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शंकराचार्य के अपमान पर बरेली सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, मचा हड़कंप

शंकराचार्य के अपमान पर बरेली सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, मचा हड़कंप
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया और यह इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक और सामाजिक संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं। अलंकार अग्निहोत्री ने अपने त्यागपत्र में प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज। के शिष्यों के साथ हुए दुर्व्यवहार और यूजीसी के नए नियमों को मुख्य कारण बताया है।

अंतरात्मा की आवाज और स्वधर्म का हवाला

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट रूप से लिखा है कि उनके लिए पद और प्रतिष्ठा से ऊपर स्वधर्म और स्वाभिमान है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी व्यक्तिगत लाभ या हानि के लिए नहीं लिया गया है, बल्कि यह उनकी अंतरात्मा की पुकार है। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समाज में संतों का सम्मान सर्वोपरि होता है, वहां उनके साथ ऐसा व्यवहार असहनीय है।

प्रयागराज माघ मेले की घटना ने किया आहत

इस्तीफे का सबसे बड़ा कारण प्रयागराज माघ मेले में हुई एक घटना को बताया गया है। अग्निहोत्री के अनुसार, ज्योतिष्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के बटुक शिष्यों की चोटी (शिखा) पकड़कर प्रशासन द्वारा बेरहमी से पिटाई की गई और उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस पावन धरती पर संतों की शिखा को छूना भी पाप माना जाता है, वहां उन्हें घसीटा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन अब ब्राह्मणों के उत्पीड़न पर मूक सहमति दे रहा है?

यूजीसी रेगुलेशन 2026 को बताया 'काला कानून'

धार्मिक कारणों के अलावा, अलंकार अग्निहोत्री ने 13 जनवरी को प्रकाशित यूजीसी विनियम 2026 पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे 'काला कानून' करार देते हुए कहा कि ये नियम कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर देंगे। उनका आरोप है कि ये प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और इससे ब्राह्मण समुदाय के लोगों पर अत्याचार बढ़ेंगे और उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे नियम सामाजिक अशांति और आंतरिक अस संतोष को जन्म दे सकते हैं।

कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?

अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) अधिकारी हैं। मूल रूप से कानपुर नगर के रहने वाले अग्निहोत्री की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली है और उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से बीटेक और एलएलबी की पढ़ाई की है। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उन्होंने अमेरिका में भी काम किया है। वह अपनी सख्त कार्यशैली और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। बरेली से पहले वह उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

अग्निहोत्री ने अपना इस्तीफा राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से भेजा है। एक कार्यरत मजिस्ट्रेट द्वारा इस तरह के गंभीर आरोप लगाकर इस्तीफा देना उत्तर प्रदेश शासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस इस्तीफे की चर्चा हो रही है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस संवेदनशील मामले पर क्या रुख अपनाती है।

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