्यात्मिक उन्नति और संकटों से मुक्ति के लिए एक अत्यंत प्रभावशाली समय है।

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