चीन ने ईरान को दी अमेरिकी एयरबेस की तस्वीरें, 3 सैनिकों की मौत से जुड़ा लिंक

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
चीन ने ईरान को दी अमेरिकी एयरबेस की तस्वीरें, 3 सैनिकों की मौत से जुड़ा लिंक
विज्ञापन

चीन से जुड़े संस्थानों द्वारा ईरान को जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयरफोर्स बेस की उच्च गुणवत्ता वाली सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराने का एक गंभीर मामला सामने आया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से जानकारी दी है कि ये तस्वीरें 17 जुलाई को ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमले से ठीक पहले और बाद की थीं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन तस्वीरों और जॉर्डन के मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर हुए हमले के बीच एक स्पष्ट संबंध मिला है। इस हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई थी, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

हमले में हताहत हुए सैनिकों का विवरण

17 जुलाई को हुए इस भीषण हमले में अमेरिका ने अपने तीन जांबाज सैनिकों को खो दिया। मारे गए सैनिकों में 25 साल के लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहान, 19 साल की प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस और 28 साल के सार्जेंट एंजेल एस. रामपर्साड शामिल थे। इस हमले में चार अन्य अमेरिकी सैनिक भी घायल हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, 24 घंटे के भीतर ईरान ने इस एयर बेस पर तीन मिसाइल हमले किए थे। ये मिसाइलें ठीक उसी जगह पर गिरीं जहां अमेरिकी सैनिक सो रहे थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि हमलावरों के पास बेस की सटीक जानकारी थी। इसके अलावा ईरान ने बेस पर मौजूद विमानों को भी अपना निशाना बनाया था।

राजनयिक तनाव और चीन की प्रतिक्रिया

अमेरिका के मुताबिक, चीन की मदद से ईरान के हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक चीन पर सीधे तौर पर हमले में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया है। इस मामले से अमेरिका और चीन के रिश्तों में तनाव और बढ़ने की आशंका है, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक होनी है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह मामला चीन के अधिकारियों के सामने उठाया है, लेकिन चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और अमेरिका से सबूत मांगे हैं। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि चीन और ईरान का सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार है और उन्होंने आलोचकों पर दूसरे देशों को बदनाम करने का आरोप लगाया।

ईरान द्वारा चीनी तकनीक का उपयोग

यह पहली बार नहीं है जब ईरान के सैन्य अभियानों में चीनी तकनीक के इस्तेमाल की बात सामने आई है। इससे पहले अप्रैल में ऐसी रिपोर्ट आई थी कि ईरान चीन में बने जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल कर रहा है। इसी के मद्देनजर मई में अमेरिका ने तीन चीन स्थित सैटेलाइट कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगाया था। 17 जुलाई का यह हमला अप्रैल में हुए 60 दिन के युद्धविराम के बाद ईरान युद्ध में पहली अमेरिकी सैन्य मौतें थीं। जून में अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम रुकने के बाद यह एक बड़ा हमला माना जा रहा है। इसके बाद 10 सितंबर को ईरान ने फिर से मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर हमला किया था, जिसमें कुछ अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचने की खबरें आई थीं, हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने इन खबरों से इनकार किया था।

विज्ञापन